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कम्युनिस्टों पर सरदार पटेल के 5 अनमोल विचार !!!

इस देश का इतिहास वामपंथियों ने लिखा इसलिए उन्होंने इस सच को छुपा लिया कि फरवरी 1948 में कम्युनिस्टों ने इस देश की सरकार का तख्ता पलटने का षडयंत्र रचा था इसलिए सरदार पटेल के निर्देश पर कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था। आइए क्रमवार जानते हैं सरदार पटेल के विचार “कौमनष्टियों” पर…

सरदार पटेल का विचार क्रमांक 1

“दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कम्युनिस्टों ने अंग्रेज़ सरकार का समर्थन किया था और उन्हे मदद दी थी। जिसके बदले में उन्हे अंग्रेज़ सरकार से शक्ति प्राप्त हुई। लेकिन 1945 में जब हम कांग्रेस के नेता जेल से छूटे तो कम्युनिस्टों को धक्का लगा। मुझे भारत में कम्युनिस्टों का कोई भविष्य नहीं दिखता क्योंकि उन्होने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं दिया है, बल्कि इस दौरान वो खुद को ताकतवर बनाते रहे। इसलिए जनता की भावनाएं उनके खिलाफ हैं। जहां तक हैदराबाद की बात है तो वहां के निज़ाम की रजाकार सेना ने कम्युनिस्टों को हथियार दिये हैं, लेकिन वो हमारे सामने लंबे समय तक नहीं टिक पाएंगे। वो अगर किसानों और मजदूरों को हिंसा की तरफ मोड़ेंगे तो हम उनसे कड़ाई से निपटेंगे। उनका उद्देश्य अराजकता फैलाना है।”

(स्रोत – सरदार पटेल द्वारा विदेशी पत्रकार स्टीफ डेविस को 2 अक्टूबर 1948 को दिया इंटरव्यू, सरदार पटेल की बेटी मणिबेन पटेल की लिखी किताब in Tune with Millions में प्रकाशित हुआ है)

सरदार पटेल का विचार क्रमांक 2

“किसी एक पार्टी की वजह से आज अगर हैदराबाद पूरी दुनिया में बदनाम है तो वो है कम्युनिस्ट पार्टी। ये लोग कुछ और नहीं बल्कि हत्यारे और डकैत हैं। महिलाओं, बच्चों और गांववालों को गोली से मार देना या फिर बेदर्दी से उनके टुकड़े कर देना वामपंथ नहीं है। मैं कम्युनिस्टों से कह देना चाहता हूं कि इन क्रूर हरकतों में शामिल लोगों को मैं उखाड़ फेकूंगा। हैदराबाद में कम्युनिस्ट लोग सिर्फ उत्पात करने के लिए आये हैं, क्योंकि इससे उन्हे काफी पैसा मिलता है। मैं उनसे कहता हूं कि हैदराबाद छोड़ दो, मैं यहां एक भी कम्युनिस्ट बर्दाश्त नहीं करूंगा।”

(स्रोत – सरदार पटेल के पर्सनल सेक्रेटरी और पूर्व आईसीएस अधिकारी वी. शंकर की पुस्तक My reminiscences of Sardar Patel का पेज नंबर 132)

सरदार पटेल का विचार क्रमांक 3

“चीन के बाहरी खतरे के साथ-साथ हमें आंतरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ेगा। अभी भारत के कम्युनिस्टों को विदेश में रहने वाले कम्युनिस्टों से संपर्क करने और हथियार प्राप्त करने में दिक्कत आती है। लेकिन अब चीन तिब्बत तक पहुंच चुका है, अब उनके पास कम्युनिस्ट चीन तक पहुंचने का आसान तरीका मिल गया है। अब देशद्रोहियों और कम्युनिस्टों को देश में घुसपैठ करना आसान हो जाएगा।”

(सरदार पटेल का अपनी मृत्यु से सिर्फ 37 दिन पहले यानी 11 नवंबर 1950 को नेहरू को लिखा गया पत्र)

सरदार पटेल का विचार क्रमांक 4

“कम्युनिस्टों का काम है कि देश में गड़बड़ कराओ, अशांति पैदा करो और रेल की पटरी उखाड़ दो। इस प्रकार की हड़ताल कराओ कि सरकार चले ही नहीं। तब हमने सोच लिया कि इन कम्युनिस्टों के साथ ट्रेड यूनियन में बैठना देश के लिए बड़ी खतरनाक चीज है। इस लिए हमने उनसे अलग रहने का फैसला किया।”

(स्रोत – भारत की एकता का निर्माण, पेज नंबर 163, पब्लिकेशन डिपार्टमेंट, सूचना प्रसारण मंत्रालय)

सरदार पटेल का विचार क्रमांक 5

“मुझे समाजवाद सिखाने की किसी को जरूरत नहीं है। मैंने फैसला किया था कि यदि सार्वजनिक जीवन में काम करना हो, तो अपनी नीजि संपत्ति नहीं रखनी चाहिए। तब से आज तक मैंने अपनी कोई चीज नहीं रखी। न मेरा कोई बैंक एकाउंट है, न मेरे पास कोई जमीन है और न मेरे पास अपना कोई मकान है। इसीलिए कोई मुझे कोई समाजवाद का पाठ न सिखाए। लेकिन याद रहे मैं हिंदुस्तान की बरबादी होने के काम में कभी साथ नहीं दूंगा। चाहे आप मुझे पूंजीपतियों का एजेंट कहें या जो कहें।”

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