Categories
आज का चिंतन

आर्यसमाज धामावाला-देहरादून का रविवारीय सत्संग- “मनुष्य को सुकर्मों को करने में देरी नहीं करनी चाहियेः आचार्य डा. सत्यदेव निगमालंकार” ==========

ओ३म्
हम दिनांक 23-4-2023 को आर्यसमाज धामावाला, देहरादून के साप्ताहिक रविवारीय सत्सग में सम्मिलित हुए। हम जब आर्यसमाज पहुंचे तो वहां आर्यसमाज के पुरोहित पं. विद्यापति शास्त्री जी सत्यार्थप्रकाश के चौदहवें समुल्लास का पाठ कर रहे थे। इससे पूर्व प्रातः 8.00 बजे से आरम्भ सामूहिक यज्ञ आर्यसमाज की यज्ञशाला में सम्पन्न किया जा चुका था। यज्ञ के बाद पं. विद्यापति जी के भजन एवं स्वामी श्रद्धानन्द बालवनिता आश्रम की एक कन्या द्वारा सामूहिक प्रार्थना भी सम्पन्न की गई थी। सत्यार्थप्रकाश के पाठ के बाद आर्यसमाज के प्रधान श्री सुधीर कुमार गुलाटी जी ने आचार्य रामप्रसाद वेदालंकार जी की पुस्तक ‘‘वैदिक पुष्पांजलि” से ऋग्वेद के एक मन्त्र को बोल कर उसका आचार्य रामप्रसाद जी द्वारा लिखा गया व्याख्यान प्रस्तुत किया। आर्यसमाज के रविवार को होने वाले सत्संग में हरिद्वार अथवा स्थनीय स्तर के एक विद्वान को बुलाकर व्याख्यान कराया जाता है। आज का व्याख्यान हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी के वेद विभाग के अध्यक्ष एवं प्रोफेसर आचार्य डा. सत्यदेव निगमालंकार जी का हुआ।

आचार्य सत्यदेव निगमालंकार जी ने कहा कि हम सब मनुष्यों को विष्णु नामी परमेश्वर के कर्मों को देखना चाहिये। वेद भगवान वेद में हमें कर्म करने को भी कह रहे हैं। आचार्य जी ने विष्णु के कार्यों को देखने तथा कर्म करने की ईश्वर आज्ञा के मध्य सामंजस्य स्थापित किया। आचार्य जी ने कहा कि हमारे कर्मों का आधार सत्य होना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम ऐसा कोई कर्म न करें जिसे करने के बाद हमें पछतावा हो। वैदिक विद्वान आचार्य डा. सत्यदेव निगमालंकार जी ने कहा कि मनुष्य जो कर्म करता है उसका फल उसे अवश्य मिलता है। उन्होंने कहा कि बिना कर्म किये हमें फल की उपलब्धि नहीं हो सकती।

आचार्य सत्यदेव जी ने कहा कि ऋषि दयानन्द जी ने अपने ग्रन्थ में सबसे अधिक सत्य की चर्चा की है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना तपस्या है। आचार्य जी ने कहा कि जो मनुष्य सत्य का धारण व पालन करते हैं उनकी कही हुई बात सत्य सिद्ध होती है। उन्होंने आगे कहा कि असत्य बोलने वाले मनुष्य असत्य बोलकर अपनी आत्मा को मारते हैं। इसके लिए आचार्य जी ने यजुर्वेद के चालीसवें अध्याय के तीसरे मन्त्र का प्रमाण भी प्रस्तुत किया। वैदिक विद्वान आचार्य जी ने मनुष्य की आत्मा के मृत्यु के बाद कुत्ते वा गधे आदि पशु योनियों में प्रवेश कर जन्म लेने पर विचार एवं गम्भीर चिन्तन प्रस्तुत किया। पशु योनियों में मनुष्य की आत्मा का जन्म लेने का कारण आचार्य जी ने मनुष्य के असत्य कर्मों को बताया। उन्होंने कहा कि हमें आत्मा के विभिन्न योनियों में कर्मानुसार जन्म लेने विषयक विष्णु परमात्मा के कर्मों को देखना व समझना चाहिये। विद्वान आचार्य जी ने कहा कि चर और अचर जगत में व्याप्त होकर जो रहता है उसका नाम विष्णु है।

