Categories
वैदिक संपत्ति

वैदिक सम्पत्ति : गतांक से आगे… ग्रहस्थाश्रम

ग्रहस्थाश्रम

उपर्युक्त इच्छाएँ विना गृहस्थाश्रम के पूरी नहीं हो सकतीं, इसलिए वेदों में गृहस्थाश्रम का पर्याप्त वर्णन है। यहाँ हम नमूने के तौर पर गृहस्थाश्रम की खास खास बातें लिखते हैं। सबसे पहिले देखते हैं कि वेदमन्त्रों के अनुसार गृहस्थ की हालत कैसी होनी चाहिये । अथर्ववेद में लिखा है कि-

इहैव स्तं मा वि यौष्टं विश्वमायुश्नुतम् । कीलन्तौ पुत्रैर्नप्तृभिर्मोदमानौ स्वे गृहे ॥ ( ऋ० 10/85/42 )

अर्थात् किसी से विरोध न करो, गृहस्थाश्रम में रहो, पूर्ण आयु प्राप्त करो, पुत्र और पौत्रों के साथ खेलते हुए और श्रानन्द करते हुए अपने ही घर में रहो और घर को आदर्शरूप बनाओ। इसके आगे यह दिखलाते हैं कि गृहस्वामी दंपति का परस्पर कैसा आदर्श होना चाहिये। ऋग्वेद उपदेश करता है कि-

समञ्जन्तु विश्वे देवाः समापो हृदयानि नौ ।
सं मातरिश्वा सं धाता समु देष्ट्री दधातु नौ । (ऋ० 10/85/47 )

अर्थात् संसार की समस्त शक्तियां और विद्वान् हम दोनों पतिपत्नी को अच्छी प्रकार जानें, हम दोनों के हृदय जलके समान शान्त हों और हम दोनों की प्राणशक्ति, धारणशक्ति और उपदेशशक्ति परस्पर कल्याणकारी हो । यह वैदिक दम्पति का आदर्श है। अब देखना चाहिये कि इस वैदिक दम्पति का घर कैसा है । वेदमन्त्रों के आदेशा नुसार सर्वसाधारण के घर बहुत ही साद होने चाहियें । अथर्ववेद में लिखा है कि-

ऊर्जस्वती पयस्वती पृथिव्यां निमिता मिता ।
विश्वान्न विभ्रती शाले मा हिंसीः प्रतिगृह्नतः ॥ ( अथर्व० 6/3/16 )
तृणैरावृता पलदान वसाना रात्रीव शाला जगतो निवेशनी ।
मिता पृथिव्यां तिष्ठसि हस्तिनीव पद्धती | ( अथर्व० 9/3/17 )
या द्विपक्षा चतुष्पका षट्पक्षा या निमीयते ।
अष्टापक्ष दशपक्षां शालां मानस्य पत्नीमग्निगर्भ इवा शये ।। ( अथर्व० 9/3/21 )

अर्थात् उपजाऊ और पानीवाली भूमि पर छोटी सी निर्वाहयोग्य जिसमें समस्त आवश्यक अन्न भरे हैं, ऐसी हे शाला ! तू अपने ग्रहणकर्ता ( निवासी ) को मत मारना । तृण से छाई हुई और तोरण बन्दनवारों से सजी हुई है शाला ! तू सबको रात्रि के समय शान्ति देनेवाली है और लकड़ी के खम्भों पर हस्तिनी की भाँति थोड़ी सी जमीन पर स्थित है। जो शाला दो छप्परवाली, चार छप्परवाली, छै छप्परवाली और जो आठ तथा दश छप्परवाली बनाई जाती है, उस इज्जत बचानेवाली शाला में मैं जठराग्नि और गर्भ के समान निवास करता हूँ। यह है वैदिक घरों की सादगी। अब देखना चाहिए कि इन घरों में खाद्य और पेय पदार्थों के तैयार करने वाली गृहस्थी का कैसा वर्णन है। ऋग्वेद में लिखा है कि-

यत्र ग्रावा पृथबुध्न ऊर्ध्वो भवति सोतवे । उलूखलसुतानामवेद्विन्द्र जल्गुलः ॥1॥
यत्र द्वाविव जघनाधिषवण्या कृता । उलू० ॥2॥
यत्र नार्यपच्यवमुपच्यवं च शिक्षते।उलू०॥3॥
तत्र मन्थां विबध्नते रश्मीन्यमितवा इव।उलू०।॥4॥
यच्चिद्धि त्वं गृहेगृह उलूखलक युज्यसे।
इह द्यु मत्तमं वद जयतामिव दुन्दुभिः ||5|| (ऋ० 1/28)

अर्थात् जहाँ बड़ा स्थूल पत्थर (चक्की) नीचे ऊपर चलता है, जहाँ दो जंघाओं के बीच में सिलबट्टा चलता है, जहाँ स्त्रियाँ पदार्थों का धरना, उठाना और रॉधना पकाना जानती हैं, जहाँ मथानी को रस्सी से बांधकर दही मथा जाता है और जहाँ घर घर में उलूखल मूसल चलता है, वे घर ऐसे प्रकाशित होते हैं, जैसे जय के समय दुन्दुभि प्रकाशित होती है। इन वैदिक घरों में चक्की, सिलबट्टा, उखली मूसल और मथानी के शब्द दुन्दुभि के समान अन्न चाहने बालों को घोषित कर रहे हैं और गृहदेवियाँ पदार्थों के धरने उठाने और रांधने, पकाने में लगी हुई है। इन घरों में जिस प्रकार अन्नदान की धूम मची हुई है, उसी तरह घी-दूध की भी धारा बह रही है। अथर्ववेद में लिखा है कि-

चतुरः कुम्भश्चतुर्धा ददामि क्षीरेण पूर्णा उदकेन दध्मा ।
एतास्त्वा धारा उप यन्तु सर्वाः स्वर्गे लोके मधुमत् पिन्द्रमाना उप त्वा तिष्ठन्तु पुष्करिणीः समन्ता:॥ (अथर्व० 4/34/7)

अर्थात् चार-चार घड़े दूध और चार -चार घड़े पानी चारों ओर देता हूँ। ये सब भापको स्वर्ग में सुखस्थान में पोषण पहुँचावें ।

पूर्ण नारि प्रभर कुम्भमेतं घृतस्य धाराममृतेन संभृताम् ।
इमां पातनमृतेना समड्ग्धीष्टापूर्तमभि रक्षात्येनाम् ॥ (अथर्व० 3/12/8)

अर्थात् हे स्त्री ! तू दूध और घी को घड़ों में भरकर उनकी धारा से इन पीनेवालों को तृप्त कर और वापी कूप तड़ाग तथा दान यादि सब प्रकारों से इनकी रक्षा कर।
क्रमशः

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
Hitbet giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
hitbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş