स्वच्छ पानी हर नागरिक का मूलभूत अधिकार

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15 अगस्त 2019 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने ‘जल जीवन मिशन’ की स्थापना की घोषणा की जिसका कार्य 2024 तक देश के सभी घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। 15 अगस्त 2019 को देश में लगभग 19 करोड़ घरों में पानी की व्यवस्था करने की आवश्यकता थी। केवल 3 करोड़ 23 लाख घरों में पानी का प्रावधान हो पाया था, बाकी के लिए जल का कोई साधन नहीं था। दूर से पीने का पानी लाना पड़ता था।
यद्यपि 1986 में राष्ट्रीय पेयजल मिशन की स्थापना की गई थी, 1991 में इसका नाम बदल कर राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन रख दिया गया और गांव-देहात तथा शहरों में नल से जल की सुविधा का कार्य किया जाने लगा। 15वें वित्त आयोग में सरकार ने गांव की पंचायतों को 1.73 लाख करोड़ रुपए की राशि 5 वर्षों में स्वच्छ पानी की व्यवस्था के लिए आवंटित करने का प्रावधान किया है।
स्वच्छ पीने का पानी हर नागरिक की मूलभूत आवश्यकता और अधिकार है। आंकड़ों पर नज़र डाली जाए तो देश में अभी भी 12 करोड़ लोगों के घरों में नल से जल की व्यवस्था नहीं है। पीने का स्वच्छ पानी न मिलने की वजह से गंदे पानी से होने वाली बीमारियां कई बार भयंकर रूप धारण कर लेती हैं और कई लोगों को पानी की अशुद्धता के चलते जीवन से हाथ धोने पड़ते हैं
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में प्रगति की दिशा में बहुत बदलाव आए, लेकिन बहुत सी मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दिया गया। शहरों को छोड़ कर देश की अधिकतर आबादी जो गांव में रहती है, को पीने का पानी कुओं, बावडि़यों, नहर, नदी, कूहल, रहट और पानी के दूसरे स्रोतों से लेना पड़ा। कई बार तो मीलों चल कर घड़ों और गागरों में पानी सिर पर रख कर लाना पड़ता था। महिलाओं और बढ़ते बच्चों ने इस काम में एक विशेष भूमिका अदा की। परिवार में उनके इस योगदान को कभी नकारा नहीं जा सकता।
बहुत सी सामाजिक विषमताओं के कारण पानी को लेकर गांव-देहात में कई अप्रिय घटनाएं भी सुनने में आती हैं। 2021-22 के केंद्रीय बजट में 50 हज़ार करोड़ रुपए की धनराशि, देश के शहरी हिस्सों में जहां पानी और नल की व्यवस्था नहीं है, यह राशि खर्च करने का प्रावधान किया गया। 2021 नवंबर तक घरों की संख्या 19.22 करोड़ हो गई जिनमें से 8.59 करोड़ घरों को नल से जल की सुविधा प्रदान करवा दी गई।
जल जीवन मिशन के कार्यक्रम ‘हर घर नल से जल’ के लिए सरकार ने 2022-23 के बजट में 60 हज़ार करोड़ रुपए के आवंटन की घोषणा की है ताकि लोगों को पीने के पानी के लिए दूर न जाना पड़े, उनके घर में ही नल से पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध हो। सरकार ने 2024 तक देश के प्रत्येक घर में नल से जल की व्यवस्था करने का लक्ष्य रखा है।
विश्व में 97 प्रतिशत खारा पानी है। केवल 3 प्रतिशत पानी पीने योग्य है। आज जल संकट की जो स्थिति बनी हुई है ऐसे में सरकार का यह दायित्व है कि वह जल के प्रति ऐसी नीति लाए जो लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का कानूनी अधिकार दे। क्योंकि यह सर्वविदित है कि जल मानव को जीवित रखने के लिए आॅक्सीजन के बाद सबसे अहम तत्व है। ऐसे में यदि सरकार खाद्य सुरक्षा की तरह स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार सभी नागरिकों को दे तो यह न केवल लोगों के लिए सबसे कल्याणकारी कदम होगा बल्कि इसके साथ संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित गरिमामय जीवन जीने के अधिकार का क्रियान्यवयन भी सिद्ध करेगा।
हमें पानी की एक-एक बूंद बचानी होगी, हर घर जल से और हर घर नल से। अगर हम आज पेयजल की बूंद-बूंद को नहीं बचाते हैं, तो भविष्य में हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। बेहतर भविष्य के लिए यह जरूरी है कि हम आज ही पानी की बचत करें। पहले के समय में गांवों में पेयजल स्रोतों का लोग खुद संरक्षण करते थे, लेकिन आज ये सब बातें पुरानी हो गई हैं। पहले की तरह लोगों को आगे आकर पेयजल स्रोतों का खुद संरक्षण करना है, तभी हम भावी संकट से बच पाएंगे। सरकार लोगों को जागरूक करे।(युवराज )
आशीष वशिष्ठ

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