होली का पर्व एक प्राचीन वैज्ञानिक पर्व* *भाग- 4*

images (22)

डॉ डी के गर्ग

विशेष : कृपया अपने विचार बताये और अन्य ग्रुप में शेयर करे
होली के नाम पर फुहड़ता और महापुरुषों का चरित्र हनन का गंदा खेल–
होली से संबंधित लेख में आपको बताया कि होली का पर्व सदियों पुराना और हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता का प्रतीक है क्योंकि इस पर्व के द्वारा बदलते मौसम में निरोगी रहने का अचूक उपाय सुझाया है इसलिए इस पर्व पर रात्रि को गांव के बाहर विशाल सामूहिक अग्निहोत्र से कीटो का शमन, जौ की बाली अग्नि में भूनकर वर्षा दूर करना ताकि पकी हुई फसल नष्ट ना हो और अगले दिन शरीर पर यज्ञ की मर्दन, केसू के फूलों के जल से नहाना आदि इस पर्व का मुख्य उद्देश्य है।
प्राचीन काल में होलिकोत्सव के आनंदमय अवसर पर शिक्षाप्रद नाटक, अभिनय खेलने की प्रथा थी लेकिन वर्तंमान में इसका स्थान भद्दे स्वांग, नाच गानों ने ले लिया है। होली पर वर्तमान तरीके को देखकर लगता है कि हम अपनी परिपाटी भूल चुके हैं ।
कुछ बानगी देखो।
1. शराब भांग नशा का बढ़ता चलन।
2. मांस विक्रेताओं के यहाँ हिंदुओं की बढ़ती भीड़।
3. होलिका दहन में गौ के गोबर से बने उपले, हवन सामग्री के साथ यज्ञ करने के बजाय कूड़ा करकट और गंदी लकड़ियों के ढेर में आग लगाकर पूजना।
4. राधा कृष्ण का नाच और उनको फूलों से चारों ओर से ढ़क देना।
जिस तरह दो नकली लोगों को कृष्ण-राधा बनाकर,एक साथ बैठाकर उनके ऊपर फूलों की बारिश करते हैं वह प्रकृति के नियम विरुद्ध हैं। फूल पेड़ पर लगा हजारों टन वायु शुद्ध करता है और ये कार्य फूलों की बर्बादी है।
एक कवि ने लिखा है की पुष्प की क्या अभिलाषा होती है…
मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!
हम सभी ये जानते हैं कि राधा-कृष्ण की मामी थी और मामा, मामी, नाना के भांजे को बहुत स्नेह होता है, और ऐसा ही कृष्ण राधा के मध्य था। कृष्ण की पत्नी का नाम रुक्मणी था। कृष्ण का राधा के साथ किसी भी प्रकार के अश्लील नाच गाने का प्रदर्शन किसी भी तरह से उचित और धार्मिक क्रिया नहीं कह सकते। ये हिंदू समाज पर कलंक है। यदि हिम्मत है तो मोहम्मद को उसकी पत्नियां जैनब, आयेशा आदि के साथ दिखा कर देखंे। ये ढ़ोंग एक साजिश के तहत हिन्दू-धर्म में शामिल किया गया है जो आजकल मंदिरों में जोश के साथ दिखाई पड़ता है और पंडे भी कोई आवाज नहीं उठाते बल्कि इस दुष्प्रचार से धन कमाने में लगे हैं।
पर्व विधि:
१. होली पर्व से काफी समय पूर्व गौ के उपले गांव/शहर/कॉलोनी से बाहर होने वाले महायज्ञ के लिए तैयारी शुरु कर दे।
२. यज्ञ के लिए सामग्री ऋतु के अनुसार तैयार करें जिसमे ,लॉन्ग ,जावित्री आदि जरूर मिलाये ।
३. होली के पहले दिन शाम को सामूहिक यज्ञ का आयोजन करें। इसमें जौ की बलिया भुने और आपस में बांटकर सेवन करें और सभी आपसी द्वेष भुलाकर गले मिले ।
४. अगले दिन इस यज्ञ की राख को घर ले जाये और आपस में एक दुसरे के शरीर पर लेप करे।
५. रात्रि को केसू के फूल पानी में भिगो दें, तथा रख से शरीर पर लेप के उपरांत स्वयं और अतिथि को स्नान करायें, दिन के तीसरी पहर से पूर्व ही इस कार्य को समाप्त कर ले और नए वस्त्र धारण करें।
६. ठंडाई बनाये जिसमे काली मिर्च कुछ निम्न मात्रा में भांगरे के पत्ते पीस कर डाल सकते हैं, इस मात्रा में भांगरे का सेवन आयुर्वेद के नियम के अनुसार ही करें।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
hititbet
hititbet
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet