Categories
महत्वपूर्ण लेख

लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद से अधिक प्राथमिकता विपक्ष ने अपनी एकजुटता को दी

विपक्ष ने देश की संसद से ज्यादा अपनी एकजुटता को तवज्जो दी

योगेंद्र योगी

विपक्ष ने नई संसद के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया, इस बहिष्कार में भी कई दलों में एकता दिख रही है, दरअसल विपक्ष अलग-अलग मुद्दों के जरिए 2024 के चुनाव में एकजुट होकर बीजेपी की ओर चुनावी तीर चलाना चाहता है।

संविधान निर्माताओं ने संसद भवन को भारतीय लोकतंत्र का पवित्र स्थान मानते हुए जिस संविधान का गठन किया था, उस वक्त उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि यह भवन देश के अमन और तरक्की के रास्ते पर चलते हुए विश्व में लोकतांत्रिक आदर्शों पर चलने की बजाय राजनीति का शर्मसार करने वाला अखाड़ा बन जाएगा। पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की सदस्यता के विवाद और अब संसद की नई इमारत सत्ता पक्ष और विपक्ष में फजीहत का कारण बन गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष में नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर आई कडुवाहट से विश्व में भारत की छवि प्रभावित हो रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी टकराहट का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले विपक्षी दलों पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के कारण भी ऐसा नजारा देखने को मिला था। हालांकि इस मुद्दे पर विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी, किन्तु भाजपा और विपक्षी पार्टियों में तल्खी और बढ़ गई।

नये संसद भवन को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है जो कम होने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष ने नई संसद के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया, इस बहिष्कार में भी कई दलों में एकता दिख रही है, दरअसल विपक्ष अलग-अलग मुद्दों के जरिए 2024 के चुनाव में एकजुट होकर बीजेपी की ओर चुनावी तीर चलाना चाहता है। यह नया संसद भवन सरकार और विपक्ष के बीच कटुता की एक नई इमारत के रूप में खुल रहा है। ऐसे संकेत हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव तक यह दरार और चौड़ी हो सकती है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। समूचा विपक्ष राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से उद्घाटन कराने पर जोर देते हुए समारोह के बहिष्कार पर अड़ा रहा। खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को कहा कि आपकी सरकार के अहंकार ने संसदीय प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है। महामहिम राष्ट्रपति का पद संसद का प्रथम अंग है। सरकार के अहंकार ने संसदीय प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है।

राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर ट्वीट किया कि ‘नए संसद भवन का राष्ट्रपति को उद्घाटन करना चाहिए, न कि पीएम को।’ गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के बहिष्कार को लेकर कहा कि आप इसे राजनीति के साथ मत जोड़िये। सब अपने विवेक के हिसाब से काम कर रहे हैं। भाजपा ने भी कांग्रेस और दूसरे राज्यों की सरकारों के समय हुए ऐसे उद्घाटनों की फेहरिस्त गिनाई है, जिनमें राष्ट्रपति या राज्यपाल को आमंत्रित नहीं किया गया। नए संसद भवन का पीएम मोदी से उद्घाटन को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत 19 विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया। सभी दल अपनी सुविधा अनुसार और वोटों के समीकरण के आधार पर विरोध-समर्थन कर रहे थे। सभी की निगाहें 2024 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ आगामी राज्य चुनावों पर भी टिकी हैं। कांग्रेस को एससी, एसटी और पिछड़ों को लुभा कर 2024 में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह उनका मजबूत वोट बैंक रहा है और कर्नाटक में भी यह उनके पक्ष में गया। माना जा रहा है कि इसलिए बहिष्कार की राजनीति में यह मोड़ आया।

नए संसद भवन के बहिष्कार के मुद्दे पर कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी (सपा) और आप सहित 19 विपक्षी दलों ने हाथ मिलाने का फैसला किया है। वैसे इस बात पर भी आश्चर्य नहीं कि तेलुगु देशम पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे अन्य विपक्षी दलों ने इस उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। ये पार्टियां काफी लंबे समय से बीजेपी के करीब चल रही हैं और टीडीपी निश्चित रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में फिर से शामिल होने की उम्मीद में बीजेपी के करीब आ रही है। नए भवन के उद्घाटन से पहले एक छोटा-सा हवन किया गया और इस पर भी विपक्षी पार्टी नेताओं द्वारा आपत्ति जताई जा रही है। भाजपा निश्चित तौर पर हवन के विरोध को चुनावी मुद्दा बनाने से नहीं चूकेगी। राष्ट्रवाद और राष्ट्रहित के मुद्दों पर कांग्रेस, कुछ अन्य विपक्षी दलों की तरह बैकफुट पर रही है। कम से कम लोकसभा चुनाव के लिए तो बीजेपी और प्रधानमंत्री इसे अवश्य ही मुद्दा बनाएंगे।

विपक्षी दल इस मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार का पुरजोर तरीके से विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों के विरोध से इस बात की ज्यादा संभावना नहीं है कि सभी एकजुट होकर आगामी लोकसभा और राज्यों में होने वाले विधानसभाओं के चुनाव मिल कर लड़ेंगे। संसद भवन से पहले राहुल गांधी की सदस्यता के मामले में विपक्षी दल एकता नहीं दिखा सके। भाजपा का विरोध करने मात्र से विपक्षी एकता की संभावना क्षीण है। विपक्षी दल विगत कई वर्षों से भाजपा का विरोध करते आ रहे हैं, किन्तु पूर्व में हुए चुनावों में भी उनका विरोध एकता को सिरे से नहीं चढ़ा सका। केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश जारी करके दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार के अधिकारों को सीमित करने के मामले में विपक्षी दल राज्य सभा में कानून बनने से रोकने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि कांग्रेस ने फिलहाल इससे दूरी बना रखी है, किन्तु संसद में इस कानून के पक्ष में वोट देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में कांग्रेस के पास वॉकआउट ही एक रास्ता होगा। संसद भवन के उद्घाटन पर सत्तारुढ़ और विपक्षी दलों में टकराव को मुद्दा बेशक चुनावी बने, किन्तु इसमें लोकतंत्र की ढहती हुई स्वस्थ परंपराओं का एक नया अध्याय ओर जुड़ गया है। देश और लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठ कर ऐसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर एक राय कायम करें।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betamiral giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkare giriş
noktabet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
restbet güncel
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betnano giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
fikstürbet giriş
fiksturbet giriş
fiksturbet
betplay giriş
betplay
betplay giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betplay giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betkare giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
biabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
efesbet giriş
efesbetcasino giriş
efesbetcasino giriş
maxwin giriş
betnano giriş