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हिंदुत्व को लेकर चली बेतुकी बहस

उगता भारत ब्यूरो

दुर्भाग्यवश हमारे देश में तथाकथित, ‘ स्वयंभुव ‘ बुद्धिजीवी लोगों का एक ऐसा वर्ग है जिन्होनें अपने को ‘ सेक्युलर ‘ साबित करने के लिए हिन्दुत्व को गाली देने का एक आसान रास्ता ढूंढ लिया है। स्वार्थवश हिन्दुत्व के बारे में तरह तरह के भ्रम फैलाना इनका मुख्य पेशा है। यह लोग राजनीतिज्ञों की चापलूसी करके उनसे निकटता स्थापित कर लेते हैं। सरकार में ऊंचे ऊंचे पद हथिया लेते हैं।सरकारी संसाधनों का दुरूपयोग करके इनकी रोटी चलती है। किसी भी छोटी छोटी बात को लेकर ये लोग अपने को मिले पिछले पुरस्कार वापस करने जैसे नौटंकी करते रहते हैं। यह इनका चरित्र है। इनके षड्यंत्रों को अनाव्रत किया जाय, इसके लिए हमें हिन्दुत्व को समझना होगा।
हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति है। हिन्दुत्व चन्दन टीका लगाने वाला, घंटा घड़ियाल बजानेवाला, जंतर मंतर, जादू टोना करनेवाला, पोंगापंथी मानने वाला. अंध विश्वास फ़ैलाने वाला कोई धार्मिक रिचुअल नहीं है।यह अवश्य है कि हज़ारों साल के अंतराल में इसमें बहुत सी अवांछनीय बातों का समावेश हो गया है।हिन्दुत्व हमें यह छूट देता है कि जो बातें आज की आवश्यकताओं प्रतिकूल हैं उन्हें छोड़ दिया जाय। हिन्दुत्व भारतभूमि में पिछले लगभग 5000 सालों में विकसित एक विशिष्ट परंपरा, आस्था,सभ्यता एवं संस्कृति की अजस्त्र बहने वाली एक धारा है।यह हमारी मूल पहचान है।इसमें सभी बातों का समावेश है।भारत में रहने वाले सभी संप्रदाय, धर्म इसमें शामिल है। हिन्दुत्व जीने का एक सलीका है।हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति है। हमारे ऋषि मुनियों, मनीषियों ने इस परंपरा, संस्कृति की नींव डाली।हज़ारों वर्ष के अंतराल में इसका विकास होता रहा। हम पुरानी त्याज्य चीज़ों विचारों का परित्याग करते गए।त्याज्य विचारों को छोड़ने की स्वतन्त्रता हिन्दुत्व हमें देता है।हिन्दुत्व की कुछ अपनी विशेषताएं हैं। हम सारे विस्व को अपना कुटुंब ( वसुधैव कटुम्बकं ) मानते हैं। हमारे यहाँ इंसान, जीव जंतु, वनस्पतियों सभी का सम्मान किया जाता है।हाँ, मैं इससे इंकार नहीं कर सकता कि इसमें धीरे धीरे विकृतियों के प्रवेश होता गया।आज हिन्दुत्व में बहुत कुछ सुधार की आवश्यकता है।जीवन यापन की खोज में जो लोग बाहर आये उनको सभी को हमने स्वीकार किया वे यहीं बस गए और यहीं के होकर रह गए। हिन्दुत्व दुनिया में सबसे सहिष्णु है।इतिहास में आत्मरक्षा को छोड़कर ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलेगा जहां हमने कभी किसी पर अत्याचार किया हो। समस्याएं प्रारम्भ हुईं भारत में इस्लाम के प्रवेश के साथ।सं 1000 या इससे थोड़ा पहले भारत पर मुसलमानों के हमले होने लगे थे। मुहम्मद ग़ज़नवी और महम्मद गोरी ने भारत के अंदर घुसकर युद्ध के द्वारा एक बड़े भूभाग पर कब्ज़ा कर लिया था। भारत में इस्लामिक राज्य की स्थापना हो गई थी। बाहर से आने वाली इस्लामिक संस्कृति यहां की संस्कृति से मेल नहीं खाती थी। हिन्दुत्व में सभी को अपनी अपनी आस्था, विश्वास, अनुसार व्यवहार करने का अधिकार प्राप्त है।यह बहुलतावादी परंपरा कहा जायेगा। इसमें पूजा पद्धति में एक परमशक्ति में विश्वास किया जाता है। आप अपनी आस्था के अनुसार परमात्मा, ईश्वर या उसे किसी भी नाम से पुकार सकते हैं। आप अपने इष्ट तक तक पहुंचने के लिए किसी भी मार्ग का अनुसरण सकते हैं।