शेख अब्दुल्लाह परिवार और कश्मीर का सच ——-

images (16)

– इंजीनियर श्याम सुन्दर पोद्दार, महामन्त्री, वीर सावरकर फ़ाउंडेशन                         ———————————————
आज जब ‘द कश्मीर फाइल्स’ के माध्यम से वस्तुस्थिति को हमने बहुत कुछ समझ लिया है , तब कश्मीर के बारे में और भी कुछ जानने , समझने व सुनने की हमारी जिज्ञासा बढ़ने लगी है । यह अच्छी बात है कि आज का जागरूक हिंदू कश्मीर के सच से रूबरू होना चाहता है। हम सभी यह भली प्रकार जानते हैं कि कश्मीर के आतंकवादियों का महिमामंडन करते हुए व उन्हें निर्दोष व पीड़ित बताते हुए मुंबई फ़िल्म उद्योग ने हैदर , रोजा जैसी कुल 6 फिल्में बनाईं। पाकिस्तान मानना होगा तभी देश स्वाधीन होगा – नारा लगाने वाले मुस्लिम लीग के साथी वामपंथियों को इन फिल्मों में कुछ भी ऐसा दिखाई नहीं दिया जो गलत हो। यह वही लोग थे जो आतंकवादियों का महिमामंडन करते रहे हैं और भारत तेरे टुकड़े होंगे या ऐसे ही देश विरोधी नारों को या तो नजरअंदाज करते रहे हैं या उचित बताते रहे हैं।
ये लोग कभी प्रश्न नही करते थे कि कश्मीर के ५ लाख हिन्दु शरणार्थी क्यों जम्मू के शरणार्थी शिविर में रह रहे हैं ? आज इन ५ लाख हिन्दुओं के शरणार्थी बनने का कारण द कश्मीर  फाइल्स में उनका सच स्वरूप सामने आया तो तरह – तरह के सवाल उठाने लगे, आधा सच दिखाया गया है। इतने मुसलमान आतंकवादियों के हाथों मारे गये,उनको दिखाया नही गया। जबकि जो मुसलमान पुलिस में काम करते थे,जो केंद्रीय सरकार में काम करते थे,वे मारे गये। कोई साधारण मुसलमान नही मारा गया। पर साधारण हिन्दु  मारे ही नही गये वे कश्मीर घाटी से निकाल दिये गये व शरणार्थी बन कर जम्मू में रहने लगे।
         यदि ‘कश्मीर फाइल्स’ नही आती तो भारत में जो वातावरण इन लोगों ने बनाया था की जगमोहन ने इनको जाने को कहा और ये यहाँ से निकल गये। आज कश्मीर पर अब नेहरू व शेख़ अब्दुल्ला को हीरो बनाकर झूठ पर झूठ लिखा जा रहा है। सरदार पटेल को खलनायक बनाया जा रहा है। जबकी आज कश्मीर को समस्या बनाने में सिर्फ़ दो आदमियों का ही हाथ है,नेहरू व शेख़ अब्दुल्ला।      
कांग्रेस पार्टी ने गृहमन्त्री सरदार पटेल के हाथ से लेकर कश्मीर व हैदराबाद विषय नेहरू के अधिकार में दे दिया। ब्रिटिश संसद द्वारा पारित इंडिया इंडिपेंडेन्स एक्ट में भारत की रियासतों को भारत में या पाकिस्तान में मिलने की छूट थी। पर इसके एक शर्त भी थी कि उस राज्य की सीमाए भारत या पाकिस्तान से मिलनी चाहिये। कश्मीर एक ऐसा राज्य था जिसकी सीमाए भारत से भी मिलती थी और पाकिस्तान से भी मिलती थी। कश्मीर का महाराजा हरी सिंह दुविधा की स्थिति में भी था एवं मजबूर भी था।नेहरू के कश्मीर विषयक मामले में सर्वेसर्वा होने का मतलब था यदि कश्मीर भारत में मिलता है तो महाराजा हरी सिंह को कश्मीर छोड़ना पड़ेगा व कश्मीर पर शेख़ अब्दुल्ला का शासन होगा।
        दूसरी तरफ़ ब्रिटिश सरकार ने १५ अगस्त के पहले राजाओं को अपने अपने राज्य को  भारत या पाकिस्तान में मिलने को कहा। १४ अगस्त के बजाय १६ अगस्त १९४७ पंजाब का विभाजन किया गया। पंजाब का गुरदासपुर व  पठानकोट  रेल के मुख्यालय पठानकोट  जिससे पूर्वी जम्मू  व पूर्वी पंजाब के बीच सड़क मार्ग था , वह पश्चिम पाकिस्तान को दे दिया गया। इस कारण महाराजा कोई निर्णय नही ले पा रहे थे व पाकिस्तान के साथ यथा स्थिति में रहने का समझौता किया । भारत सरकार ने इस तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया। शेख़ अब्दुल्ला के पाकिस्तान को सहयोग करने की शर्त रखी कि उसे कश्मीर का मुख्य अधिकारी बनाया जाय। जिन्ना ने शेख़ अब्दुल्ला की माँग को यह कह कर ठुकरा दिया कि कश्मीर एक पके हुए सेव की तरह पाकिस्तान की गोद में गिरेगा।
     खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान के सीमांत प्रदेश में जिन्ना ने जनमत संग्रह करा कर अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान को जेल में डाल दिया। अब्दुल्ला कहीं उसको पाकिस्तान गिरफ़्तार कर जेल में न डाल दे जब पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला किया श्रीनगर छोड़ कर भोपाल भाग गया। कश्मीर के भारत में विलय  में शेख़ अब्दुल्ला की कोई भूमिका नही  है। हाँ, जीतती हुई भारत की सेना को कश्मीर से आगे शेख़ अब्दुल्ला ने राज्य के मुख्य अधिकारी होते हुए सेना का नियंत्रण उसके हाथ था रोक दिया। क्योंकि कश्मीर के अलावा उसका पाक अधिकृत कश्मीर पर कोई प्रभाव नही था। इससे कश्मीर समस्या स्थाई बना दी गई। जूनागढ़ के नबाब को कोई अधिकार नही था कि वह अपने राज्य को पाकिस्तान में मिलाये क्योंकि उसकी सीमाएँ पाकिस्तान से नही मिलती। वह चारों तरफ़ से भारत से घिरा हुआ है। इसी लिए भारत सरकार को वहाँ सैनिक कार्यवाही करनी पड़ी व जनमत संग्रह करवाना पड़ा।

