images (17)

डॉ डी के गर्ग
भाग- 5
ये लेख दस भाग में है , पूरे विषय को सामने लाने का प्रयास किया है। आप अपनी प्रतिक्रिया दे और और अपने विचार से भी अवगत कराये

कुछ अलंकारिक शब्दावली
कुछ विशेष शब्दों का साहित्यिक भावार्थ :
शिव:–शिव नाम परमात्मा का है(शिवु कल्याणे) इस धातु से ‘शिव’ शब्द सिद्ध होता है। ‘बहुल-मेतन्निदर्शनम्’=ख्धातुपाठे चुरादिगणे, इससे ‘शिवु’ धातु माना जाता है, “यः मङ्गल-मयो जीवानां मङ्गलकारी च सः शिवः”=जो स्वयं, कल्याणस्वरूप है, और सबके, कल्याण का करने हारा है, इसलिये उस परमात्मा का नाम ‘शिव’ है और ये परमात्मा निराकार है।
शंकर –‘’यः शं कल्याण, सुखं करोति स शंकर ‘’अर्थात् जो कल्याण एवं सुख देने वाला है इससे ईश्वर का नाम शंकर है। यही अर्थ शिव का है(यजु. 16/41) में ऐसे परमेश्वर को शिव ही नहीं शिवतर, शिवतम, मयोभूः मयस्कर आदि नामों से स्मरण कर नमन किया है
महादेव -‘महत्’ शब्द पूर्वक ‘देव’ शब्द से ‘महादेव’ सिद्ध होता है। ‘यो महतां देवः स महादेवः’ जो महान् देवों का देव अर्थात् विद्वानों का भी विद्वान्, सूर्यादि पदार्थों का प्रकाशक है, इसलिए उस परमात्मा का नाम ‘महादेव’ है।
4- गणेश– (गण संख्याने) इस धातु से ‘गण’ शब्द सिद्ध होता है, इसके आगे ‘ईश’ वा ‘पति’ शब्द रखने से ‘गणेश’ और ‘गणपति शब्द’ सिद्ध होते हैं। ‘ये प्रकृत्यादयो जडा जीवाश्च गण्यन्ते संख्यायन्ते तेषामीशः स्वामी पतिः पालको वा’ जो प्रकृत्यादि जड़ और सब जीव प्रख्यात पदार्थों का स्वामी वा पालन करनेहारा है, इससे उस ईश्वर का नाम ‘गणेश’ वा ‘गणपति’ है।
शक्ति -(शकॢ शक्तौ) इस धातु से ‘शक्ति’ शब्द बनता है। ‘यः सर्वं जगत् कर्तुं शक्नोति स शक्तिः’ जो सब जगत् के बनाने में समर्थ है, इसलिए उस परमेश्वर का नाम ‘शक्ति’ है।
भगवान् – (भज सेवायाम्) इस धातु से ‘भग’ इससे मतुप् होने से ‘भगवान्’ शब्द सिद्ध होता है। ‘भगः सकलैश्वर्यं सेवनं वा विद्यते यस्य स भगवान्’ जो समग्र ऐश्वर्य से युक्त वा भजने के योग्य है, इसीलिए उस ईश्वर का नाम ‘भगवान्’ है।
कैलाश
(अमर कोष व्याख्या रामाश्रयी टीका पृष्ठ 35) के अनुसार―कै़लास = कैलास – क प्रत्यय से लस श्लेषण क्रीडनयोः धातु से इसकी सिद्धि होती है। कम इति जलम्, ब्रह्म व तस्मिन के जले कै़लास= कैलास―क प्रत्यय से लस श्लेषण क्रीडनयो धातु से इसकी सिद्धि होती है―
कम इति जलम् ब्रह्म व तस्मिन के जले ब्रह्ममणि लासः लसनमस्य इति कैलासः।
क अर्थात् ब्रह्म में क्रीड़ा करने का जिसका स्वभाव हो। यहाँ क से अभिप्राय ब्रह्म या ब्रह्मजल से है क्योंकि ‘क‘ नाम ब्रह्म का है। परम योगी साधक उस ब्रह्मजल में निमग्न रहता है। परमानन्द की प्राप्ति होने से वह कैलाश में सदा स्थिर रहता है। यही उसका कैलाशवाश है।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
onwin
grandpashabet giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
betgaranti
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
onwin giriş
onwin giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
grandpashabet giriş
kolaybet giriş
Kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
marsbahis giriş
onwin
onwin
favorisen giriş
favorisen giriş
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betkanyon
betkanyon
sahabet giriş
betkanyon giriş
betkanyon giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş