बहुत सोच समझकर करें व्यवहार : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

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“जो लोग जीवन का वास्तविक आनन्द लेना चाहते हैं, उन्हें तीन व्यक्तियों {माता, पिता और गुरुजनों} के साथ कभी टकराव नहीं करना चाहिए। सदा उनका सम्मान करना चाहिए।”
आपने वीर शिवाजी, श्रीराम चन्द्र जी महाराज, और महर्षि दयानंद सरस्वती जी का नाम तो अवश्य ही सुना होगा। “वीर शिवाजी ने अपनी माता जीजाबाई जी के आदेश का सदा पालन किया। सदा उनका सम्मान किया और कभी भी उनके साथ लड़ाई झगड़ा आदि मूर्खता का व्यवहार नहीं किया।”
इसी प्रकार से, “श्रीराम चन्द्र जी महाराज ने अपने पिताश्री महाराज दशरथ जी के आदेश का पालन करते हुए 14 वर्ष तक वनवास किया। कभी यह भी नहीं पूछा, कि मेरा अपराध क्या है? मुझे वन में क्यों भेजा जा रहा है?”
“महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने भी अपने गुरु स्वामी विरजानन्द जी से बहुत ही अनुशासन पूर्वक वैदिक शास्त्रों का अध्ययन किया। और मृत्यु तक पूरे जीवन भर उनके आदेश निर्देश का पालन किया। सदा उनका सम्मान किया। कभी भी उनके साथ किसी प्रकार का विरोध या झगड़ा नहीं किया।”
और वर्तमानकाल में “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को भी आपने वीडियो आदि में अपनी पूज्या माता जी की चरण वंदना एवं सम्मान करते हुए देखा होगा।”
ये सब लोग अपने अपने जीवन में उच्च शिखर को प्राप्त हुए। इसका बहुत बड़ा कारण है, कि “इन्होंने अपने माता-पिता और गुरुजनों का श्रद्धापूर्वक सम्मान किया। उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में पूरी तन्मयता से उतारा।”
यदि आप भी अपने जीवन में कुछ अच्छी सफलता प्राप्त करना चाहते हों, तो उक्त महापुरुषों का अनुकरण करें। “अपने माता-पिता और गुरुजनों का सदा सम्मान करें। उनके साथ कभी भी किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न न करें।”
यदि उनकी कोई बात कभी ऐसी लगे, कि यह तो धर्म या वेदों के अनुसार नहीं है। तब भी उनके साथ नम्रता सभ्यता से व्यवहार करें। “भले ही उनकी बात प्रमाणों से, धर्म विरुद्ध भी सिद्ध हो जाए, और आप उनकी बात न भी मानें, तो भी उनके साथ असभ्यतापूर्ण व्यवहार कभी न करें। पूरे जीवन भर, अर्थात उनकी मृत्यु होने तक, उनकी सेवा अवश्य करें, और अपमान न करें।”
कभी कभी आप को भ्रांति भी हो सकती है, कि “आपकी बात सही है, और आप के माता-पिता या गुरुजन की बात धर्म के विरुद्ध है।” ऐसी स्थिति में भी अपने बड़ों के साथ असभ्यता नहीं करनी चाहिए। “अधिक से अधिक इतना कर सकते हैं कि, एकांत में बैठकर किसी अन्य विद्वान गुरु जी से उस विषय में सत्य और असत्य का निर्णय करवा सकते हैं।” “यदि आप ऐसा व्यवहार करेंगे, तो निश्चित रूप से आप को सफलता मिलेगी और आप अपने जीवन में आनन्द को प्राप्त कर सकते हैं।” “अन्यथा उन तीन व्यक्तियों के साथ टकराव करने पर आप ‘असभ्य’ कहलाएंगे। ग़लत परंपरा चलाएंगे। आप को देखकर दूसरे लोग भी ग़लत आचरण सीखेंगे। उसका दोष भी आपको लगेगा। यदि भविष्य में कभी आप को आपकी गलती समझ में आ गई, तो आप को जीवन भर अपने द्वारा किए गए दुर्व्यवहार का पश्चाताप भी करना पड़ेगा।”
“इसलिए बहुत सावधानी से व्यवहार करें। यही आपके जीवन की सफलता की कुंजी है।”

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