वेद की पुनर्जन्म संबंधी मान्यता

images (70)

हमने पूर्व लेखों में कहां है सूक्ष्म शरीर, जिसका मन एक अभिन्न अंग है, आत्मा के असंख्य पूर्व जन्मों के अनुभवों एवं संस्कारों का संग्रहालय है। यही अनुभव और संस्कार ही आत्मा को विविध परिस्थितियों तथा योनियों में जन्म लेने का कारण होते हैं।

हमने महाभारत का उद्धरण देते हुए यह भी कहा कि पूर्व जन्म में जिनकी मृत्यु दु:खद घटनाओं से होती है वे कभी-कभी ‘ जाति स्मर ‘ उत्पन्न होते हैं अर्थात उनमें पूर्व जन्म की कुछ स्मृतियां उभर पड़ती है। पुनर्जन्म संबंध में अनुसंधान करने वाले डॉ. स्टीवेन्सन जैसे परामनोवैज्ञानिकों का भी यही मत है कि जिन अबोध बालकों को पूर्व जन्म की स्मृति होती है वे हत्या या किसी दुर्घटना के शिकार हुए होते हैं।

इसका अर्थ यहा हुआ कि मन को झकझोरने वाली कोई घटना मनुष्य को दबी हुई किसी पूर्व घटना की स्मृति दिला सकती है।इसे हमारे शास्त्रों में ‘ उद्बोधक ‘ (Prescipitating Cause) कहा गया है। पूर्व- दृष्ट ( Deja Vu) की स्मृति की घटनाएं इसी श्रेणी में आती हैं।

वस्तुतः रिग्रेशन प्रक्रिया ‘ उद्घोधक ‘ का ही काम करती है। प्रत्यावर्तन ध्यान प्रक्रिया व्यक्ति को स्माधि की स्थिति में ला देती है। सम्मोहन प्रणाली के द्वारा पुरानी प्रिय – अप्रिय स्मृतियों को जागृत किया जाता है । रिग्रैशन थैरेपी एक अद्भुत, अद्वितीय, प्रशंसनीय ध्यान प्रणाली है जिससे अप्रिय घटनाओं की प्रसुप्त स्मृति को जागृत कर के, उनसे संबंधित व्याधियों का उपचार किया जाता है।

इस संबंध में इंग्लैंड के परा मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डॉ. ऑर्थर गर्धम ( Psychiatrist Dr. Arthur Guirdham) का कथन विचारणीय है :” मानव के संज्ञान में कोई ऐसा रोग नहीं है जिसका सर्वथा कारण मनुष्य के वर्तमान जीवन से हो। ” यदि ऐसा है, तो डा. गेरार्ड एल्सटॉम ( Dr.Gerald Edelstein) का कथन अति रोचक है । उन्होंने पाया के उनके पूर्वाग्रहग्रस्त अवधारणा के बावजूद, उनके कुछ रोगी पूर्व जन्म समृति में पहुंच जाते थे जिसका आश्चर्यजनक परिणाम होता था।

उन्होंने स्वीकार किया : ” ऐसे अनुभवों को मैं तर्क पूर्वक सिद्ध नहीं कर सकता कि किस प्रकार इन्होंने रोगियों के जीवन में सुधार ला दिया ।”

जो. फिशर ने सत्य कहा है: “रिग्रेशन थैरेपी की चिकित्सकीय वैधता निस्संदेह सिद्ध हो चुकी है। पूर्व जन्म – चिकित्सा सिद्ध करती है कि मन और शरीर का घनिष्ठ संबंध है तथा शारीरिक व्याधि में एक मनोवैज्ञानिक तत्व होता है; इसी प्रकार मानसिक व्यथा में भी शारीरिक दुर्बलता कार्य करती है।”

कुछ लोग संदेह करते हैं कि सम्मोहन ग्रस्त व्यक्ति छल भी कर सकता है परंतु सुप्रसिद्ध हिप्नोथेरेपिस्ट इन संभावनाओं को निरस्त करते हैं । डॉ फ्लोर ( Dr. Fiore) का मत है : ” मैं आश्वस्त हूँ कि जानबूझकर छल करने की कोई संभावना नहीं है। आंसुओं का बहना, शरीर की कम्पन, मुस्कराहट, सांसों का उखड़ना, चिल्लाना, पसीने का बहना इत्यादि शारीरिक हाव-भाव सत्य ही होते हैं।”

