इन्होंने एक विधवा का जीना दुःश्वार कर दिया है

h 002राजीव कुमार

शासन-प्रशासन ने एक विधवा का जीना दु:श्वार कर दिया है। उर्मिला जायसवाल मौजा खैरूद्दीनगंज (शिवाजी नगर), मकान नं0-15, थाना व कस्बाः मडि़याहूं की रहने वाली एक गरीब विधवा महिला हैं। उर्मिला जायसवाल के पति स्व0 राम दुलार गुप्ता नगर पंचायत मडि़याहूं में ट्युबेल ऑपरेटर के पद पर रहते हुये 23/03/2014 को मृत्यु को प्राप्त हुये। प्रार्थिनी के पति राम दुलार की मृत्यु के बाद उर्मिला जायसवाल को अपनी आजीविका चलाने में बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उर्मिला जायसवाल  अपने पति जो मडि़याहूं नगर पंचायत के अधीन ट्युबेल आपरेटर के पद पर कार्यरत थे, के आकस्मिक मृत्यु से अत्यंत दुःखी हैं व वर्तमान में उसे आजीविका का कोई रास्ता नही है। एतएव यदि उर्मिला जायसवाल को उसके पति के स्थान पर नौकरी दे दी जाती है तो उसे अपनी और अपने पुत्र की आजीविका की समस्या का हल निकल जायेगा।

प्रार्थिनी उर्मिला जायसवाल का एक सौतेला बेटा राकेश कुमार जायसवाल उर्फ ननकू है जो एक खूंखार अपराधी किस्म का नशे का आदी बिगड़ैल किस्म का इंसान है। वह हमेंशा प्रार्थिनी को मानसिक रूप से प्रताडि़त करता रहता है राकेश उर्फ ननकू  प्रार्थिनी को अक्सर गंदे व घिनौने गालियां देकर अपमानित करता रहता है इतना ही नही कई बार वह प्रार्थिनी को जान से मारने की धमकियां दे चुका है।

राकेश कुमार जायसवाल उर्फ ननकू सड़क पर की दुकान अपने पिता से पहले ही ले चुका है जिसकी कुल कीमत 17 लाख थी यहां तक की उस राकेश ने बाप-दादा की पुश्तैनी जमीन पहले ही हथिया चुका है अब वह प्रार्थिनी के मकान व अपने पिता के मृत्यु के बाद उनकी नौकरी को हड़पना चाहता है, जिसके लिये वह अनेकों षडयंत्र कर रहा है, उसने कई अधिकारियों को पैसा खिलाकर अपने तरफ कर लिया है पुलिस में शिकायत करने के बाद भी पुलिस कोई कार्यवाही नही कर रही है। 20/11/2014 को राकेश उर्फ ननकू उर्मिला जायसवाल को मारने के लिये घर का दरवाजा तोड़ रहा था  जिसकी उन्होने 21/11/2014  को जौनपुर पुलिस अधीक्षक को शिकायत भी की, 28/11/2014 को तहसील में सी0 ओ0 ने उन्हें बुलाया की उनसे पूछताछ की जायेगी मगर वे सादे कागज पर विधवा को डरा धमकाकर हस्ताक्षर करवा लिये जो यह साबित करता है कि शासन-प्रशासन रिश्वत के दबाव में ननकू से मिला हुआ है। प्रार्थिनी ने कई बार पुलिस प्रशासन से शिकायतें की मगर मडि़याहूं के रिश्वतखोर पुलिस के आगे प्रार्थिनी बेबश और लाचार हो जाती है।

अपने पति राम दुलार गुप्त की मृत्यु के बाद से प्रार्थिनी उर्मिला दर-दर की ठोकरें खा रही है लेकिन बड़े दुःख की बात है कि उसके पति के विभाग में  काम करने वाले कुछ अधिकारी प्रार्थिनी के बेबसी और लाचारी का भरपूर लाभ उठाना चाहते हैं वे प्रार्थिनी के इस दुःखद घड़ी में उसके उसके मृतक पति के नौकरी के बदले में लाखों रूपये ऐंठ लेना चाहते हैं। ऐसे ही यहां एक नाम का खुलासा किया जा रहा है जिसे सुनकर आप चैंक जायेंगे।

नगर पंचायत मडि़याहूं, जौनपुर, उप्र में बड़े बाबू राधेश्याम श्रीवास्तव हेड क्लर्क के रूप में कार्यरत है। वह काफी समय से प्रार्थिनी के सौतेले बेटे राकेश उर्फ ननकू से मिला है और वह उसी के प्रभाव में काम कर रहा है। यह राधेश्याम श्रीवास्तव स्व0 राम दुलार की पत्नी उर्मिला जायसवाल के नौकरी पाने, फण्ड, पेंशन आदि में हर तरह से तमाम तरह के रोड़े अटका रहा है।

उर्मिला जायसवाल के पति राम दुलार गुप्ता जब नगर पंचायत मडि़याहूं, जौनपुर के अधीन अपने पद पर कार्यरत थे तो एक दिन अचानक बहुत दुःखी होकर उन्होने अपनइ पत्नी उर्मिला जायवाल से कहा था कि बड़े बाबू राधेश्याम श्रीवास्तव (हेड क्लर्क)  फण्ड, बीमा, पेंशन आदि का कागजी कार्यवाही करने के लिये कुल 25000/ की राशि रिश्वत के तौर पर मांग रहा है। उर्मिला के मुताबिक यह मांमला करीब डेढ़-दो साल पूर्व का है।

इतना ही नही प्रार्थिनी अपने पति के मृत्यु के बाद बड़े बाबू राधेश्याम श्रीवास्तव (हेड क्लर्क) से मिली तो उन्होने कहा कि तुम्हारे पति स्व0 रामदुलार ने मुझसे पचीस-पचीस हजार रूपये व कुल एक लाख रूपये चार किश्तों में लिये थे अगर तुम हमें चारों किश्त यानी एक लाख रूपये वापस कर दोगी तो हम तुम्हारा सारा काम: नौकरी, फण्ड, पेंशन आदि अविलंब कर दूंगा लेकिन उर्मिला जायसवाल के मुताबिक उनके पति कभी किसी से उधार लिये ही नही थे यदि लिये होते तो वे हमें अवश्य बताते।

विधवा उर्मिला जायसवाल के स्व0 पति रामदुलार गुप्त ने ट्युबेल ऑपरेटर पद रहते हुये सर्विस बुक में नामिनी के रूप में नाम दर्ज करने के लिये  टाइप राइटर से टाइप करवाकर अपनी बेटी सरिता व पत्नी उर्मिला जायसवाल का नाम हेड क्लर्क राधेश्याम श्रीवास्तव को दिया था मगर उस हेड क्लर्क ने गंदी नियत से गड़बड़ घोटाले करने के लिये उपरोक्त नाम सर्विस बुक में उस दौरान दर्ज नही किये।

उर्मिला जायसवाल का आरोप है कि उपरोक्त विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा जानबूझकर यह दबाव बनाया जा रहा है कि  उर्मिला जायसवाल अपने स्व0 पति की नौकरी न करें वो उस नौकरी को अपने सौतेले बेटे को सुपुर्द कर दें।

उर्मिला के मुताबिक उसके स्व0 पति रामदुलार का उनके नगर पंचायत विभाग द्वारा करीब 4 लाख का बीमा कराया गया था लेकिन उसका कोई बॉण्ड नही दिया गया ।

बड़े बाबू राधेश्याम श्रीवास्तव (हेड क्लर्क) ने विधवा उर्मिला को अपमानित करने में कोई कोर-कसर नही छोड़ी है। कई बार उसने प्रार्थिनी को अपशब्द बोले, गंदी-गंदी गालियां दी। यह राधेश्याम विधवा के पारिवारिक मामले जमीन-जायदाद में भी शुरू से ही हस्तक्षेप करता था, यह हेड क्लर्क श्रीवास्तव उर्मिला के सौतेले बेटे राकेश कुमार जायसवाल उर्फ ननकू से पैसे के लालच में मिला है। इसने कई बार प्रार्थिनी को रंडी-वैश्या, बदमाश जैसे गंदे शब्दों से प्रार्थिनी को अपमानित किया है लेकिन प्रार्थिनी उसके गंदे-घिनौने गालियों को चुपचाप सहती रही लेकिन इस भ्रष्ट राधेश्याम के अत्याचारों को सहते-सहते प्रार्थिनी के सब्र का बांध टूट गया है इतना ही नही यह हेड क्लर्क प्रार्थिनी के सौतेले बेटे राकेश उर्फ ननकू से जा मिला है, यह उसके साथ मिलकर प्रार्थिनी उर्मिला की हत्या तक करवा सकता है।

यह बड़े बाबू राधेश्याम श्रीवास्तव, उर्मिला का सौतेला पुत्र ननकू व अन्य लोगों के साथ मिलकर प्रार्थिनी के बारे में यह अफवाह मचा रहे हैं कि प्रार्थिनी उर्मिला जायसवाल स्व0 रामदुलार गुप्ता की पत्नी नही थी मगर विधवा उर्मिला के पास ऐसे ढेर सारे प्रमाण हैं जिससे यह प्रमाणित होता है कि प्रार्थिनी उर्मिला स्व0 रामदुलार की पत्नी है मगर नगर पंचायत मडि़याहूं, जौनपुर, उप्र में कार्यरत राधेश्याम श्रीवास्तव (हेड क्लर्क) जैसे भ्रष्ट अधिकारी जानबूझकर एक गरीब, लाचार और वेबस विधवा को परेशान कर रखा है वे जानबूझकर ऐसे-ऐसे प्रमाण मांग रहे है जिससे प्रार्थिनी उसीमें उलझकर अपना जीवन गंवा दे।

     प्रार्थिनी उर्मिला जायसवाल का स्व0 रामदुलार गुप्त की पत्नी होने का प्रथम प्रमाण एलआई बीमा है जो उसके पति ने कराया था जिसमें उर्मिला देवी उनकी पत्नी नामिनी के रूप में थी यह बीमा पालिसी संख्या: 2880 34610 है। (बीमा पालिसी की रसीद की छाया प्रति संलग्न)।

     दूसरा प्रमाण राशन कार्ड है जिसमें प्रार्थिनी उर्मिला जायसवाल मुखिया स्व0 रामदुलार गुप्त की पत्नी के रूप में है। (राशन कार्ड की छाया प्रति संलग्न)।

     तीसरा प्रमाण भारत निर्वाचन आयोग का पहचान पत्र है जिसमें प्रार्थिनी उर्मिला के पति स्व0 रामदुलार हैं। (पहचान पत्र की छाया प्रति संलग्न)।

     चैथा प्रमाण गोमती ग्रॉमीण बैंक का खाता जिसमें प्रार्थिनी उर्मिला के पति रामदुलार हैं। (बैंक पास-बुक की छाया प्रति संलग्न)।

     पांचवा प्रमाण स्व0 रामदुलार गुप्त के साथ प्रार्थिनी उर्मिला द्वारा पूजा-अर्चना के समय की तस्वीर (फोटो संलग्न) जिसमें प्रार्थिनी की बेटी सरिता भी मौजूद है।

      छठां सबसे बड़ा प्रमाण मरने से पूर्व रामदुलार गुप्त का वसीयतनामा (वसीयतनामा की छाया प्रति संलग्न) जिसमें उन्होने मैं सोच-समझकर पूरे होश-हवाश में लिखा है कि उनकी दूसरी पत्नी उर्मिला जायसवाल उनके मरने के बाद मालिक होंगी इस वसीयतनामा में स्व0 रामदुलार ने अपना घर, पेंशन, फण्ड, बैंकों में जमा धन राशि की मालिक उर्मिला जायसवाल को बनाया है। इस वसीयतनामा में आगे लिखा है कि रामदुलार की पहली पत्नी शकुंतला देवी के लड़कों से हमारी संपत्ति से कोई सरोकार नही रहेगा, यह वसीयतनामा 29/03/2010 को लिखी गई थी।

इतने सारे प्रमाण देने के बावजूद क्या अब भी उर्मिला जायसवाल को अपने स्व0 पति के स्थान पर नौकरी पाने के लिये और भी प्रमाण देने की आवश्यकता है। इन भ्रष्ट व रिश्वतखोर अधिकारियों के गठजोड़ देखिये कि जब नगर पंचायत मडि़याहूं कार्यालय ने स्व0 रामदुलार की पत्नी होने के लिये प्रार्थिनी उर्मिला से निकट संबंधी प्रमाण पत्र मांगा तो मडि़याहूं के कानून गो ने 500 रूपये का सुविधा शुल्क लेने के बावजूद निकट संबंधी प्रमाण पत्र नही बना के दिया बल्कि प्रार्थिनी के सौतेले पुत्र राकेश जायसवाल उर्फ ननकू की पैरवी किया जब दिल्ली के कुछ पत्रकार उस भ्रष्ट कानून गो से प्रश्न पर प्रश्न किये तब जाकर विधवा का निकट संबंधी प्रमाण पत्र बना।

विधवा  उर्मिला जायसवाल को उनके स्व0 पति रामदुलार गुप्त के स्थान पर उन्हें तुरंत नौकरी क्यों नही दिया जा रहा है इस दौरान वो अपनी आजीविका के लिये क्या करे ? शासन-प्रशासन को उनके साथ हो रहे अन्याय को रोकना चाहिये जिससे वे समाज में सही तरह से गुजर-बसर कर सकें।

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