सबका गतव्य एक है। इस्लाम नें इसके विपरीत यह कहा गया कि सृष्टि का रचयिता केवल अल्लाह है। अल्लाह तक पहुँचने का केवल इस्लाम का ही रास्ता है। जो अल्लाह में यकीन नहीं करता वह काफिर है। जिहाद करके ऐसे काफिर को क़त्ल कर देना चाहिए। मुस्लिम बादशाहों नें हिन्दुओं को बलपुर्वक मुस्लिम बनाने के लिए क़त्ले आम करवाये। कुछ बादशाह सहिष्णु भी थे जिन्होनें अपनी हिन्दू प्रजा का भी सम्यक ध्यान रखा। इतने विरोधाभास के बावजूद दोनों संस्कृतियों नें साथ साथ जीना सीख लिया।आपस में लड़ते रहे और सहअस्तित्व भी निभाते रहे। यह सिलसिला चला अंग्रेजों के आगमन से लेकर आज़ादी के दिन 15 अगस्त 1947 तक। अंग्रेजों नें अपनी कुटिल चालों से हिन्दू और मुसलमान के बीच एक विभाजन की रेखा खींच दी। भारी रक्तपात के बाद दो हिस्से में बटवारा हो गया। हिन्दू बहुल देश बना सेक्युलर भारत और इस्लाम पर आधारित बना पाकिस्तान। पाकिस्तान नें सेक्युलरिस्म को रिजेक्ट कर दिया। चूंकि अंग्रेजों नें हिन्दू और इस्लाम के बीच फूट के बीज बो दिए थे,इसके दुष्परिणाम तो होने ही थे। पाकिस्तान हमारा पडोसी हो कर भी दुश्मन की तरह व्यवहार करता रहता है। यह कबतक चलेगी इसका कोई अंदाज़ नहीं है।मुस्लमान यद्यपि की एक सेक्युलर राज्य में रह रहा है लेकिन वह भारत के सेक्युलर संविधान को पूरी तरह स्वीकार करने को तैयार नहीं है। कई बार मुस्लिम मौलाना मौलवी टी वी चैनलों पर आकर घोषणा हैं कि वह भारत के संविधान को उतना ही मानते हैं जितना शरिया i आ से मेल खाता है।यह लोग भारतीय संविधान में नहीं बल्कि शरिआ के शासन में रहना चाहते हैं।कहने का मतलब यह है ये लोग एक सामूहिक भारतीय संस्कृति से अलग रह कर अपनी एक अलग पहचान चाहते हैं।वही two nation theory आज भी कार्य कर रही है। दुःख की बात है की इस्लाम अन्य धर्मों, पूजा पद्धतियों के प्रति सम्मान विक्सित नहीं कर पाया। विश्व में अशांति एवं संघर्ष का यही एक मुख्य कारण है।
हिन्दुत्व एक ऐसी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा है जिसमें मनुष्य, पशु, पंछी जड़,चेतन सभी का सम्मान किया जाता है।हम दूसरों की आस्था का सम्मान करते हैं। हिन्दू ईश्वर भगवान् में विश्वास रखता है। अगर नहीं रखता है तो भी अच्छा हिन्दू हो सकता है। हमारे धर्म की और से कोई बंधन नहीं है कि दिन में कितनी बार पूजा करनी चाहिए। मेरी समझ में हमारे ऊपर धर्म की कोई बंदिश नहीं है. जितनी छूट हिन्दुत्व अपने अनुयायियों को देता है उतना शायद कोई भी धर्म नहीं देता है। समय के साथ में भी कई विकृतियां आईं हैं लेकिन उसके परिमार्जन में धर्म की और से कोई रुकावट नहीं है। धर्म के सुधार से हमें कोई परहेज नहीं है।हिंन्दू धर्म में अन्धविश्वास, उंच नीच, भेदभाव , जातिवाद, दहेज़ जैसी अनेक बुराइयां प्रवेश कर गई हैं। हमें इनसे पीछा छुड़ाना पड़ेगा। एक प्रगतिशील आधुनिक समाज का निर्माण करना होगा।गरीबी , भुखमरी, बीमारी पर विजय पानी होगी। हिन्दुत्व में यह सब सम्भव है क्योंकि हम निरंतर प्रगतिशील है।

हिन्दुत्व जो इस देश की मूलधारा है पर हमारे बुद्धिजीवी निरंतर आक्रमण करते रहते हैं हमारी हिन्दुत्व की जड़ों को कमज़ोर करके उसके विनाश के तरीके ढूंढते रहते हैं तरीका चाहे कोई भी हो। इनकी सहानुभूति नक्सलियों, आतंकवादियों इत्यादि के साथ है। यह लोग हिदुत्व विरोधी शक्तियों के एजेंट हैं।

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