अब हम विश्वविख्यात हिप्नोथेरेपिस्टस तथा मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों के, उनके रोगियों द्वारा पूर्व जन्म संबंधित अनुभव, तथा रिग्रेशन थैरेपी द्वारा उनके रोगों के उपचार के साक्ष्य देते हैं।

i) हिप्नोथेरेपिस्ट Dr.Edith Fiore का साक्ष्य

सम्मोहन प्रक्रिया का मुख्य रूप से 8 वर्ष तक प्रयोग करते हुए Dr.Edith Fiore अविश्वास से 99% पुनर्जन्म सिद्धान्त में विश्वास करने लगी। वे कहती हैं :

“यदि किसी की भयवृत्ति (phobia) भूतकाल की किसी घटना की स्मृति से तत्काल एवं सदा के लिए समाप्त हो जाती है, तो यह तर्कसंगत लगता है कि वह घटना घटी हो।

Dr.Edith Fiore अपनी पुस्तक ‘ यू हैव बीन हेयर ‘ (आप यहीं रहे हैं ) में कहती हैं : ” कोई भी व्यक्ति बिना कारण के किसी चीज़ का शिकार नहीं होता।” उनके रोगियों ने अपना दुःख अपने कृत्यों से ही पाया है। कार्य- कारण के सम्बन्ध का उदाहरण देते हुए, जो कि हिन्दु और बौद्ध कर्म सिद्धान्त को प्रतिबिंबित करता है, वे नाटकीय घटना का उल्लेख करती हैं —
एक 30-35 वर्षीय महिला ने 12 कैंसर ऑप्रेशनों के बाद हताश होकर , उनसे रिग्रेशन थैरेपी के लिए संपर्क किया। सम्मोहन प्रक्रिया के दौरान उसने अपने आप को एक प्राचीन धार्मिक सम्प्रदाय की पुरोहितायन (Priestess) पाया जो मानव बलि देते थे। इस में उसका कार्य/ दायित्व बलि दिए हुए व्यक्ति के रक्त को पीना था, जिसे वह घृणा करती थी। परन्तु विकल्प यही था कि या रक्त पिए या अपनी बलि दे, इसलिए मन मार कर कार्य सम्पन्न करती थी। रिग्रेशन प्रक्रिया के उपरान्त पूर्व निर्धारित ऑप्रेशन से पहले टेस्ट कराया गया । टेस्ट से ज्ञात हुआ कि कैंसर के जीवित सेल उसके शरीर में अब नहीं है और ऑप्रेशन निरस्त कर दिया गया।

एसोसिएशन फॉर पास्ट लाइफ रिसर्च एंड थैरेपी की द्वितीय वार्षिक कांफ्रेंस में लॉस एंजेलिस में अक्टूबर 1982 में Dr. Fiore ने कहा ” अन्य चिकित्सा पद्धतियां लक्षणों को देखती हैं परंतु कारण से अछूती रहती है। पुनर्जन्म थैरेपी कारण पर प्रहार करती है। एक भी शारीरिक समस्या नहीं है जिसका निदान पूर्व जन्म चिकित्सा से न किया जा सके। ” यह वक्तव्य उनके चिकित्सात्मक अनुभव के परिणाम पर आधारित है जो सिद्ध करता हैं कि सभी व्याधियां पूर्व जन्म से संबंधित पाई जाती हैं। उन्होंने पाया कि जो लोग अधिक मोटे होते हैं, या तो पूर्व जन्म में उनकी मृत्यु भूख से हुई होती है या अत्यंत भूख से पीड़ित रहे होते हैं। अकारण भयवृत्ति जैसे कि सांपों से, आग से, अकेले रहने से , अंधेरे में , अधिक लोगों में होने का भय , प्राकृतिक आपदाओं भूकंप , चक्रवात आदि से भय , पूर्व जन्म की भयावह अनुभवों से परिचित होने से वे भय दूर हो जाते हैं।

उदाहरणार्थ, एक बालक की समस्या थी कि वह केवल एकान्त तथा निशब्द स्थान पर ही सो पाता था । उसकी समस्या का समाधान यह मिला कि द्वितीय महायुद्ध के दौरान प्रशान्त महासागर के किसी द्वीप के तट पर सोते हुए किसी जपानी सैनिक ने संगीन मार कर उसकी हत्या की थी।

ii) आंग्ल हिप्नोथेरेपिस्ट डा.ऐलैग्ज़ैन्डर कैनन का साक्ष्य

आंग्ल डा.ऐलैग्ज़ैन्डर कैनन ( Alexander Canon) ने , जिन्हें यूरोप की नौ विश्वविद्यालय ने डिग्रियां दीं, 1950 में , 1382 व्यक्तियों के रिग्रैशन द्वारा अनुभूत पूर्वजन्म के साक्ष्यों को अनिच्छापूर्वक स्वीकार किया जिनमें उन्होंने ईसा से सहस्रों वर्ष पूर्व विविध समयों पर जीवन जीने की बात कही। वे ‘ द पावर विदिन ‘( The Power Within) में लिखते हैं :