आचार्य सत्यदेव निगमालंकार जी ने कर्म-फल के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने मनुष्यों को ही सत्य व असत्य का विचार कर कर्म करने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि पशु व पक्षी आदि प्राणी जो कर्म करते हैं वह स्वतन्त्र कर्म न होकर भोग प्रधान कर्म होते हैं जिनका नियमन ईश्वर द्वारा किया जाता है। मनुष्य सोच-विचार कर स्वतन्त्रतापूर्वक कर्मों को करता है जबकि पशु आदि प्राणी अपने पूर्व किये हुए कर्मों का फल भोगते हैं। आचार्य जी ने श्रोताओं को बताया कि वेद एवं ऋषियों के ग्रन्थों का स्वाध्याय करना भी ब्रह्मयज्ञ कहलाता है। मुख्यतः ब्रह्मयज्ञ ईश्वर के गुण, कर्म व स्वभाव सहित उसके स्वरूप का ध्यान व चिन्तन करने को कहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी यह समस्त सृष्टि विष्णु नामी ईश्वर के कर्मों का परिणाम है।

आर्यसमाज के विद्वान आचार्य सत्येदव जी ने कहा कि मनुष्य को सुकर्मों को करने में देरी नहीं करनी चाहिये। आचार्य जी ने सभी सत्संगियों को पशु वा पक्षियों को भोजन कराने की प्रेरणा की। उन्होंने कहा इन प्राणियों को भी हमारी तरह भूख लगती है। अपनी-अपनी सामथ्र्य के अनुसार इन प्राणियों की क्षुधा की निवृत्ति करना हम सब मनुष्यों का कर्तव्य है। आचार्य जी ने कहा कि हमारे घर में जो पौधे व वृक्ष लगे हों, उन्हें जल से सिंचित करना भी हमारा कर्तव्य है। इन कार्यों को करने का आचार्य जी ने दार्शनिक महत्व बताया। गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक एवं आचार्य स्वामी श्रद्धानन्द वा महात्मा मुंशीराम जी की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने विष्णु परमात्मा के कर्मों को देखकर अपने कर्मों का निर्धारण किया था। आचार्य जी ने कहा कि हम विषैले पशुओं के समान ही जहरीलें हैं जो पशु-पक्षियों की वेदनाओं को नहीं समझते हैं। इस बात का आपने विस्तृत चिन्तन व विचार देकर उस पर प्रकाश डाला। आचार्य जी ने सीढ़ियों पर पड़ी एक छिपकली का उदाहरण दिया जिस पर पैर रखकर लोग जा रहे थे और वह तड़फ रही थी। आचार्य जी ने बताया कि उन्होंने उस छिपकली को देखकर उसे उठाकर एक सुरक्षित स्थान पर रख दिया था। आचार्य जी ने अपने पशु प्रेम एवं कार्यों के कुछ उदाहरण भी प्रस्तुत किये। इसी के साथ आचार्य जी ने अपने व्याख्यान को विराम दिया। इसके बाद आर्यसमाज के प्रधान श्री सुधीर गुलाटी जी ने आचार्य जी का इस महत्वपूर्ण व्याख्यान के लिए धन्यवाद किया। स्वामी श्रद्धानन्द बाल वनिता आश्रम की दो कन्याओं ने संगठन सूक्त के मन्त्रों का मिलकर पाठ कराया। इसके बाद शान्तिपाठ भी हुआ। इसी के साथ आज का सत्संग समाप्त हुआ। आचार्य जी ने अपने व्याख्यान में लाहौर में सन् 1886 में डीएवी कालेज की स्थापना की चर्चा भी की। उन्होंने बताया कि यह डीएवी शिक्षण संस्थान आर्यसमाज अनारकली, लाहौर के दो कमरों में स्थापित किया गया था। इस समाज व कमरों को आर्यसमाज के महाधन महात्मा हंसराज ने भिक्षा में प्राप्त किया था। उन्होंने बताया कि आज डीएवी शिक्षण संस्थान देश भर में 976 विद्यालय एवं महाविद्यालय चलाता है तथा देश की बहुत बड़ी शिक्षण संस्था है।

आर्यसमाज के सत्संग में उपस्थित होकर हमें अच्छा लगा। यहां हमें अपने कुछ चार पांच दशक पुराने मित्र भी मिले। सभी से संक्षिप्त चर्चा करके प्रसन्नता हुई। आचार्य सत्येदव निगमालंकार जी से भी हम तीन चार दशक पूर्व आचार्य डा. रामनाथ वेदालंकार जी के हरिद्वार स्थित निवास पर मिला करते थे। वह पुरानी हमारी यादें भी आज उन्हें देखकर ताजा हो गईं। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
holiganbet giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betwoon giriş
betwoon giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betwoon giriş
betwoon giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş