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Dr D K Garg

2 गरुड़ पुराण में कई बातें परस्पर मेल नहीं खातीं :
प्रथम अध्याय के 37वें श्लोक में कहा गया है कि यमलोक तक के मार्ग में कहीं वृक्षों की छाया व विश्राम का स्थल नहीं है जबकि इसी अध्याय के 44वें श्लोक में मृतक को यमदूतों सहित एक वट वृक्ष के नीचे विश्राम करने की बात कही गई है। इससे साफ है कि गरुड़ पुराण झूठ के पुलिंदे के सिवा कुछ नहीं।
दूसरे अध्याय के 77वें श्लोक में कहा गया है कि शौतादय नाम के कथित नगर में हिमालय से 100 गुणा अधिक सर्दी पड़ती है। जब हिमालय, जहां का तापमान शून्य से नीचे रहता है, में ही कोई मानव बस्ती नहीं है तो वहां से 100 गुणा अधिक सर्दी वाली जगह पर एक नगर कैसे बस सकता है? शून्य से नीचे के तापमान में खून जमना आरंभ हो जाता है। जहां शून्य से नीचे 100 डिगरी या उस से अधिक ठंडा तापमान होगा तो वहां से यमदूत किस प्रकार से गुजर सकते हैं?
गरुड़ पुराण के चौथे अध्याय में तीर्थों, ग्रंथों व पुराणों पर विश्वास न करने वाले, नास्तिक व दान न देने वाले व्यक्तियों को पापी कहा गया है। मृत्यु के बाद उन को नरक भुगतना पड़ता है। जबकि पापी तो वे लोग हैं, जो दूसरे की कमाई पर जिंदा रहते हैं और वे ठगी की कमाई खाते हैं।
चौथे अध्याय के अनुसार, गुड़, चीनी, शहद, मिठाई, घी, दूध, नमक व चमड़ा बेचना पाप है। फिर तो एक बहुत बड़ी जनसंख्या इन वस्तुओं का व्यापार करके पापी की श्रेणी में आती है। 5वें अध्याय के मुताबिक गर्भ नष्ट करने वाला डाक्टर म्लेच्छ जाति में जन्म लेता है तथा सदा रोगों से पीडि़त रहता है। क्या आज तक किसी ने किसी डॉक्टर को ऐसी हालत में देखा है? इसी अध्याय के 5वें श्लोक के अनुसार, जो व्यक्ति अकेला ही किसी स्वादिष्ठ वस्तु को खाता है उसे गलगंड रोग हो जाता है। श्राद्ध में अपवित्र अन्न दान में देने वाले को कुष्ठ रोग हो जाता है। पुस्तकें चुराने वाला जन्म से ही अंधा व पानी चुराने वाला पपीहे के रूप में जन्म लेता है।
क्या इन बातों पर विश्वास किया जा सकता है?
3 गरुड़ मंत्र?
यह मंत्र है ‘यक्षि ओम उं स्वाहा’.।
मान्यता है कि यदि इस मंत्र का प्रयोग किसी सिद्ध व्यक्ति के सानिध्य में किया जाए तो पाठ करने वाला जीव ज्ञान, यश, रूप, लक्ष्मी, विजय और आरोग्य प्राप्त करता है। इसका नियमित रूप से पाठ करने या सुनने से सब कुछ जानने और अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
4 गरुड़ घंटी
आमतौर पर पूजा-पाठ के शुभ कार्य में जो घंटियां प्रयोग में लाई जाती हैं, उनके ऊपरी भाग में हाथ जोड़े हुए श्री गरुड़ जी बने होते हैं।
जिसके पीछे यह माना जाता है कि यह भगवान विष्णु के वाहन के रूप में भक्तों का संदेश भगवान तक पहुंचाते हैं। और भोग लगाते समय गरुड़ जी घंटी की दिव्य ध्वनि से भगवान के भोग को पवित्र एवं आरोग्य कारक बनाते हैं। बिना गरुड़ घंटी के ध्वनि के उनका भोग अधूरा रहता है। आगे एक और मान्यता है की गरुड़ जी जब उड़ते हैं, तो उनके पंखों के हिलने से जो ध्वनि उत्पन्न होती है, वह ध्वनि मंत्रोच्चारण जैसी होती है और वातावरण सहित सब शुद्ध हो जाता है।

आज के वैज्ञानिक युग में ये कितना बड़ा अंधविश्वास है,आप विचार करें।

5 सामाजिक बुराइयों का जन्मदाता
१ गरुड़ पुराण में सतीप्रथा
सतीप्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध करने के स्थान पर खुलेआम इन का समर्थन किया गया है। इस पुस्तक के प्रथम अध्याय के 40वें श्लोक में पति की मृत्यु पर सती न होने वाली पत्नियों को नरक भोगने की सजा देने की बात कही गई है। 10वें अध्याय के श्लोक संख्या 34 से 40 तक सतीप्रथा के महत्व पर प्रकाश डाल कर विधवाओं के लिए सती होने के तरीके सुझाए गए हैं।
इसी अध्याय के श्लोक संख्या 45 के अनुसार, पति के मरने पर जब तक स्त्री अपने पति के साथ सती नहीं होती तब तक उस का मृत पति उस के शरीर से अलग नहीं होता। श्लोक 47 के मुताबिक, सती होने वाली पत्नी को स्वर्गलोक प्राप्त होता है। श्लोक संख्या 53 के अनुसार, पति के साथ सती न होने वाली पत्नियों को विरह की आग में जलने की यातना दी जाती है। देश के राजस्थान जैसे राज्यों में आज भी सतीप्रथा की बात होती रहती है। इस प्रथा को गरुड़ पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथ ही बढ़ावा देते हैं जिन पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।
२ गरुड़ पुराण में जातिप्रथा
गरुड़ पुराण में ब्राह्मण समुदाय को सब से ऊंचा माना गया है. छठे अध्याय के 36वें श्लोक में ब्राह्मण समुदाय को सब से ऊंचा माना गया है। एक प्रकार से यह पुस्तक ब्राह्मणवाद और पाखंडवाद को ध्यान में रखकर लिखी गई है।
इस अंधविश्वास पुराण के चौथे अध्याय की श्लोक संख्या 21 के अनुसार, वेद के अक्षरों को पढऩे वाले व गाय का दूध पीने वाले शूद्रों को यमराज द्वारा रक्त व मवाद की नदी वैतरणी में डुबोने की सजा दी जाती है। 7वें अध्याय के 12वें श्लोक के अनुसार, मनुष्य को छोटी जाति की कन्याओं से दूर रहना चाहिए क्योंकि केवल सवर्ण पुरुष-महिलाओं के मिलने से उत्पन्न पुत्र ही दान के माध्यम से पुरखों को स्वर्ग पहुंचा सकता है। इसका अर्थ ये हुआ कि दलित तो सभी नर्क जाते हैं।

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