” पुनर्जन्म सिद्धान्त वर्षों तक मेरे लिए एक भयावह स्वप्न था और मैंने इसे ग़लत सिद्ध करने के लिए भरसक यत्न दकिया; यहां तक कि सम्मोहन में अपने रोगियों से बहस की कि तुम बकवास कर रहे हो। परन्तु वर्षो तक एक के बाद ने, भिन्न-भिन्न मत रखते हुए व्यक्तियों ने, एक ही बात दोहराई। अब एक हज़ार से भी अधिक लोगों पर अनुसंधान करने पर, मुझे यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि कोई ऐसी वस्तु है जिसे पुनर्जन्म कहते हैं।”

डॉक्टर कैनन ने पूर्व जन्म की भयावह घटनाओं के फल स्वरुप उत्पन्न हुए विविध प्रकार के भय पर विशेष अनुसंधान किया है। यह मानते हुए के सिगमंड फ्रायड की साइकोएनालिसिस की प्रक्रिया को
सिद्धान्त ने पीछे छोड़ दिया है, वे कहते हैं ” अधिकतर लोग साइकोएनालिसिस से इसलिए लाभ नहीं उठा पाते क्योंकि त्रास का कारण इस जीवन में नहीं अपितु पूर्व जन्म में होता है।”

iii) आंग्ल मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डा.आर्थर गर्धम का साक्ष्य

आंग्ल मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डा.आर्थर गर्धम ( Psychiatrist Dr.Arthur Guirdham) भी इसी प्रकार के स्वतन्त्र निष्कर्ष पर पहुंचे हैं जिसे उन्होंने ” शुद्ध बौद्धिक प्रक्रिया ” कहा है।

वर्षों तक अस्पष्ट सुझावों, चिकित्सकीय लक्षणों, परामनोवैज्ञानिक अभिव्यक्तियों, स्वत: लेखन, पुनरावृत स्वप्नों की भरमार को सत्यापित तथा परस्पर मिलान की प्रक्रिया में, गर्धम को विश्वास हो गया कि वे स्वयं लोगों के एक गिरोह के सदस्य हैं जिन्होंने पांच विविध समय अवधियों में इकट्ठे जन्म लिया है। चालीस वर्ष की चिकित्सकीय सेवा, और चौदह पुस्तकों के लेखन तथा 88 वर्ष की आयु में, डा. गर्धम का कहते हैं कि वे बचपन से ही अविश्वासी रहे हैं वे “शकी थॉमस ” ( Doubting Thomas) प्रसिद्ध थे।
परन्तु वे पुरज़ोर घोषणा करते हैं : ” यदि मैं अपने समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों को देख कर, पुनर्जन्म में विश्वास न करूं तो मेरा मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।”

iv) डा.मोरिस नदॅरटन का साक्ष्य

रिग्रेशन थेरेपी के लाॅस ऐंजिलिस में अग्रणी प्रतिपादक डॉ. मोरिस नदॅरटन ( Morris Netherton) का कथन है: ” बहुत से लोग पुनर्जन्म में विश्वास अपने अनुभव के आधार पर करते हैं ; दूसरे इस में प्रतीकात्मक तथा लाक्षणिक रूप में विश्वास करते हैं परन्तु इसका तर्कपूर्ण उत्तर क्या है ? यह वास्तविक रूप में घटित होता है।”

उनका विश्वास हैं कि मन में जो कुछ आता है, वह मन में पूर्व में घटित हुआ होता है। उनकी कल्पना ( Imagination) की परिभाषा है — आपके सभी पूर्व जन्मों में जो कुछ घटित हुआ है उसका संग्रह। यह उद्दात दृष्टि उनके आठ हज़ार रोगियों के साक्ष्यों पर आधारित है।

नदॅरटन का पालन पोषण कट्टर सदर्न मैथोडिस्ट के रूप में हुआ। उनका पुनर्जन्म है विश्वास 17 वर्ष पहले जागृत हुआ जब वे बेरोज़गारी , पुराने रक्तस्राव अल्सर, मानसिक अशांति के कारण हताश होकर उन्होंने रिग्रैशन थेरेपी का सहारा लिया। वे लिखते हैं कि “तीसरे सत्र में मैंने कष्ट अनुभव किया और कुछ क्षण में मैं किसी दूसरे स्थान पर पहुंच गया। ” यकायक, स्वत: नदॅरटन ने अपने आप को मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों के किसी मैक्सिकन संस्था में पाया । वर्ष 1818 था। एक गार्ड ने लात मारी उसी स्थान पर जहां पर कि अल्सर था।

इस घटना का सत्य कुछ भी हो, नदॅरटन को कष्ट से अद्भुत निजात मिला और उसे फिर कष्ट का अनुभव नहीं हुआ। परन्तु उनका पुनर्जन्म में विश्वास तत्काल नहीं हुआ। यह परिवर्तन धीरे से, उनके स्वयं थैरेपिस्ट के रूप में 1200 रोगियों के पूर्वजन्म के परीक्षणों के बाद हुआ। तदुपरान्त उन्होंने ‘ पास्ट लाइफ थैरेपी’ ( Past-life Therapy ) लिखी जो सुप्रसिद्ध हुई ।

नदॅरटन ने अपने रोगियों के साक्ष्यों से यह निष्कर्ष निकाला कि हर व्यक्ति संसार में विकास के उसी स्तर पर लौटता है जो उसने पूर्वजन्म में मृत्यु के समय तक प्राप्त किया होता है। आप वापस आते हैं, जैसे आप जाते हैं। यह एक निरन्तर यात्रा है।

डा. हैलन वम्बक का साक्ष्य

डॉ. हैलन वम्बक ( Helen Wambach) ने इस विषय पर अनुसंधान किया कि क्या पूर्व जन्म सत्य है या कल्पना ? उनके अनुसंधान के लोग वर्तमान लिंग की अपेक्षा के बिना, थेरेपी के दौरान 50.6 पुरुष एवं 49.4 स्त्रियां पाए गए जो 2000 BC की समय अवधियों में रहे। उनके अनुसंधान के व्यक्ति श्वेत तथा मध्यवर्ग के अमेरिकी थे जो पूर्व जन्मों में विभिन्न जातियों के तथा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में पाए गए जिनकी वेशभूषा, खानपान , साधन सामग्री तत्कालीन प्रयोग की थीं।

अपने अनुसंधान के लोगों के अनुभवों के आधार पर पुनर्जन्म के प्रति उन्होंने निम्न घरेलू उदाहरण देकर अपना विचार अभिव्यक्त किया :

” मैं पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करती , इसे जानती हूं।” यदि उनसे पूछा जाए कि ऐसा क्यों ? वे उत्तर देंगी ” यदि आप सड़क के किनारे किसी टेंट में बैठे हैं और 1000 व्यक्ति जो वहां से गुजरते हैं कहते हैं कि उन्होंने पेन्सिलवेनिया में एक सेतु को पार किया तो आप आश्वस्त हो जाएंगे कि पेंसिलवेनिया में एक सेतू है।”

निष्कर्ष

यह सत्य है कि पुर्नजन्म के संबंध में पूर्वजन्म थैरेपिस्टस के पास वे तथ्य उपलब्ध नहीं हैं जो शिशुओं के पूर्व जन्म स्मृति विषय में अनुसंधान कर्ताओं के पास होते हैं। कई विद्वान ऐसी घटनाओं को अन्य आत्मा ग्रस्त, कल्पना आदि कहकर टाल देते हैं। परन्तु जो. फिशर के निम्न शब्द बहुत सटीक हैं : ” पुनर्जन्म का विमर्श एक स्पष्ट व्याख्या है जो पानी से भरे पात्र में एक सेब की तरह ऊपर उभर करके आ जाता है।”

हमारे मत में रिग्रेशन स्मृतियां जो समाधि अवस्था में अनुभव की जाती हैं ,चाहे वह समाधि सम्मोहन से ही प्राप्त की गई हो, योग का ही रूपांतर है। इसलिए वह वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक तौर पर प्रमाणित हैकुछ रोगों का रिग्रेशन थेरेपी के द्वारा उपचार हो जाना, जो सहस्रों रोगियों द्वारा व्यक्तिगत अनुभूति से प्रामाणित है ,उसे छल समझ कर दरकिनार नहीं किया जा सकता।
…………….
The English version of this post is available on our Page:
The Vedic Trinity
The Doctrine of Reincarnation of Soul
78) Proofs of Reincarnation ( Continued)
xiii) Regression Therapy : Proof of Past – Life Experiences
……………….
दिव्य वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार हेतु,
कृपया इस पोस्ट को शेयर करें।
………………
शुभ कामनाएँ
विद्यासागर वर्मा
पूर्व राजदूत
……………

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
hitbet
interbahis giriş
hitbet giriş
betgaranti giriş
jojobet
betgaranti giriş
jojobet
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
xslot giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
xslot giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
betwild giriş
betwild giriş
vdcasino giriş
kolaybet
vdcasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
betwild giriş
xslot giriş