जब कश्मीर घाटी से पाकिस्तान हमलावरों को भगा दिया गया तो लॉर्ड माउंटबेटन पाकिस्तान जाकर जिन्ना से मिले। उन्होंने जिन्ना को कहा कि कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की ब्यवस्था कर देता हूँ। जिन्ना ने कहा कि भारत की सेना व शेख़ अब्दुल्ला वहाँ का प्रधान रहते हुए जनमत संग्रह करना एक झूठ होगा। माउंटबेटन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में जनमत संग्रह हो। शेख़ अब्दुल्ला तुरंत मान गया। दूसरे दिन २ नवम्बर १९४७ नेहरू ने रेडियो से घोषणा की कि भारत संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में जनमत संग्रह करवायेगा। ऐसा करके नेहरू ने आक्रमणकारी पाकिस्तान को सम्मानित स्थान दे दिया व महाराजा हरी सिंह ने भारत में जो कश्मीर का विलय किया था, उसको ख़त्म कर दिया। क्योंकि भारत में अन्य राजाओं ने अपने राज्य का विलय किया था, पर कहीं पर भी जनमत संग्रह नही हुवा। इण्डिया इंडिपेंडेन्स ऐक्ट की राज्यों के बिलय के बिरुद्ध था जनमत संग्रह करवाना।
      वास्तव में कश्मीर के सच को स्पष्ट करने के लिए पाकिस्तान निर्माण में शेख अब्दुल्लाह का योगदान और आजादी के बाद शेख अब्दुल्लाह के परिवार की संदिग्ध भूमिका का सही चित्रण किया जाना अभी शेष है। जब इस परिवार के सच को हम समझ लेंगे तो कश्मीर का बहुत बड़ा सच हमारी नजरों में उतर जाएगा। हिंदुस्तान के साथ गद्दारी करके हिंदुस्तान का खाना और हिंदुस्तान की राजनीति में सक्रिय रहकर एक प्रांत का मुख्यमंत्री बन कर दुनिया के सभी ऐशो-आराम की चीजों का उपभोग करना यदि हिंदुस्तान में किसी परिवार से सीखा जा सकता है तो वह अब्दुल्ला परिवार ही हो सकता है।

Comment:

İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
betpark giriş
Hitbet giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
hitbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
casibom
casibom
casibom giriş
casibom giriş
casibom
casibom
hititbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
yakabet giriş
bahisfair giriş
bahisfair
betnano giriş
betorder giriş
betorder giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
timebet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
kolaybet giriş
betpark
betpark
vaycasino
vaycasino
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
casibom giriş
betplay giriş
betplay giriş
roketbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
casibom güncel giriş
casibom giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino