“ऋषि-बोधोत्सव पर ऋषि जन्मभूमि टंकारा में ऋग्वेद-पारायण-यज्ञ आदि कार्यक्रम संपन्न”

IMG-20220302-WA0018

ओ३म
=========
ऋषि दयानन्द को अपने बाल्यकाल में शिवरात्रि पर्व पर सन् 1839 में अपने गृह स्थान टंकारा के शिव मन्दिर में बोध हुआ था। टंकारा में ऋषि जन्म भूमि न्यास संचालित है जहां प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के दिन ऋषि बोध पर्व का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में हमें भी अनेक बार जाने का अवसर मिला है। कोरोना रोग के कारण सन् 2021 तथा सन् 2022 के ऋषि बोधोत्सव सामान्य रूप से आयोजित नही हो सके। सीमित संख्या में ही लोग इन आयोजनों में पहुंचे। आज का आयोजन भी अत्यन्त सीमित संख्या में आये लोगों की उपस्थिति में मनाया गया। इस पूरे कार्यक्रम का जीवन्त प्रसारण आर्यसन्देश टीवी पर दिनांक 28 फरवरी, 2022 तथा 1 मार्च, 2022 को किया गया। आर्यसन्देश टीवी के माध्यम से आर्यों को यह एक बहुत ही अच्छी सुविधा उपलब्ध हुई है। टंकारा न जाने से ऋषिभक्तों को जो क्लेश होता, वह आंशिक रूप से यूट्यूब टीवी प्रसारण से कम हुआ। ऋषि बोधोत्सव पर्व पर टंकारा जन्म भूमि न्यास में ऋग्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य रामदेव जी थे। उनके ब्रह्मचारियों ने मन्त्रोच्चार किया। आचार्य जी ने यज्ञ के अनन्तर एक मन्त्र का उल्लेख कर अपने सारगर्भित एवं प्रभावशाली विचार भी व्यक्त किये। इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में डीएवी प्रबन्धकत्र्री समिति की ओर से श्री एस.के. शर्मा जी टीवी प्रसारण में दृष्टिगोचर हुए। आज ऋषि बोधोत्सव पर्व पर आयोजित समापन आयोजन में शर्मा जी ही मुख्य यजमान थे। यज्ञ के अनन्तर आचार्य रामदेव जी ने एक मन्त्र का उल्लेख कर अपने जो विचार प्रस्तुत किये, वह कुछ कुछ प्रस्तुत कर रहे हैं।

आचार्य रामदेव जी ने कहा कि जो मनुष्य परमात्मा तथा सच्चे विद्वान सदाचारी लोगों का अनुकरण करते हैं वह संसार रूपी नदी को पार कर जाते हैं। जो मनुष्य अनुकरण तो नहीं करते परन्तु परिश्रम अधिक करते हैं उनको परमात्मा तथा विद्वानों का अनुकरण करने वाले लोगों की तुलना में कम लाभ होता है। आचार्य जी ने एक माता तथा बच्चे का उदाहरण देकर बताया कि जो माता व बच्चा अलग अलग चलते हैं तो उस माता को बच्चे की धीमी गति से चलना होता है। यदि मां बच्चे की उंगली पकड़ लेती है तो फिर बच्चा तेज गति से चलता है। वह माता की गति के समान अथवा कुछ कम गति से चलता है। ऐसा ही लाभ परमात्मा को जानकर आचरण करने से उपासक को मिलता है। आचार्य जी ने ऐसे मनुष्यों की चर्चा की जो युवावस्था में साधना व उपासना न कर वृद्धावस्था में करने का विचार करते हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में साधना करने से उपासना की सफलता में कठिनता होती है। आचार्य जी ने कहा कि यदि हम युवावस्था से ही साधना का अभ्यास नहीं करेंगे तो हमें मृत्यु का समय आने पर ईश्वर का स्मरण नहीं होगा। जो मनुष्य मरते समय ईश्वर को स्मरण नहीं करते उनका परजन्म उन्नति को प्राप्त नहीं होता। आचार्य जी ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनि जीवन भर जप, तप व उपासना आदि कार्यों को इसीलिए करते थे कि जीवन भर वह ईश्वर को स्मरण रखें और अन्तिम समय में भी वह ईश्वर को स्मरण करते हुए प्राणों का त्याग करें। यदि मृत्यु के समय हमें ईश्वर की स्मृति बनी रहती है, हम ईश्वर का जप व धन्यवाद करते हुए प्राण त्याग करते हैं, तो मनुष्य का बहुत हित व कल्याण होता है।

आचार्य रामदेव जी, टंकारा ने ऋषि दयानन्द जी की मृत्यु का दृश्य भी उपस्थित किया। उन्होंने कहा कि वेद कहते हैं कि संसार में रहते हुए परमात्मा का त्याग मत करना। संसार का भोग भोगते हुए भी मनुष्य को अपने कल्याण के लिए परमात्मा को स्मरण रखते हुए प्रातः सायं सन्ध्या-उपासना सहित यज्ञ आदि कर्मों को करते रहना चाहिये। आचार्य जी ने कहा जिनको प्रातः व सायं परमात्मा का ध्यान आता है वह लोग परमात्मा के भक्त हैं। आचार्य जी ने अपने सम्बोधन में महात्मा आनन्द स्वामी जी के भांजे से जुड़ी अपनी स्मृतियों का उल्लेख कर बताया कि वह शाकाहार तथा धर्म के कामों में रुचि रखते थे। इससे जुड़ी कुछ बातों को आचार्य जी ने अपने सम्बोधन में प्रस्तुत किया।

आचार्य जी ने कहा कि जिस मनुष्य की संसार में कीर्ति होती है वह मनुष्य मरने के बाद भी जीवित रहता है। उन्होंने ऐसे अनेक पुरुषों के नाम बताये। इन नामों में ऋषि दयानन्द और स्वामी विेवेकानन्द जी के नामों की गणना भी की। आचार्य जी ने कहा कि ऋषि दयानन्द जी के उपदेश संसार में घर-घर में फैले हुए हंै। आचार्य जी ने बताया कि हमारे धर्म और संस्कृति की रक्षा करने वाले दो महान व्यक्ति हुए हैं। इनके नाम हैं शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप। आचार्य जी ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का भी कृतज्ञतापूर्ण स्मरण किया। आर्यसमाज को आचार्य जी ने वेदों की तथा भारत की संस्कृति बताया। आचार्य जी ने कहा कि आर्यसमाज पाखण्डों से युक्त संस्था नहीं है। आर्यसमाज को उन्होंने परमात्मा की वेदवाणी तथा सत्य का प्रचार करने वाला संगठन बताया। इसी के साथ आचार्य जी ने अपने सम्बोधन को विराम दिया तथा इसके आगे यज्ञ पुनः आरम्भ होकर पूर्णाहुति पर समाप्त हुआ। यजमानों के अतिरिक्त यज्ञशाला में उपस्थित कुछ लोगों ने भी यज्ञ में कुछ मन्त्रों से आहुतियां प्रदान की।

ऋषि दयानन्द जन्म भूमि न्यास के मंत्री श्री अजय सहगल जी ने अपने सम्बोधन में ऋषिभक्त श्री वाचोनिधी आर्य के व्यक्तित्व एवं कार्यों का परिचय दिया। टंकारा समाचार मासिक पत्र के ‘‘ऋषि बोधांक” का लोकार्पण भी किया गया। इसके बाद कुछ संन्यासी, महात्मा, विद्वानों एवं कार्यकत्र्ताओं को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद भी यज्ञ जारी रहा और विधिपूर्वक ऋग्वेद पारायण यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। पूर्णाहुति के बाद यजमानों को आशीर्वाद की प्रक्रिया सम्पन्न की गई। इसके बाद एक भजन हुआ जिसके कुछ बोल थे ‘दयानन्द था एक रोशन महा ऋषि, चमका दिया जिसने संसार सारा। जमी के कणों को गगन पे चढ़ाया, सितारों को जिसने जमी पे उतारा।’ इस भजन के चलते प्रातः 10.00 बजे से कुछ मिनट पूर्व टीवी प्रसारण बन्द हो गया। आर्यसन्देश टीवी के प्रसारण के कारण हमारा व हमारे जैसे अनेकानेक लोगों को टंकारा ऋषि बोधोत्सव का सीधा प्रसारण देखने का सुअवसर मिला। हम यूट्यूब आर्यसन्देश टीवी चैनल का धन्यवाद करते हैं। प्रसारण देखकर हमे लगा कि हम भी टंकारा के बोधोत्सव पर्व में सम्मिलित हुए। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
bettilt giriş
onwin
onwin
onwin
sahabet
onwin
sahabet