Categories
देश विदेश

सामरिक क्षेत्र में मोदी प्रशासन की तैयारियों से सबक लें संघर्षरत देश, यूक्रेन जैसी बला पास भी नहीं फटकेगी


 कमलेश पांडेय

सिर्फ रक्षा क्षेत्र की ही बात करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने बीतते लगभग पौने आठ साल के कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की जो पहल की है, वह बदलते वक्त की मांग तो है ही और समसामयिक उग्र वैश्विक परिस्थितियों में एक अहम राष्ट्रीय जरूरत भी समझी जाने लगी है।

वैश्विक महाशक्तियों में से एक रूस द्वारा अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर किये गए अप्रत्याशित आक्रमण और यूक्रेन को रूस के खिलाफ भड़का रहे अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो देशों के तथाकथित सहयोगियों द्वारा यूक्रेन को युद्धजन्य परिस्थितियों में उसके हाल पर अकेले छोड़ दिये जाने और आत्मरक्षार्थ उसे त्वरित सैन्य सहयोग प्रदान नहीं किये जाने वाला अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम विश्व कूटनीति की एक ऐसी मार्मिक पहेली बन चुकी है कि जिसका इजहार खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यह कहकर किया कि हमें हमारे हाल पर अकेला छोड़ दिया गया और रूस के खिलाफ किसी ने हमारा खुलकर साथ नहीं दिया। यही वजह है कि अब भविष्य में कोई भी जरूरतमंद देश किसी अंतरराष्ट्रीय समूह या गठबंधन के झांसे में आने से पहले सौ बार सोचेगा।

ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि किसी भी राष्ट्र की बागडोर कैसे राजनेता के हाथ में सौंपी जाए, वह अपनी रक्षा जरूरतों को कितनी अहम प्राथमिकता दे और अपने से मजबूत दुश्मन देशों को ललकारने से पहले अपनी युद्ध तैयारियों को कैसे पूरे करे, इस बात पर विचार करना उस देश के नेतृत्व व वहां के प्रशासन के साथ साथ वहां के  बुद्धिजीवियों और जनता का भी पहला कर्तव्य होना चाहिए। इस नजरिए से यूक्रेन वासियों और वहां के नेतृत्व ने जो गलतफहमियां पाली और उसके जो भयावह दुष्परिणाम सामने आए, वह अब हरेक विवादग्रस्त देशों के लिए एक नजीर बन चुकी है। बता दें कि यूक्रेन परमाणु शक्ति संपन्न देश बन सकता था, लेकिन पड़ोसी देशों व तथाकथित मित्र देशों के झांसे में आकर उसने ऐसा नहीं किया। यदि आज वह परमाणु हथियार संपन्न देश होता तो रूस इस कदर दुस्साहस नहीं प्रदर्शित करता।

