मडवा में छुपे हैं मानव को स्वस्थ रखने के अनेकों गुण

images (73)

ममता रानी

यदि आप बड़े शापिंग काम्पलेक्सों में घूमेंगे तो आपको अनाज के विभाग में रागी पाउडर के नाम से एक पैकेट मिलेगा। यदि आप मोटापा, मधुमेह आदि बीमारियों से परेशान हैं तो डॉक्टर आपको मल्टीग्रेन आटा खाने की राय देंगे, जिसमें रागी मिला होगा। वास्तव में आज दुनिया रागी को सुपरफूड कहने और मानने लगी है, क्योंकि रागी अत्यधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यप्रद है। इसलिए रागी और उसका पाउडर या आटा काफी मंहगा बिकने लगा है। परंतु क्या हम जानते हैं कि यह रागी और कुछ नहीं, बल्कि गाँवों में पाया जाने वाला मड़ुआ है जो कुछ समय पहले तक गरीबों का भोजन माना जाता था या आज भी माना जाता है? स्वास्थ्य की दौड़ में मड़ुआ गेहूँ से काफी आगे निकल गया है।
भारत में अंग्रेजों के आने से पहले मोटे अनाज खाने का प्रचलन अधिक था। गेहूँ, चावल के साथ-साथ अनेक प्रकार अन्य अनाज भी खूब खाए जाते थे। भोजन में किसी प्रकार का वर्गभेद नहीं था। उच्च वर्ग हो या निम्न वर्ग, सभी मोटे अनाजों का सेवन करते थे। जो अनाज जहाँ सरलता से और बहुतायत में उपजता था, वहाँ उसकी ही खपत होती थी। जैसे बिहार तथा बंगाल में चावल अधिक खाए जाते थे तो पंजाब में गेहूँ और मक्का, हरियाणा में बाजरा, मध्य प्रदेश में ज्वार झारखंड में ज्वार, कोदों, मड़ुआ, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश आदि क्षेत्रों में मड़ुआ या रागी आदि खूब खाए जाते थे। पराधीनता के काल में यह स्थिति बदली और मोटे अनाज खाने वालों को गरीब या हीन समझा जाने लगा। गेहूँ की उजली रोटियाँ खाना संपन्नता और प्रगतिशीलता की निशानी बन गई। ऐसे में ये मोटे अनाज प्रचलन से बाहर हो गए।
इतना होने के बाद भी ये अनाज कहीं न कहीं प्रचलन में बने रहे। कुछ तो गरीबी के कारण और कुछ सरलता से पैदा हो जाने के कारण और कुछ अपनी पौष्टिकता के कारण। कुपोषण के आज के दौर में एक बार फिर लोगों का ध्यान इन्हीं मोटे अनाजों की ओर जा रहा है। ऐसा ही एक मोटा अनाज है मड़ुआ जिसे कई स्थानों में रागी के नाम से भी जाना जाता है। आज के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग केवल गेहूँ का आटा नहीं खाते। वे मल्टीग्रेन आटा खाते हैं। इस मल्टीग्रेन आटे का एक महत्वपूर्ण घटक है मड़ुआ। मड़ुआ के आटे की रोटियां भी संपन्न परिवारों में खाई जाने लगी हैं, क्योंकि इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों की प्रशंसा आज के एलोपैथ चिकित्सक भी करने लगे हैं। परिणाम यह हुआ है कि जो मड़ुआ गाँवों में सरलता से यूँ ही मिल जाता करता था और गरीब उसे खाते थे, वही मड़ुआ आज शहरों में काफी मंहगा बिकता है और गरीबों को दो रूपये किलो में घटिया गेहूँ दिया जाता है। कहा जा सकता है कि गरीबों की थाली छीन कर अमीरों को परोस दी गई है।
मड़ुआ एक लाल-भूरे रंग का बारीक अनाज है। इसकी खेती काफी सरल होती है। इसमें काफी कम पानी लगता है और खाद आदि की भी न्यूनतम आवश्यकता पड़ती है। पहाड़ों औऱ पठारी इलाकों में भी यह सरलता से पैदा होता है। इसलिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड आदि इलाकों में इसकी खेती भी खूब होती थी और इसका उपयोग भी होता था। पहाड़ों के लोगों की लम्बी आयु का राज मड़ुआ ही था। इसके सेवन से उन्हें इतना पोषण मिलता था कि वे पहाड़ी रास्तों में सरलता से चलते थे। मड़ुआ को गेहूँ की भांति ही साफ करके धो, सुखा कर चक्की में पिसवाया जाता है। फिर इस आटे की रोटियां बनाकर खाई जाती हैं। इसकी रोटियां दिखने में काली होती हैं।
मड़ुए का आटा काफी पौष्टिक होता है। इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है और इस कारण इसके सेवन से हमारी हड्डियां मजबूत होती हैं। इसलिए बढ़ते बच्चों और अधिक आयु की महिलाओं और बुजुर्गों के लिए इसका सेवन काफी लाभदायक है। इसके सेवन से अधिक आयु के लोगों में होने वाली आस्टियोपोरोसिस नामक हड्डियों के कमजोर पडऩे की बीमारी से बचा जा सकता है और बढ़ते बच्चों की हड्डियां मजबूत होती हैं। यही कारण है कि कर्नाटक में इसका उपयोग सेरेलक जैसे बेबी फूड की तरह किया जाता है। वहाँ की माताएं मड़ुए के पाउडर को दूध में घोल कर बच्चों को खिलाती हैं। वहाँ रागी पाउडर के नाम से इसके पैकेट बाजार में बिकते हैं। यह पाउडर मड़ुए के आटे से थोड़ा अलग होता है। इसमें मड़ुए का छिलका निकाल दिया जाता है, जिससे बच्चों को उसे खिलाना सरल हो जाता है। उत्तराखंड में जापान ने हाल ही में मड़ुए से बेबी फूड बनाने का एक संयंत्र लगाया है।
मड़ुआ में फाइबर की मात्रा भी काफी होती है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करता है। मड़ुआ शरीर में संचित अतिरिक्त वसा को भी कम करता है और इस प्रकार इसके सेवन से मोटापे से भी बचा जा सकता है। मड़ुआ शरीर में चीनी यानी शूगर की मात्रा को भी नियंत्रित रखता है, उसे बढऩे नहीं देता और इस प्रकार मधुमेह के रोगियों के लिए यह लाभदायक है। मड़ुआ पाचन तंत्र को भी सशक्त बनाता है। इससे भी मधुमेह से लडऩे में सहायता मिलती है। मड़ुए में उपलब्ध एमिनो एसिड और लाइसिन जैसे तत्व हमारी त्वचा से झुर्रियों को दूर करते हैं और इस प्रकार इसके सेवन से हमारा यौवन भी सुरक्षित रहता है।
मड़ुआ प्राकृतिक लौह का सबसे अच्छा स्रोत है और इसलिए रक्ताल्पता यानी एनिमिया की बीमारी के लिए सबसे अधिक लाभकारी है। मड़ुए का सेवन करने वाले व्यक्ति को कभी सुस्ती नहीं आती और शरीर में हमेशा चुस्ती बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में एनिमिया काफी पाया जाता है जिसे मड़ुए के सेवन से आसानी से दूर किया जा सकता है। पहले ग्रामीण लोग काफी शारीरिक श्रम कर पाते थे, इसका कारण मड़ुआ जैसे अनाजों का नियमित सेवन ही था। आज समय आ गया है कि हम फिर से मड़ुआ जैसे सुपरफूड को अपनाएं। इसके सेवन करने का सबसे अच्छा तरीका है इसकी रोटी खाना। मड़ुए के दो व्यंजनों को बनाने की विधि यहाँ दी जा रही है।
मड़ुआ या रागी की रोटी

