भारतीयता के प्रति समर्पित एबीवीपी

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डॉ. राकेश मिश्र 

विद्यार्थी परिषद् का मानना रहा है कि छात्रशक्ति ही राष्ट्रशक्ति होती है। विद्यार्थी परिषद् का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। छात्र कल का नहीं आज का नागरिक है एवं शैक्षिक परिवार की कल्‍पना विद्यार्थी परिषद का मूल चिंतन है। जिस पर आज भी चल रही है।

छात्र एवं राष्ट्रहित में समर्पित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ज्ञान, शील और एकता के नारे के साथ चलने वाला एक मात्र राष्‍ट्रवादी छात्र संगठन है। विद्यार्थी परिषद् न केवल भारतका बल्कि विश्व का सबसे बड़ा छात्र-संगठन है। इसकी स्थापना 9 जुलाई, 1949 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अगुआई में की गयी थी। आजादी के बाद एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण और अपनी संस्कृति को बचाए और बनाए रखने के लिए पूरे देश ने एक विकसित और समृद्ध  देश का सपना देखा था। इसमें विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं की समुचित भागीदारी के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना की गई। वैसे तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना 1948 में हुई थी। लेकिन, इसका औपचारिक पंजीयन 9 जुलाई 1949 को हुआ। प्रो. ओम प्रकाश बहल प्रथम राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने एवं स्व. आचार्य गिरिराज किशोर जी पहले पूर्णकालिक बने। प्रोफेसर यशवंतराव केलकर 1958 में इसके मुख्य कार्यवाहक बने। केलकर जी को इस संगठन एवं अनूठी कार्यपद्धति को खड़ा करने के पीछे का मुख्य आधार बताया जाता है। श्री मदन दास देवीजी ने संगठन मंत्री रहकर पूरे देश में संगठन खड़ा किया। इसके बाद प्रो. बाल आपटे इनके साथ जुड़े और परिषद् को और भी मजबूती मिली। 1974 में प्रो. बाल आपटे को परिषदका अध्यक्ष चुना गया तो इनके मार्गदर्शन में परिषद का प्रसार पूरे देश में हुआ। इसकालखंड को परिषद् का स्वर्णकाल भी कहा जाता है।               
विद्यार्थी परिषद् का मानना रहा है कि छात्रशक्ति ही राष्ट्रशक्ति होती है। विद्यार्थी परिषद् का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। छात्र कल का नहीं आज का नागरिक है एवं शैक्षिक परिवार की कल्‍पना विद्यार्थी परिषद का मूल चिंतन है। जिस पर आज भी चल रही है। स्थापना काल से ही इस संगठन ने छात्रहित और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और कई देशव्यापी आंदोलनों का नेतृत्व किया है। अपने 73 वर्षों के सफर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने छात्र-हित से लेकर भारत केव्यापक हित से सम्बद्ध समस्याओं की ओर निरंतर ध्यान दिलाया है। चाहे बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ का मामला हो, जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाने की बात हो, सभी में विद्यार्थी परिषद् समय-समय पर आन्दोलन चलाता रहा है। बांग्लादेश को तीन बीघा जमीन देने के विरुद्ध परिषद् ने ऐतिहासिक सत्याग्रह किया था। विद्यार्थी परिषद् शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ सदैव आवाज उठाती रही है। अलगाववाद, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, आतंकवाद और भ्रष्टाचार जैसी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ हम लगातार संघर्षरत रहे हैं।

वैसे निर्धन मेधावी छात्र, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिय़े निजी कोचिंग संस्थानों में नहीं जा सकते, उनके लिये स्वामी विवेकानंद निःशुल्क शिक्षा शिविर का आयोजन किया जाता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनुषांगिक शाखा है जो कि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के देश हित में काम करती है। कुछ लोग इस तरह का भ्रम फैलाते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की शाखा के रूप में परिषद काम करती है, लेकिन यह सत्य नहीं है, क्योंकि परिषद का जन्म जनसंघ से भी पहले और भारतीय जनता पार्टी से तो बहुत पहले हो चुका है। इसलिए विद्यार्थी परिषद एकमात्र संगठन है, जो राष्ट्रवाद की विचारधारा पर काम करता है। राष्ट्रवाद से लेकर कश्मीर मसले पर इनकी अपनी स्पष्ट विचारधारा है, जिससे ये पीछे हटने को तैयार नहीं होते। अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर चले अभियान में इसके छात्रों ने लोगों को आंदोलित करने में योगदान दिया।परिषद् ने हर मुद्दे पर जोरदार और असरदार तरीके से अपनी बात रखी और किसी भी विषय पर उन्होंने खामोशी नहीं ओढ़ी।              
राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार इसका मुख्य उद्देश्य रहा। जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने खुलकर हिस्सा लिया था। गुजरात और बिहार में इसके छात्रों के आंदोलन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आपातकाल के विरोध में इसके छात्रों ने जोरदार तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। उल्लेखनीय है कि आपातकाल (1975-77) के दौरान लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में अग्रणी था और इसके 10,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया था, उनमें से कई आगे चलकर प्रमुख राजनीतिक नेता, केन्द्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री बने। अखिल विद्यार्थी परिषद से जुड़े कई लोगों ने राष्ट्रीय राजनीति और देश को दिशा दी। उपराष्ट्रपति श्री एम्. वेंकैय्या नायडू, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्डा, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, धर्मेंद्र प्रधान, रविशंकर प्रसाद, गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, वी. मुरलीधरन ने जहां केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित करते हुए देश की सेवा की, वहीं जयराम ठाकुर, शिवराज सिंह चौहान, देवेन्‍द्र फणनवीस, पुष्‍कर सिंह धामी तथा सुशील कुमार मोदी ने अपने-अपने राज्यों में शीर्ष पद को संभाला। वर्तमान में देश के विविध क्षेत्रों में कार्य करने वाले कार्यकर्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से प्रेरणा लेकर विविध क्षेत्रों में निकलकर नेतृत्व कर रहे हैं।

