चंद्रयान-3 की सफलता और भारत के सांस्कृतिक मूल्य

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चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा पर लैंड करके भारतवर्ष ने अंतरिक्ष में एक नया इतिहास रच दिया। इसके लिए हमारे वैज्ञानिकों का कठोर परिश्रम ,धैर्य, लगन और कर्तव्य के प्रति निष्ठा के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी जी का तेजस्वी नेतृत्व और सभी देशवासियों का अपने वैज्ञानिकों पर पूर्ण भरोसा धन्यवाद और बधाई का पात्र है। इस दिशा में अब से पूर्व जितने भी प्रयास किए गए थे उन प्रयासों को भी आज हमें याद करना चाहिए। उस समय के हमारे नेतृत्व और वैज्ञानिकों की दूरदर्शिता भी आज अनायास ही स्मरण हो आती है।
भारतवर्ष में 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3 को अंतरिक्ष में चंद्रमा के लिए भेजा था जो 23 अगस्त को निश्चित समय पर चंद्रमा पर उतर चुका है। इस प्रकार भारतवर्ष ने चंद्रमा को जीत लिया है। हमारा मानना है कि संसार में केवल एक भारतवर्ष ही ऐसा देश है, जिसने चंद्रमा से मामा का संबंध जोड़ा अर्थात धरती मां का भाई। इस प्रकार आज ऐसा नहीं लगता कि हम कहीं दूर और पराये घर में गए हैं, बल्कि लगता है कि हम अपने ही घर में गए हैं । सचमुच मामा का घर अपना ही घर होता है।
भारतवर्ष चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। सबसे पहले जो देश चंद्रमा पर पहले जा चुके हैं वे हैं – अमेरिका, रूस, चीन। भारतवर्ष द्वारा भेजा गया लेंडर सफलतापूर्वक सारी बाधाओं को दूर करते हुए और सारे देश के लोगों की शुभकामनाओं को अपने साथ-साथ लेकर चलते हुए जब चंद्रमा पर पहुंचा तो जहां देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।वहीं भारत के शत्रु जलकर राख हो गए हैं। यह हम सब देशवासियों के लिए बहुत ही गौरव और रोमांच के क्षण थे क्योंकि ऐसे क्षण जीवन में कभी-कभी ही आते हैं। एक महान उपलब्धि को हमने अपनी आंखों के सामने उपलब्ध होते देखा है जिसके हम सब साक्षी बने हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह कहना सच है कि हमने मुश्किलों के महासागर को पार किया है। हमने ध्यान से अपने लक्ष्य पर निशाना साधा और उसी की साधना में लगे रहे। जिसका परिणाम आशानुकूल आया है। बीच में कई प्रकार की कठिनाइयां आईं । बाधाओं ने रास्ते में बाड़ लगाई । कठिनाइयां ने रास्ते में कांटे बिछाये । देश के शत्रुओं ने हम पर तंज कसे , पर हमने आगे बढ़ना छोड़ा नहीं।
23 अगस्त को शाम 6:05 पर लैंड होने वाले लैंडर को चंद्रयान – 3 कहा गया है। इससे पूर्व में हमारा चंद्रयान -2 वर्ष 2019 में 3 वर्ष पहले असफल हो चुका था। परंतु भारतवर्ष के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का यह अथक प्रयास है कि उन्होंने तीसरी बार में भारतवर्ष को सफलता प्रदान की है और भारतवर्ष की झोली में एक नया कीर्तिमान दिया है।इसके लिए सभी अंतरिक्ष विज्ञानी एवं उनकी टीम धन्यवाद एवं साधुवाद के पात्र हैं।
विश्व भर में भारत की उदीयमान होती हुई प्रतिभा को हम देख रहे हैं। वस्तुत: अब हमारे लिए 23 अगस्त का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक हो गया है। निश्चित रूप से इस सफलता से देश का सम्मान बढ़ा है और अब विश्व के बड़े से बड़े देश के वैज्ञानिक भी भारत के वैज्ञानिकों का लोहा मान चुके हैं।
प्रत्येक भारतीय को इस क्षण की बहुत तीव्र उत्कंठा थी। यही कारण है कि इस उपलब्धि के पश्चात प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्नता का अनुभव कर रहा है। भारत के सभी 140 करोड़ देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
यह बात तो हम सब भारतवासियों के लिए और भी अधिक गैार्बान्वित करने वाली है कि भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर वहां पर लैंडिंग की है जहां आज तक कोई भी देश पहुंच नहीं पाया था। भारत की विज्ञान एवं तकनीकी की पराकाष्ठा को विश्व देख रहा है। हमें इस समय स्मरण हो रहा है कि हमारे ऋषि और मुनी अपने यान के द्वारा भिन्न-भिन्न ग्रहों की यात्रा करते थे ।यह तकनीकी , विज्ञान और कला केवल भारत को आती थी। हम सभी भारतवासी ऐसी ही कला, विज्ञान और तकनीक के उत्तराधिकारी हैं। इससे अधिक प्रसन्नता और क्या होगी कि हमारे पूर्वज पहले से ही अंतरिक्ष को जीते हुए हैं। अब भारत वासियों का चंदा मामा से सीधा संबंध हो गया है।
लेकिन अब चंदा मामा बहुत दूर के नहीं रहे हैं। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि संसार में चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचने वाला भारतवर्ष प्रथम देश में बन गया है। साथ यह भी बहुत प्रसन्नता का विषय है कि अभी सूरज को प्राप्त करने के लिए भी भारतवर्ष प्रयास कर रहा है।
भारत अपने महान पुरुषार्थ और बौद्धिक क्षमताओं के लिए जाना जाता है । प्राचीन काल से ही भारत ने अनेक प्रकार के अनुसंधान करके संसार को दिए हैं। हम सबके लिए यह गर्व और गौरव का विषय है कि भारत के ऋषियों के अनुसंधान मानवता के हित कल्याण के लिए हुआ करते थे। आज भी भारतवर्ष शांतिपूर्ण उद्देश्यों को लेकर परमाणु और विज्ञान की दुनिया में कम कर रहा है । इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां प्राप्त करने के उपरांत भी किसी देश ,समाज और समुदाय को डराना धमकाना नहीं है, इसके विपरीत भारत सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया…. की पवित्र भावना में विश्वास रखने वाला देश है। यह बात सही है कि जिसकी सोच पवित्र होती है ईश्वरीय शक्तियां भी उसी की सहायता करते हैं। कुल मिलाकर हमें अपने चिंतन, ऋषियों के मार्गदर्शन और भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की जीत के रूप में हमें चंद्रयान-3 की सफलता को देखना चाहिए।

देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट
अध्यक्ष : उगता भारत समाचार पत्र

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