अयोध्या, मथुरा, काशी को पुनप्र्रतिष्ठित करें

अयोध्या, मथुरा, काशी(भारत के केन्द्रीय शासन के संचालन हेतु साठ माह के लिए निर्वाचित नरेन्द्र मोदी सरकार के समक्ष प्रस्तुत साठ तथ्यात्मक प्रस्तावों की विचार पेटिका हमारी ओर से पूर्व में प्रकाशित की गयी थी, उसी क्रम में विद्वान लेखक के द्वारा लिखित विचार पेटिका के अग्रिम अंश को हम यहां सुबुद्घ पाठकों और देश के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए यथावत प्रस्तुत कर रहे हैं-सहसंपादक)

शिक्षा का गिरता स्तर सुधारें-विश्व के दो सौ शीर्ष विश्व विद्यालयों में भारत का एक भी विश्व विद्यालय नामित नही है। शिक्षा के इस गिरते स्तर का कारण खोजने के लिए किसी अनुसंधान की आवश्यकता नही है। विवि तथा डिग्री कॉलेजों में जो  प्राध्यापक 80,000 रूपये से ऊपर मासिक वेतन पाते हैं, उनमें बड़ी संख्या में ऐसे बुद्घिजीवी पाये जाते हैं जो एक भी क्लास कक्षा को दिनभर में नही पढ़ाते और छात्रों को अपने घर आकर ट्यूशन पढऩे के लिए विवश करे हैं जबकि ट्यूशन के लिए विवश करना कानूनन अपराध है। ऐसा ही उन सरकारी प्राथमिक व जूनियर हाई स्कूलों की स्थिति है जहां अध्यापक को 15000 रूपये से अधिक मासिक वेतन मिलता है परंतु वे कक्षा में जाकर छात्रों को नही पढ़ाते। ऐसे अनगिनत प्रसंग देखने में आए हैं जब कक्षा 1 से 5 तक छात्रों को क, ख,ग लिखना या गिनती व पहाड़े भी नही सिखाए गये। शिक्षा के नाम पर की जा रही राजकीय कोष की यह व्यापक लूट रोककर शिक्षकों को परिणामदायक शिक्षा देने के लिए जब तक बाध्य नही किया जाएगा, तब तक शिक्षा क्षेत्र में भारत को कोई स्तर प्राप्त नही हो सकता। इस दिशा में केन्द्र सरकार पहल करेगी तभी कुछ संभव होगा।

अयोध्या, मथुरा, काशी को पुनप्र्रतिष्ठित करें :-अयोध्या में राम मंदिर, मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान, तथा काशी में विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निमाण कराये जाने के अनेक प्रयत्न किये गये परंतु राजनीतिक व साम्प्रदायिक गतिरोध बाधक बनता रहा। यदि भारत की स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद दो वर्ष के अंतराल में ही देश के गृहमंत्री सरदार पटेल सोमनाथ मंदिर गुजरात का पुनर्निमाण कराने में सफल रहे तो वर्तमान प्रधानमंत्री भी ऐसे यशस्वी कार्य संपन्न करने में अवश्य सफल हो सकते हैं।

गंगा-यमुना शुद्घि अभियान को वास्तविकता प्रदान करें :-बहुत बार घोषणाएं की गयीं कि देश की सभी नदियों को निर्मल व सदा प्रावाहिनी बनाया जाएगा। विशेषकर गंगा शुद्घि के लिए 1985 से हजारों करोड़ रूपया केन्द्र सरकार ने अर्पित किया। परंतु अब उसका जल वैज्ञानिक दृष्टि से पीने और स्नान दोनों के लिए घातक बन चुका है। वर्तमान सरकार ने इसके लिए अलग मंत्रालय भी बनाया, विपुल धनराशि भी प्रदान की गयी। फिर भी सर्वोच्च न्यायालय को कहना पड़ा कि इस प्रकार चल रहे प्रयत्नों से तो गंगा की सफाई 200 वर्ष में भी पूर्ण नही हो पाएगी। अत: केन्द्र सरकार अपनी कार्य योजना पर गंभीरता से पुनर्विचार करे।

पशुधन विनाश को रोकें:-देश में करोड़ों पशु प्रतिवर्ष काटे जा रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं व वीभत्स मानवीय संहार के पीछे पशुधन विनाश तथा पेड़ पौधों व प्राकृतिक संपदा का विनाश एक प्रमुख कारण है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस संदर्भ में स्पष्ट दिशा निर्देश (अक्टूबर 2014) में दिये हैं। अत: आवश्यकता है कि केन्द्र सरकार प्रभावी कानून बनाकर दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए देश के बूचढ़ खाने बंद कराये तथा विदेशों को मांस निर्यात एवं गायों तथा अन्य लाखों पशुओं की तस्करी किये जाने के जघन्य कुकृत्यों को तत्काल प्रतिबंधित करे।

यूपीएससी परीक्षा में हिंदी को प्रतिष्ठित करें :-

विगत सरकारों द्वारा आईएएस आदि की प्रारंभिक परीक्षा में अंग्रेजी को अनिवार्य बनाकर हिंदी भाषियों को तिरस्कृत किया गया। विगत कुछ वर्षों में चयनित युवकों में हिंदू भाषियों की संख्या नगण्य रह गयी। आंदोलन हुआ तो वर्तमान सरकारी व्यवस्था में भी युवकों को लाठी चार्ज तथा अन्य प्रहारों से प्रताडि़त किया गया। मोदी सरकार से ऐसी अपेक्षा स्वप्न में भी किसी ने नही की थी। अभी भी समय है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं हेतु केन्द्र सरकार ऐसे प्रावधान निर्मित करे जिससे हिंदी व भारत की अन्य प्रादेशिक भाषाओं के प्रत्याशी युवक भी सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।

अन्न के विनाश को रोकने के लिए लाल फीताशाही पर नियंत्रण करें :-

भारत में लाखों, करोड़ों टन अनाज (गेंहूं धान आदि) खुले में पड़ा रहकर सर्दी, वर्षा, बाढ़ आदि के कारण नष्ट हो जाता है जबकि करोड़ों लोग भूख व कुपोषण के शिकार हो जाते हैं जिन्हें खाने को समय पर अन्न नही मिल पाता।

यह सरकारी लालफीताशाही का वीभत्स व निकृष्टतम उदाहरण है। आंकड़ों के अनुसार भारत में 5000 बच्चे कुपोषण के कारण प्रतिदिन मर जाते हैं। कृपया अन्न की रक्षा करके भूखों को मरने से बचायें।

गरीबी उन्मूलन को राष्ट्र का सर्वोपरि अभियान बनायें-आज तक गरीबी की रेखा के निर्धारण पर विवाद चलता आ रहा है। बीस रूपये प्रतिदिन या 28 रूपये प्रतिदिन आदि।

क्रमश:

Comment:

Latest Posts

betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
betwild giriş
betwild giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
grandpashabet
betwild giriş
kolaybet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpas giriş
betpas giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
matbet giriş
matbet giriş
hititbet
holiganbet giriş
holiganbet 7712
sahabet
bettilt giriş
bettilt giriş
betwild
grandpashabet
betpark giriş
pusulabet giriş
jojobet giriş
meritbet giriş
betwild
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
casinoroyal giriş
restbet giriş
restbet giriş
casinoroyal giriş