आपको पता है कि पाकिस्तान भी भारत को उसी तरह से आंख दिखाता आया है, जैसे कि यूक्रेन अपने सशक्त पड़ोसी देश रूस के साथ करते रहने को आदि हो चुका था। बता दें कि जिस तरह से यूक्रेन को अमेरिका का शह प्राप्त है, उसी तरह से पाकिस्तान को पहले अमेरिका और अब चीन का शह प्राप्त है। सिर्फ पाकिस्तान ही क्यों, नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका, म्यांमार, मालदीव, अफगानिस्तान, भूटान आदि देशों को भारत के खिलाफ चीन जिस तरह से रह रह कर भड़काने का आदि हो चुका है, उसके परिप्रेक्ष्य में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि भारत भी अपने मित्र देश रूस की तरह अपना हौसला दिखाए और पाकिस्तान की ठुकाई करने लगे तो फिर शेष दुनिया उसे वैसे ही अकेला छोड़ देगी, जैसे कि आज सभी देश यूक्रेन को अकेला छोड़ दिये हैं।
कहना न होगा कि चीन-पाकिस्तान की संयुक्त खलनीति के  मुकाबले भारत की मजबूत रणनीति बनाने में पीएम डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने चाहे जितनी भी काहिली बरती हो, लेकिन परवर्ती पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने शक्ति संचय जैसे अहम मसले पर काफी दूरदर्शिता दिखाई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि भारत की वैश्विक पूछ अब निरन्तर बढ़ रही है। क्योंकि मोदी सरकार के युगान्तकारी फैसलों से भारत की आर्थिक और सैन्य ताकत में पिछले 7-8 वर्षों में काफी इजाफा हुआ है, साथ अन्य मोर्चे पर भी भारत में संतुलित विकास और प्रगतिशील निर्णय नजर आ रहा है।
सिर्फ रक्षा क्षेत्र की ही बात करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने बीतते लगभग पौने आठ साल के कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की जो पहल की है, वह बदलते वक्त की मांग तो है ही और समसामयिक उग्र वैश्विक परिस्थितियों में एक अहम राष्ट्रीय जरूरत भी समझी जाने लगी है। कहना न होगा कि हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती देने का उनके द्वारा जो प्रयास किया जा रहा है, वह इस वर्ष के आम बजट में भी स्पष्ट रूप से देखा जा चुका है। 
इस बात में कोई दो राय नहीं कि गुलामी के कालखंड में भी और आजादी के तुरंत बाद भी भारत के रक्षा निर्माण की ताकत बहुत ज्यादा थी। खासकर दूसरे विश्वयुद्ध में भारत में बने हथियारों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। यद्यपि बाद के वर्षों में हमारी इस शक्ति का ह्रास होने लगा, लेकिन इसके बावजूद उसकी क्षमता में कोई कमी नहीं आई, न पहले और न अब। देखा जाए तो प्रधानमंत्री द्वारा रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता और उस निमित्त समुचित कार्यवाही किये जाने के आह्वान से उनकी राष्ट्र की भावना का पता चलता है। 
पीएम मोदी ने सदैव इस बात पर जोर दिया है कि रक्षा प्रणालियों में अनोखेपन और विशिष्टता का बहुत महत्त्व है, क्योंकि ये दुश्मनों को सहसा चौंका देने वाले तत्त्व होते हैं। हालांकि अनोखापन और चौंकाने वाले तत्त्व तभी आ सकते हैं, जब उपकरण को आपके अपने देश में विकसित किया जाये। इसी उद्देश्य से प्रेरित होकर उन्होंने इस साल के बजट में देश के भीतर ही अनुसंधान, डिजाइन और विकास से लेकर निर्माण तक का एक जीवन्त इको-सिस्टम विकसित करने का ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया हुआ है। इसी वास्ते रक्षा बजट के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से को केवल स्वदेशी उद्योग के लिये रखा गया है।

प्राप्त आंकड़े बता रहे हैं कि रक्षा मंत्रालय ने अब तक 200 से अधिक रक्षा प्लेटफॉर्मों और उपकरणों की सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां जारी की हैं। इस घोषणा के बाद स्वदेशी खरीद के लिये 54 हजार करोड़ रुपये की संविदाओं पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं। इसके अलावा 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की उपकरण खरीद प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। जबकि तीसरी सूची के जल्द आने की संभावना है।
वाकई हथियार खरीद की प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि उन्हें शामिल करते-करते इतना लंबा समय बीत जाता है कि वे हथियार पुराने ढंग के हो जाते हैं। लिहाजा इसका भी समाधान ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ में ही निहित है। जहाँ तक सशस्त्र बलों की बात है तो वह निर्णय लेते समय आत्मनिर्भरता के महत्त्व को ध्यान में रखते हैं। इसलिए हथियारों और उपकरणों के मामलों में जवानों के गौरव और उनकी भावना को ध्यान में रखने की जरूरत है। यह तभी संभव होगा, जब हम इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनेंगे।
प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता की झलक उनकी इस बात से भी मिलती है कि साइबर सुरक्षा अब सिर्फ डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं, बल्कि वह राष्ट्र की सुरक्षा का विषय बन चुकी है। अपनी अदम्य आईटी शक्ति को हम अपने रक्षा क्षेत्र में जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही सुरक्षा में हम आश्वस्त होंगे। वहीं, संविदाओं के लिये रक्षा निर्माताओं के बीच की प्रतिस्पर्धा अंततोगत्वा धन अर्जित करने और भ्रष्टाचार की तरफ ले जाती है। तभी तो हथियारों की गुणवत्ता और उपादेयता के बारे में बहुत भ्रम पैदा किया जाता रहा है। लिहाजा आत्मनिर्भर भारत अभियान ही इस समस्या का भी समाधान है।
वहीं, प्रधानमंत्री ने आयुध फैक्ट्रियों की सराहना की है। उन्होंने ठीक ही कहा कि वे प्रगति और दृढ़ता की मिसाल हैं। हाल फिलहाल की बात करें तो जिन सात नये रक्षा उपक्रमों को पिछले वर्ष चालू किया गया था, वे तेजी से अपना व्यापार बढ़ा रहे हैं और नये बाजारों तक पहुंच रहे हैं। हमने पिछले पांच-छह सालों में रक्षा निर्यात छह गुना बढ़ाया है। आज 75 से अधिक देशों को मेक इन इंडिया रक्षा उपकरण और सेवा प्रदान की जा रही है। मेक इन इंडिया को सरकार द्वारा दिये जाने वाले प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप पिछले सात सालों में रक्षा निर्माण के लिये 350 से भी अधिक नये औद्योगिक लाइसेंस जारी किये जा चुके हैं, जबकि 2001 से 2014 के 14 वर्षों में सिर्फ 200 लाइसेंस जारी हुये थे। 
निजी क्षेत्र को भी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन तथा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के समकक्ष काम करना चाहिये। इसी को ध्यान में रखते हुये उद्योग, स्टार्ट-अप और अकादमिक जगत के लिये रक्षा अनुसंधान एवं विकास का 25 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया है। इस पहल से निजी क्षेत्र की भूमिका विक्रेता या आपूर्तिकर्ता से बढ़कर साझीदार की हो जायेगी।
वहीं, परीक्षण, जांच और प्रमाणीकरण की पारदर्शी, समयबद्ध, तर्कसंगत और निष्पक्ष प्रणाली जीवन्त रक्षा उद्योग के विकास के लिये जरूरी है। इस सम्बंध में एक स्वतंत्र प्रणाली समस्याओं के समाधान के लिये उपयोगी साबित हो सकती है। इसलिए हितधारकों से उम्मीद की जा रही है कि वे बजटीय प्रावधानों को समयबद्ध तरीके से कार्यान्वित करने के लिये नये विचारों के साथ आगे आयें। सभी हितधारक हाल के वर्षों में बजट की तिथि एक महीने पहले किये जाने के कदम का भरपूर लाभ उठायें और जब बजट कार्यान्वयन की तिथि आ पहुंचे, तो मैदान में उतर आयें।
बता दें कि बजट में की गई घोषणाओं के संदर्भ में ‘आत्मनिर्भरता इन डिफेंस: कॉल टू ऐक्शन’ यानी रक्षा में आत्मनिर्भरता: कार्यवाही का आह्वान विषयक बजट-उपरान्त वेबिनार को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उपर्युक्त बातें की, जिसका आयोजन रक्षा मंत्रालय ने किया था। उनकी इन बातों से साफ है कि भविष्य के सशक्त व सामर्थ्यशाली भारत की नींव वो रख चुके हैं और देशवासियों ने यदि 2024 में भी उन्हें अपना आशीर्वाद दिया तो भारत के निरन्तर मजबूत बनने के साथ साथ एक बार फिर विश्व गुरु और सोने की चिड़िया बन जाएगा। यह भारतीयों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं होगा। उनकी सधी हुई कूटनीति और दुरुस्त प्रशासनिक नीति हमें आश्वस्त करती है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
Hititbet Giriş
Vaycasino Giriş
Supertotobet Giriş
Vaycasino Giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
ikimisli giriş
roketbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betplay
betplay
betpark giriş
kolaybet giriş
ikimisli giriş
roketbet giriş
xlsot giriş
xslot giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betplay
betplay
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder
kralbet giriş
tarafbet giriş
xslot giriş
trendbet giriş
mavibet giriş
ikimisli giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
padisahbet giriş
padisahbet giriş
padisahbet
padisahbet
betpark giriş
ultrabet giriş
betmatik giriş
betmatik giriş
betkom giriş
padisahbet
padisahbet
betmatik giriş
kralbet giriş
betmatik giriş
betkom giriş
betkom giriş
padisahbet
tarafbet giriş
tarafbet giriş
kralbet giriş
kralbet giriş
betpark giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
kralbet giriş
kralbet giriş
perabet giriş
perabet giriş