संस्कारित संतान ही कर सकती हैं श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण : डॉ. अर्चना प्रिय

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– संस्कारों के अभाव में खुल रहे वृद्धाश्रम। भगवान श्रीराम व श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम खुलना शर्म की बात।

– वर्तमान काल में संस्कारों की प्रासंगिकता विषय पर हुआ बेबिनार।

महरौनी (ललितपुर) । महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्यसमाज महरौनी जिला ललितपुर के तत्वावधान में आर्यरत्न शिक्षक लखन लाल आर्य के संयोजकत्व में आयोजित “वैदिक जीवन जीने का ढंग” विषय पर दिनांक 19 सितंबर 2022 ” वर्तमान काल में संस्कारों की प्रासंगिकता विषय पर कनोहर लाल स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय मेरठ में असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत विभाग अध्यक्ष डॉ.अर्चना प्रिय आर्य ने कहा कि मानव जीवन में उन्नति एवं विकास करने के लिए संस्कारों का विशेष महत्व है। मानव की शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक उन्नति के लिए जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत विभिन्न अवस्थाओं के अनुकूल संस्कारों की व्यवस्था वेद के मनीषियों व ऋषि मुनियों ने बहुत ही सुंदर ढंग से की है। संस्कारों से परिष्कृत मनुज ही द्विज कहलाते हैं अन्यथा संस्कार हीन व्यक्ति द्विज बनने के योग्य नहीं होते हैं और वह धन-धान्य से संपन्न होकर भी शूद्र कहलाते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारित संतान ही श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण कर सकती हैं। आज के युग में मनुष्य नए नए निर्माणों पर जोर दे रहा है लेकिन जिस संतान का निर्माण करना चाहिए उस ओर उसका कोई ध्यान नहीं है। तभी तो आज भगवान श्रीराम व श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम खुले जा रहे हैं। आये दिन संपत्ति के लिए माँ पिता भाई बहिन के खून किए जा रहे हैं। इन सबका कोई कारण हमारी संस्कार विहीन संतानें हैं। डॉ. आर्य ने कहा कि मानव निर्माण के लिए हमें संस्कारों को अपनाना चाहिए। इस विलासिता भरे जीवन में आज मानव पशुओं से भी निम्न दिशा की ओर अग्रसर हो गया है। उसकी गिद्ध दृष्टि उसकी धन के प्रति अतृप्त लालसा भाई को भाई, पिता को पिता, बहन को बहन नहीं समझ रही है। परिवार टूट रहे हैं इसलिए सूत्र में आबद्ध सौहार्द मणि बिखर गए हैं। आज आवश्यकता है मननशील सहृदय मर्यादित सच्चरित्र एवं उदार हृदय वाले मानव की। हमें ऐसे उत्तम मानव का निर्माण करना है तो संस्कार प्रणाली को अपनाना ही होगा। अपने परिवार में संस्कारों को पूर्ण विधि के साथ संपन्न कराना होगा।

व्याख्यान माला में डॉ निष्ठा विद्यालंकार लखनऊ,प्रो. डॉ. व्यास नंदन शास्त्री बिहार,अनिल नरूला,प्रेम सचदेवा,भोगी प्रसाद म्यामर,युद्धवीर आर्य,चंद्र कांता आर्य,अवध बिहारी तिवारी,अवधेश प्रताप सिंह बैंस,आराधना सिंह शिक्षिका,सुमन लता सेन आर्य,सुनील आर्य,विवेक प्रिय आर्य मेरठ,मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ सहित सम्पूर्ण विश्व से आर्यजन जुड़े थे।
कार्यक्रम का संचालन व आभार व्यक्त आर्य समाज महरौनी के मंत्री आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य द्वारा किया गया।

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