सामग्री
मड़ुए का आटा 250 ग्राम, गेहूँ का आटा 100 ग्राम (वैकल्पिक), गुनगुना पानी,  नमक स्वादानुसार,  तेल अथवा घी एक चम्मच
बनाने की विधि
मड़ुए के आटे में नमक मिला लें। एक बर्तन में गुनगुने पानी में इसे अच्छी तरह गूंध लें। मड़ुए के आटे को मक्के के आटे की तरह ही गूंधा जाता है। गूंधे हुए आटे में थोड़ा सा तेल अथवा घी लगा कर थोड़ी देर के लिए ढंक कर रख दें। 15-20 मिनट बाद हाथ से थाप कर इसकी रोटियां बनाकर सेंकें। जिन्हें हाथ से थाप कर रोटियां बनाने में कठिनाई हो वे इसमें थोड़ा सा गेहूँ का आटा मिला कर गूंध सकते हैं। इससे इसकी रोटियां बेली जा सकती हैं।
मड़ुआ की रोटी थोड़ी रूखी होती है, इसलिए इसमें घी लगा कर खाना चाहिए। देसी गाय का घी प्रयोग करना अच्छा रहता है। देसी गाय के घी का सेवन मोटापा और हृदय रोग दोनों में किया जा सकता है।
मड़ुए का हलवा

सामग्री
मड़ुए का आटा – एक कप, घी – एक कप, गुड़ या चीनी – एक कप, दूध – दो कप, इलायची पाउडर – एक छोटा चम्मच, कटे हुए ड्राई फ्रूट इच्छानुसार
विधि
एक कड़ाही या पैन में आधा कप घी को हल्का गरम करें। घी के गर्म हो जाने पर उसमें मड़ुए के आटे को डाल कर धीमी आँच पर भूनें। सोंधी-सोंधी गंध आने पर इसमें ड्राय फ्रूट डाल दें। दो मिनट और भूनने के बाद धीरे-धीरे चलाते हुए दूध डालें। लगातार चलाते रहें ताकि गांठें न पड़ें। दूध के सूखने पर इसमें चीनी अथवा गुड़ को गाढ़ी चाशनी बनाकर डालें। लगातार चलाती रहें। हलवा जितना गाढ़ा हो जाने पर इसमें इलायची पाउडर और बचा हुआ घी डाल दें। गरम गरम परोसें। इसी तरीके से हलवे को थोड़ा सूखा बनाकर इसकी बरफी भी बनाई जा सकती है।

साभार

Comment:

meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano giriş
meritking giriş
meybet
hititbet giriş
hititbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
pokerklas
pokerklas
vdcasino
pokerklas
pokerklas
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meybet
meybet
harbiwin giriş
betnano giriş
norabahis
favorisen giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
meybet
norabahis giriş
norabahis giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
maritbet giriş
maritbet
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet
hititbet
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino
betnano giriş
betoffice giriş
betoffice giriş
hititbet
hititbet
betpark giriş
betpark
betpark
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
hititbet giriş
kavbet giriş
kavbet
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino
vdcasino
timebet giriş
meybet giriş
timebet giriş
meybet giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kavbet giriş
kavbet giriş
betpark giriş
bettilt
norabahis giriş
norabahis
betnano giriş
betnano giriş
bettilt
norabahis giriş
norabahis giriş
bettilt
norabahis giriş
bettilt
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
grandpashabet giriş
ganobet giriş
ganobet giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
betoffice giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
betoffice giriş
betcio giriş
betcio giriş