वर्तमान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लगभग 30 लाख सदस्य हैं। परिषद् की कार्यप्रणाली भारत के अधिकांश अन्य छात्र संगठनों से अलग है। इसमें पूरे देश में जिला स्तर पर, विद्यालय एवं महाविद्यालयों में इकाइयां गठित होती हैं। यह संगठन अपना क्षैतिज विस्तार लगातार कर रहा है। इसने तकनीकी, चिकित्सा और प्रबंधन संस्थानों में विशेष मंचों की स्थापना का काम शुरू कर दिया। रिसर्च से जुड़े छात्रों के लिए इसका ‘शोध’ नामक मंच है,जबकि ‘थिंक इंडिया’ नामक एक अन्य फोरम के ज़रिए संगठन एनआईटी, आईआईटी और नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट के छात्रों से जुड़ा हुआ है। इसी तरह मेडिकल एवं डेंटल छात्रों के लिए ‘मेडिविजन’ और कृषि विश्वविद्यालों एवं संस्थानों के लिए ‘एग्रीविजन’नामक मंच बना रखे हैं। कला एवं संस्कृति के छात्रों के लिए इसने ‘राष्ट्रीय कला मंच’ बनाया है।             
छात्रों को सामाजिक कार्य से जोड़ने के लिए ‘स्टूडेंट्स फॉर सेवा’ कार्यक्रम संचालित कर रखा है, जिसके तहत छात्र समूहों को झुग्गियों औरअन्य पिछड़े इलाकों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। पूर्वोत्तर में पैठ जमाने और छात्रों को एकजुट करने में सहायक सबसे पुराने कार्यक्रमों में से एक है ‘स्‍टूडेंट्स एक्सपीरियेंस इन इंटर-स्टेट लिविंग (SEIL)’। इस कार्यक्रम की शुरुआत 1965-66 में की गई थी और इसमें पूर्वोत्तर के छात्रों की देश के दूसरे हिस्सों केराज्यों की यात्रा और साथ ही दूसरे राज्यों से पूर्वोत्तर की यात्रा को बढ़ावा दिया जाता है। इन यात्राओं के दौरान छात्रों को स्थानीय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं के यहां ही ठहराया जाता है, जहां उनसे मेहमान की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार किया जाता है। इस प्रमुख कार्यक्रम की संकल्पना में श्री पद्मनाभ आचार्य की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जो आगे चलकर नागालैंड के राज्यपाल (2014-19)भी बने।              
अंतर्राष्‍ट्रीय युवा वर्ष 1985 में विश्‍व छात्र युवा संगठन (WOSY) का गठन किया गया और विश्‍व के छात्रों को उचित मंच प्रदान करना इसका उद्देश्‍य है। विद्यार्थी परिषद की एक शाखा या कहें तो विश्व में विद्यार्थी परिषद का एक रूप नेपाल में भी देखा जा सकता हैं, जो प्राज्ञिक विद्यार्थी परिषद के नाम से संचालित है। 
           
कोरोना काल में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन किए जाने के बाद परिषद् ने स्वयं को नई भूमिका में लाते हुए राहत और पुनर्वास का कार्य किया और फिर छात्रों से निरंतर फीड बैक लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को उससे अवगत कराने का काम किया। परिषद् ने ‘पीएम केयर्स फंड’ के लिए 28.64 करोड़ रुपए एकत्रित किए, इसने लोगों के बीच 58लाख से अधिक मास्क, भोजन के 30 लाख पैकेट और 31.7 लाख राशन किट बांटने का काम किया। इसने 17,000 से अधिक छात्रों को उनके घर पहुंचाने में भी मददकी, जिनमें से बड़ी संख्या पूर्वोत्तर और जनजातीय इलाकों केछात्रों की थी। लॉकडाउन के दौरान परिषद् के लगभग 59 हजार कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर सक्रिय रहे और संगठन ने 100 दिनों से भी अधिक समय तक 477 किचन संचालित किए।             
अपने तरह की एक अनूठी पहल के तहत 11-12 मई को 56 हजार कार्यकर्ताओं ने देश के 8.86 लाख छात्रों को फोन कर शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर सरकार से अपेक्षाओं पर उनकी राय ली, मसलन ये मुद्दाकि परीक्षाएं वैयक्तिक उपस्थिति वाली हों या फिर ऑनलाइन। देशभक्ति की भावना परिषद् में कितनी है? यह परिषद के प्रतिवर्ष जारी होने वाले गीतों में भी झलकता है:  
आत्म गौरव भाव लेकर, 
देश आगे बढ़ चला है
आत्मगौरव भाव लेकर, देश आगे बढ़ चला है….!
पथ सदा हमने चुना वह, विश्व का जिसमें भला है…..!!
नित्य नूतन प्रेरणा ले, बढ़ रहे कोटि चरण हैं…।
नर ही नारायण हमारा, राष्ट्र को हम सब शरण है…।।
जब हुए हम अग्रसर तब, विश्व का संकट टला है..!
जीत को हमने है चूमा, खेल में और हर समर में।
फसल खुशियों की उगाई, खेत, नदियां और डगर में ।।
हाथकौशल से सजा है, पूजते हम हर कला है…!
दुष्टको हमने हराया, चाल से और ढाल से भी…।
मातृभूमिको बचाने, लड़ पड़े हम काल से भी..।।
हाथशक्ति से सुसज्जित, वीर सा साहस पला है…! 

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