अरब के महान कवि द्वारा वेदों का गुणगान

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(Admiration of VEDAS, by Great Arabic poet Labee, 3745 years ago, in Arabic poem, is as follows:)
हजरत मोहम्मद साहब का जन्म सोमवार 5 अप्रैल 571 ईस्वी (आज से 1445 वर्ष पूर्व) को, सऊदी अरब के मक्का में हुआ था.
मोहम्मद के जन्म से 2300 वर्ष पूर्व अर्थात् आज से 3745 वर्ष पूर्व (=1700 BCE) “लबी बिन अख्तर बिन तुरफ़ा”
अर्थात् तुरफ़ा के पुत्र अख्तर, अख्तर के पुत्र लबी नामक अरब के महान कवि ने वेदों का गुणगान अरबी भाषा की निम्नलिखित कविता में किया:
१) अय मुबारकल अर्ज यू श शर्रअ यू नूहामिनल, हिन्द ए फ़राद कल्लहो मयानज्जे लाजिकातुन
पदार्थ: (अय) हे (मुबारकल) धन्य, (अर्ज यू) सन्देश, (शर्रअ यू) धर्मशास्त्रीय, (नूहामिनल) प्रशस्ति(आदर) करने योग्य, (हिन्दे) भारत के, (फ़राद) केवल, (कल्लहो) सत्य मार्गदर्शक, (मयानज्जे) अमृतमय, (लाजिकातुन) प्रकाशपुन्ज.
भावार्थ: हे भारत की पुण्यभूमि तू धन्य है, क्योंकि तुझमें ही ईश्वर ने अपने सत्यज्ञान का अमृतमय प्रकाश किया.
Meaning: O blessed land of Bhaarat, thou art worthy reverence for in thee has GOD illuminated true knowledge of himself.
२) वहल तजल्लीयातुन एनाने सहाबी अरावतुन, हाजा यूनज्जेलो रसूलो जीकतान मिनल हिन्दतुन.
पदार्थ: (वहल) ध्यान देने योग्य, (तजल्लीयातुन) प्रकाश-पुन्ज, (एनाने) वास्तविक, (सहाबी) मैत्रीपूर्ण, (अरावतुन) मार्गदर्शक, (हाजा) पवित्र, (यूनज्जेलो) परमात्मा, (रसूलो) ऋषि, (जीकतान) पात्र, (मिनल) से, (हिन्दतुन) भारत से.
भावार्थ: ईश्वरीय ज्ञानस्वरुप ये चारों पुस्तकें (वेद), जो हमारे मानसिक नेत्रों को, किस आकर्षक और ऊषा की ज्योति को देते हैं. परमेश्वर ने भारत में अपने पैगम्बरों (ऋषियों), के हृदयों में इन चारों वेदों के प्रकाश किया.
Meaning: What a pure light do these four revealed books afford to our mind’s eyes like the (charming and cool) lustre of the dawn ?
These four Vedas, GOD revealed unto his prophets(Rishis) in Bhaarat.
३) यकूलुनल्लाह या अहलल अर्ज यू आलमीन कुल्लहुम, फ़तवे आजिकातूल वेद हक्कन मालम युनज्जेलो लहुम.
पदार्थ: (यकूलुन) अनुपम, (अल्लाह) ईश्वर, (या) हे, (अहलल) अत्यन्त मधुर, (अर्ज यू) उपदेश, (आलमीन) विश्व के लिए, (कुल्लहुम) सबके लिए, (फ़तवे) धार्मिक सन्देश, (आजिकातूल) प्रकाशमय, (वेद) वेद, (हक्कन) वास्तविक, (युनज्जेलो) परमात्मा, (लहुम) प्रकाशित करता है.
भावार्थ: पृथ्वी पर रहने वाले, सभी मनुष्यों को ईश्वर उपदेश करता है, की मैंने वेदों में जिस ज्ञान को प्रकाशित किया है, उसको तुम अपने जीवन में क्रियान्वित करो. उसके अनुसार आचरण करो, निश्चित रूप से ईश्वर ने ही वेदों का ज्ञान दिया है.
Meaning: And GOD thus teaches all races of mankind that inhabit the earth that, “Observe (in your lives) the knowledge I have revealed in the Vedas” for surely GOD has illuminated them.
४) बहोव आलम उस्साम वल यजुर मिनल्लहे तनजीलन, फ़ ऐनमा युर्वी यो मुत्तबे अन यो ब मरेयो नजातुन्.
पदार्थ: (बहोव आलम) संसार को ईश्वर भली-भांति जानता है, (उस्साम) सामवेद, (वल यजुर) यजुर्वेद, (मिनल्लहे) अल्लाह की ओर से, (तनजीलन) अवतरित हुए, (फ़ ऐनमा) जहाँ कहीं भी, (युर्वी) अरब के, (यो मुत्तबे) जो भक्त, (अन यो) से जो, (ब मरेयो) मरणधर्मा, (नजातुन्) मुक्तिप्रद.
भावार्थ: सामवेद और यजुर्वेद वे ख़जाने (कोष) हैं, जिन्हें परमेश्वर ने दिया है. ऐ मेरे भाइयों तुम इनका आदर करो, क्योंकि ये मुक्ति का समाचार देते हैं.
Meaning: Those tresures are SaamVeda and YajurVeda which GOD has illuminated.
O my Brothers! revere these, for they tell us the good news of salvation.
५) व अस्नैने इयारिक व अतरना सहीनक अखूबतुन, व अस्नात अला अदन वहोव अश्र अखुन.
पदार्थ: (व अस्नैने) और उज्जवल प्रकाशपूर्ण, (इया) विशेषकर, (रिक) ऋग्वेद, (व अतरना) और अथर्ववेद, (सहीनक) ठीक, (अखूबतुन) भ्रातृत्व, (व अस्नात) और उज्जवल, (अला) सम्मान, (अदन) स्वर्ग, (बहोव) वह परमात्मा, (अश्र) गुण, (अखुन) भ्रातृत्व.
भावार्थ: इन चारों में से ऋग्वेद और अथर्ववेद हमें विश्व भ्रातृत्व का पाठ पढ़ाते हैं. ये वो ज्योति-स्तम्भ हैं, जो हमें उस लक्ष्य की ओर अपना मुख मोड़ने की चेतावनी देते हैं.
Meaning: The two next, of these four Vedas, Rig and Atharva teach us lessons of universal brotherhood. These two (Vedas) are the beacons that warn us to turn towards that goal (Universal Brotherhood).
वेदों से सम्बन्धित यह मूल अरबी कविता बग़दाद के अब्बासी वंश के प्रसिद्ध खलीफ़ा “हारून-अल-रशीद” (786 ईस्वी से 806 ईस्वी) के दरबार में बग़दाद के प्रसिद्ध
कवि (मलिकुश्शोरा) “अस्मई” द्वारा पढ़ी गई थी. यह अरबी काव्य-संग्रह “सीरुलउकूल” नाम से पुस्तक रूप में West Publishing Company “West Palaestine” ने प्रकाशित किया है. यह पुस्तक भारत में “हाज़ी हमज़ा शीराजी एन्ड को.” पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स, बान्द्रा रोड, मुम्बई से उपलब्ध है. यह कविता सीरुलउकूल के पृष्ठ संख्या-118 पर है.
साभार:
१) अरब में इस्लाम (स्वामी आत्मानन्द तीर्थ)
२) वेदों का यथार्थ स्वरुप (पण्डित धर्मदेव विद्यावाचस्पति विद्यामार्तण्ड)

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