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भारत की ऑपरेशन गंगा और मोदी है तो मुमकिन है…

मित्रो, चलिए आज में “मोदी है तो मुमकिन है” के नारे जो लोग लगा रहे हैं, खासकर भक्त. इसकी असलियत से रूबरू कराता हूं. यहां पर मैंने भक्त शब्द का इसलिए प्रयोग किया है ताकि मोदी विरोध में आंख रहते अंधे हो चुके लिब्रांडु, चमचे, खान मार्केट गैंग, अर्बन नक्सली और टबलकिट गैंग वाले इन भक्तों से बहुत चिढ़ते है !? क्यूंकि भक्त इन लोगों को सच्चाई से रूबरू कराते हैं, इससे गैंग वाले बौखलाकर मोदी समर्थकों को भक्त कह कर बुलाते हैं.

ऊपर की हेडलाइन को पढ़कर आप लोग समझ गए होंगे कि मैं किस टॉपिक पर पोस्ट कर रहा हूं. चलिए अब मुद्दे पर चलते हैं. रूस के ताबड़तोड़ हमले की वजह से यूक्रेन में हालात लगातार बेहद गंभीर होते जा रहे हैं. यूक्रेन के खारकीव और कीव शहरों पर रूसी सैनिक लगातार बमबारी कर रहे हैं, जिसके चलते दूसरे देशों के हजारों छात्र और नागरिक वहां फंसे हुए हैं. तमाम देश अपने-अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकालने के लिए कागजी तौर पर अभियान चला रहे हैं, लेकिन भारत जमीनी स्तर पर जाकर ऑपरेशन गंगा चला रहा है. इस में बताऊंगा कि यूक्रेन में फंसे नागरिकों को निकालने में कौन-सा देश कितना आगे है ? भारत के ऑपरेशन गंगा का स्टेटस क्या है और अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन जैसे देशों के नागरिकों की स्थिति कैसी है ?

आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन में कुल 80 हजार विदेशी छात्र हैं, जिनमें से केवल 18 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र हैं !! इसके बाद मोरक्को, अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और नाइजीरिया का नंबर आता है. पाकिस्तान के करीब 3000 हजार नागरिक हैं जिनमें 900 छात्र हैं. इसके अलावा चीन के 6000 नागरिक हैं, अमेरिका के 2000 नागरिक हैं जिनमें 900 अमेरिकी अधिकारी हैं, ब्रिटेन के करीब 4000 नागरिक यूक्रेन में फंसे हुए हैं. भारत ने यूक्रेन में फंसे छात्रों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया हुआ है. इसके तहत अब तक 2500 के करीब छात्रों को निकाला जा चुका है. ऑपरेशन गंगा चलाने से पहले भारत करीब अपने 7000 के करीब नागरिकों को निकाल चुका है. भारत लगातार अपने विमान भेजकर छात्रों को निकालने की कोशिश रहा है !! इसी कड़ी में भारत के चार मंत्री भी यूक्रेन के पड़ौसी देशों में पहुँच कर ऑपरेशन गंगा को तेजी से चला रहे हैं. उधर, चीन ने अब तक अपने छह हजार नागरिकों को निकालने में अपना हाथ खड़े कर दिये हैं, और उन्हें स्थानीय अधिकारियों का आदेश मानने के लिए कहा है, जब तक उन्हें वहां से रेस्क्यू न कर पाता है. वहीं, ब्रिटेन, जर्मनी, मिस्र, मोरक्को और नाइजीरिया ने अपने नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि स्थानीय अधिकारियों का निर्देश मानें. लेकिन उन्हें निकालने के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किया है. कुछ देशों ने अपने नागरिकों को दूसरे सीमावर्ती देशों तक पहुंचने के लिए कहा है. यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के मामले में विश्व का नंबर वन शक्तिशाली देश अमेरिका ने सक्षम नहीं होने की बात कही है !! अमेरिकी सरकार का कहना है कि उसके नागरिक सीमा पार करके दूसरे पड़ोसी देशों में पहुंच जाएं, जिसके बाद उन्हें मदद दी जाएगी !! उधर, ब्रिटेन ने अपने नागरिकों से कहा कि वे यूक्रेन की एडवाइजरी ही मानें और बंकरों में रहें, जब तक उन्हें वहां से रेस्क्यू न किया जा सके. जर्मनी ने तो अस्थायी तौर पर अपना दूतावास ही बंद कर दिया है.

चलिए अब भारत क्या कर रहा है देखते हैं. यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए केंद्र सरकार ने चार मंत्रियों ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरदीप पुरी, किरण रिजिजू और वीके सिंह को युद्धग्रस्त देश के पड़ोसी देशों में भेज दिया है. ये मंत्री भारत के विशेष दूत के तौर पर गए हैं. इसके तहत ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया और मोल्दोवा, किरण रिजिजू स्लोवाकिया, हरदीप पुरी हंगरी और वीके सिंह ने पोलैंड में मोर्चा संभाल लिया है. अहम बात यह है कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सकुशल लाने के लिए भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय यात्रा नियमों में बड़ी बदलाव किया है. इसके तहत कोरोना टेस्ट, टीकाकरण और एयर सुविधा पोर्टल पर पूर्व पंजीकरण की अनिवार्यता को हटा दिया है. मोदी सरकार ने अब ऑपरेशन गंगा में तेजी लाने के लिए भारतीय वायुसेना को भी काम लगा दिया है. विश्व के बड़े मालवाहक जहाजों में से एक C-17 ग्लोबमास्टर को Modifications कर उसमें बैठने के लिए सीट लगा दी गयी है, ताकि भारतीय नागरिक आराम से बैठकर वहां से आ सकें. खबर मिलने तक भारतीय वायुसेना ने6 C-17 ग्लोबमास्टर को रेस्क्यू ऑपरेशन गंगा में लगा दिया है. यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद यूक्रेन में हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया था. इस वजह से भारत यूक्रेन के चार पड़ोसी देशों हंगरी, पोलैंड, रोमानिया और स्लोवाकिया के ज़रिये भूमि मार्ग से अपने फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है. मैंने जितनी बातें बताई हैं, यह कहानी नहीं है जमीनी सच्चाई है. इसलिए कहता हूँ कि मोदी है तो मुमकिन है.
सोशल मीडिया से साभार

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