मालदीव : हमारी विदेश नीति दब्बू क्यों?

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की गिरफ्तारी ने मालदीव की राजनीति को फिर गरमा दिया है। नशीद अपने देश की मुख्य विपक्षी पार्टी मालदीविन डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता भी हैं। उन्हें वर्तमान राष्ट्रपति यामीन की सरकार ने इस आधार पर गिरफ्तार कर लिया है कि 2012 में उनके आदेश पर एक वरिष्ठ न्यायाधीश को गिरफ्तार किया गया था, जिसे लेकर मालदीव में कोहराम मच गया था। नशीद की गिरफ्तारी आतंकवाद−विरोधी कानून के तहत की गई है। यह अजीब−सा है। नशीद और उनके प्रवक्ता ने भारत सरकार से अपील की थी कि वह हस्तक्षेप करे और उनकी गिरफ्तारी को रुकवाए। यदि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए तो उन्हें मालदीव में नहीं, बेंगलूरु में रखा जाए ताकि उनकी जान को खतरा न हो।

भारत सरकार नशीद की रक्षा क्या करेगी? वह तो इतनी डरपोक है कि नशीद का जो प्रतिनिधि−मंडल भारत आया था, उससे मिलने में भी उसके पसीने छूटे जा रहे थे। हमारे विदेश मंत्रालय में इतनी हिम्मत भी नहीं है कि वह उनकी बात तो सुन लेता। उसे डर है कि मालदीव की सरकार नाराज़ हो जाती! कहां भारत और कहां मालदीव? क्या हमारे प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को मैं बताऊं कि 1988 में क्या हुआ था? उस समय राजीव गांधी की सरकार थी। सिंगापुर स्थित कुछ उद्दंड लोगों ने तत्कालीन मालदीवी राष्ट्रपति मामून अब्दुल कय्यूम का लगभग तख्ता−पलट कर दिया था। मैं ‘पीटीआई भाषा’ का संपादक था। यह खबर जैसे ही मुझे पीटीआई के टेलीप्रिंटर पर मिली, मैंने रक्षा मंत्री कृष्णचंद्रजी पंत को फोन किया। वे उस समय चीन में थे। वे तुरंत लौटै। मैंने श्रीलंका स्थित अमेरिकी राजदूत डॉ. जेम्स स्पेन से बात की। वे न्यूयार्क में मेरे सहपाठी रह चुके थे। उन्होंने कहा कि आप जो उचित समझें करें, मेरी सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी। हमने फौज भेजी और गय्यूम को बचाया। वर्तमान राष्ट्रपति यामीन इन्हीं गय्यूम के भाई हैं। वे किस मुंह से भारत के ‘हस्तक्षेप’ की बात कर रहे हैं?

भारत को अपनी दब्बू विदेश नीति का तुरंत परित्याग करना चाहिए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जब नवंबर 2014 में मालदीव गईं तो वे विपक्ष के नेताओं से नहीं मिलीं। क्या उन्हें पता नहीं है कि नशीद के राष्ट्रपति काल में ही मालदीव से भारत के संबंध सबसे अधिक घनिष्ट हुए? नशीद ही एक भारतीय कंपनी से माले का नया हवाई अड्डा बनवा रहे थे। यामीन की सरकार ने वह समझौता रद्द कर दिया। वह ठेका चीन को दे दिया। चीन की काट करने के लिए मालदीव गईं विदेश मंत्री को भारतप्रेमी नेताओं से मिलने में डर लगा, यह आश्चर्यजनक है। दक्षिण एशिया की महाशक्ति बनने का सपना देखनेवाले भारत ने ऐसी दब्बू विदेश नीति पहले कभी नहीं चलाई। मुझे विश्वास है कि जयशंकर जैसा सुयोग्य विदेश सचिव कोई सशक्त पहल करेगा। मालदीव की राजनीति करवट ले रही है। सत्तारुढ़ गठबंधन से ‘जम्हूरी पार्टी’ हटकर नशीद से मिल गई है। जन−आंदोलन जोर पकड़ रहा है। ऐसे में भारत हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे तो बाद में वह बहुत पछताएगा।

Comment:

kolaybet giriş
kolaybet giriş
hellocasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti 2026
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Telegram
betpark giriş
betpark giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
matbet giriş
matbet giriş
matbet giriş
matbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
sahabet güncel giriş
sahabet güncel giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
vdcasino giriş
onwin giriş
onwin giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet 2026
Hititbet Giriş
Hititbet Güncel Giriş
hititbet
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
onwin giriş
onwin giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet