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आसक्त सनातनी समाज राष्ट्र हेतु दीमक के समान -दिव्य अग्रवाल

लंबी अधीनता के पश्चात हिन्दू समाज के कुछ संभ्रांत , शिक्षित एवम आनंदमय जीवन व्यतीत करने वाले लोगो को पीढ़ियों से गुलामी का लकवा लगा हुआ है। जिसका ऐसे लोग उपचार नही अपितु अपने वंश को भी इसी रोग से ग्रसित कर रहे हैं। इन लोगो को पिछले कुछ समय से लग रहा है कि देश मे हिन्दू मुस्लिम बहूत ज्यादा हो रही है , देश के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है , मन्दिर मस्जिद के विषयों को पुनर्जीवित कर राजनीति की जा रही है। परन्तु इनको यह कभी नही लगा कि इनके पूर्वजो को कायरता व लालच का लकवा लगा हुआ था । जिसके कारण मजहबी कटरपंथी जब सनातनियो की भूमि पर रहकर सनातन संस्कृति को खंडित व मानवता का दोहन कर रहे थे । तब वे सब मौन थे आज भी ऐसे लोग अपनी व अपने पूर्वजों की कायरता को साक्षात्कार करते हुए कट्टरवादी आक्रांताओं व उनकी दमनकारी, अमानवीय सोच के विरुद्ध अपनी आवाज अब भी बुलंद नही कर पा रहे हैं । यह वही लोग है जिन्हें हिन्दू समाज के साथ मजहबी कट्टरपंथियो द्वारा उत्पीड़न ,नरभेद , शारीरिक शोषण आदि कुकृत्य होने पर भी उन नरभक्षी लोगो का चरण वन्दन करने में शर्म तक नही आती है। ज्ञानवापी जैसे विषयों पर हिन्दू समाज के कुछ लोगो को लगता है कि ये सब विषय राजनीतिक है एवम यह सब अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने हेतु हो रहा है । अब इसको मानसिक गुलामी ही कहा जा सकता है जिसके चलते सैकड़ो वर्षों बाद सनातन धर्म के अस्तित्व , सम्मान व संरक्षण हेतु कुछ स्वाभिमानी लोग संघर्ष करने का साहस कर रहे हैं तो अकर्मण्य व लालची लोगो को पीड़ा हो रही है। जबकि दूसरी तरफ मजहब के नाम पर एकत्रित होकर कट्टरवादी लोग इस राष्ट्र में शरीयत को क्रियान्वित करने हेतु पूर्ण रूप से प्रयासरत हैं। इसीलिए जब वर्तमान सरकार इस राष्ट्र में संविधान का अनुपालन करवाना चाहती है तो मजहबी कट्टरवादी, शिक्षित वामपंथी व सेक्युलर लोग यह प्रमाणित करने में लग गए हैं कि इस देश का कानून उनका उत्पीड़न कर रहा है , यह वही लोग हैं जो इस राष्ट्र के कुछ उच्च व संवैधानीक पदों पर विराजमान हैं।एक ऐसा समय था जब शरीयत को बढ़ावा देते हुए अल्पसंख्यक मंत्रालय बनवाया गया था , ऐसे कानून बनवाए गए जिसमे हिन्दू समाज अपने धर्म व पूजा स्थलों को पुनर्जीवित ना कर सके, यासीन मलिक जैसे कट्टरवादी लोग देश के शक्तिशाली लोगो से व्यक्तिगत संवाद करते थे , तब किसी भी बुद्धिजीवी को आपत्ति नही थी । आज भारत के अंदर ही हिन्दू समाज लगभग 200 जिलों में अल्पसंख्यक हो चुका है परन्तु इन बुद्धिजीवियों को कोई आपत्ति नही है । बंगलादेशियो , रोहिंगयाओ ओर मजहबी लोगो ने देश के संसाधनों पर अवैध कब्जा किया हुआ है पर किसी बुद्धिजीवी को आपत्ति नही है । आज शाहीन बाग जैसे हजारों स्थान भारत मे बन चुके है पर किसी को कोई दिक्कत नही है । यदि शाहीन बाग जैसे इन असंख्य स्थलों पर कठोर कानूनी कार्यवाही नही हुई तो निश्चित ही अवैध घुसपैठियों का मनोबल बढ़ेगा जो कि रास्ट्र सुरक्षा के हित मे नही है । जिस प्रकार जिहादी व कटरपंथी शरीयत के लिए सजग है उसी तरह सभ्य समाज को रास्ट्र व मानवता हेतु सजग होना पड़ेगा क्योंकि सम्पूर्ण दायित्व मात्र सरकार का नही हो सकता । अतः यह कहने या स्वीकारने में कोई संदेह नही है कि अचेतन सभ्य सनातनी समाज राष्ट्र के लिए दीमक के समान है।
सादर धन्यवाद
दिव्य अग्रवाल

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