Categories
इतिहास के पन्नों से

..भारत को आज़ादी मिली तो हमें क्यों आज़ाद नहीं किया गया? ,

माना कि हम अंग्रेज़ों के दुश्मन थे लेकिन ऐसा क्या गुनाह किया था हमारे पुरखों ने कि जब 15 अगस्त 1947 को भारत को आज़ादी मिली तो हमें क्यों आज़ाद नहीं किया गया? जी हां, अंग्रेज़ों के काले क़ानून (क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1871) से मुक्ति मिली तो पूरे पांच वर्ष सोलह दिन बाद 31 अगस्त 1952 को जब अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते (मानव को एक प्रजाति मानने के बजाय अलग-अलग प्रजाति की अवधारणा ख़ारिज किए जाने के कारण) क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट समाप्त कर दिया गया.
बता दें कि पाकिस्तान में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1948 में ही बेअसर कर दिया गया था. जबकि भारत सरकार ने 31 अगस्त 1952 को मजबूरी में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट समाप्त ज़रूर किया किन्तु बड़ी युक्तिपूर्वक इसके स्थान पर हैबिचुअल ऑफेंडर्स एक्ट लागू कर दिया इसका अर्थ यह हुआ कि जो ब्रिटिश विद्रोही समुदाय 1952 तक जन्मजात अपराधी माने जाते थे, वे अब आदतन अपराधी माने जाने लगे.”

ये उद्गार विमुक्त जन अधिकार संगठन के एक कार्यकर्ता का है।

हमने से शायद बहुत कम होंगे जो “विमुक्त” शब्द से परिचित होंगे… और संभवतः क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 1871 के बारे में भी।
यहाँ ज्यादा हम डिटेल में नहीं बताएंगे, आप स्वयं इसका अध्ययन करिये।

देश आजाद हो गया 1947 में ही… लेकिन क्या आज़ाद हुए हम ??
इससे सम्बंधित आप सैकड़ों आर्टिकल पढ़े होंगे.. और उन आर्टिकलों के अपने रिफ्रेंसेस भी हैं .. और इस आज़ादी की कड़ी में जो सबसे ज्यादा बात होती है वो इन्हीं विमुक्त याने पूर्व क्रिमिनल ट्राइब्स की बात होती है..!! विमुक्त माने क्या ?? किस चीज से विमुक्त ??
तो विमुक्त वे जो अंग्रेजों के शासन काल के दौरान जन्मजात क्रिमिनल याने अपराधी थे वे अब विमुक्त हैं… इनके साथ ऐसे सलूक किये गए कि कोई ठिकाना नहीं। आज़ाद भारत होने के पाँच साल बाद तक भी इन्हें क्रिमिनल ही समझते रहे… और जब इस एक्ट को निरस्त किया गया तो इन्हें ‘विमुक्त’ नाम धरा दिया गया.. याने क्रिमिनल से विमुक्त। लेकिन ये विमुक्त क्रिमिनल का ही पर्याय बन के रह गया।

31 अगस्त 1952 को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट को निरस्त किया। उसके स्थान पर 1959 में एक नया कानून “आदतन अपराधी कानून” के नाम से जोड़ दिया गया। मतलब आज़ाद भारत में विमुक्त के साथ साथ आदतन अपराधी का लेवल रह ही गया।
अंग्रेजों के वक़्त करीबन 500 जातियां/जनजातियां इस एक्ट के अंतर्गत थी.. और 1952 में निरस्त के बाद इन्हें अनुसूचित जाति/जनजाति में शामिल होना था लेकिन ये अब तक भी अधिकांशतः नहीं हुए हैं।
“आदतन अपराधी कानून” को हटाने के लिए अब भी विरोध प्रदर्शन होते हैं। क्योंकि इसमें वही शामिल होते हैं जो अंग्रेजों के वक़्त भी थे।

अब यहाँ सबसे इंपोर्टेंट बात बता रहे… इसको जरा ध्यान से पढ़िये
“आपराधिक जनजाति अधिनियम,1871 से पीड़ित उन जनजातियों पर इस कानून के खौफ का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे प्रभावित जनजातियाँ 31 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाती हैं क्योंकि 31 अगस्त, 1952 को ही इस अधिनियम को निरस्त किया गया था|”

अब आप क्या बोलेंगे ??
क्योंकि इनकी संख्या कम नहीं है… मुसलमानों के संख्या के बराबर हैं ये। इनको आप लेशन सिखाएंगे ?? इनको आज़ादी का इतिहास पढ़ाएंगे ?? आप तंज कसेंगे कि हम अपने बच्चों को कौन सा तारीख बताएंगे आज़ादी का ?? 31 अगस्त या 15 अगस्त ?? नहीं नहीं मिम्स बनाओ न आप जम के बनाओ, बनाओगे न ??
इंडियन मेन लैंड में पाँचवी शेड्यूल को ले के आंदोलन होते रहते हैं.. अभी तो बहुत ही तीव्र हो रहा है.. हमारे ही झारखंड और छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में ऐसे भीड़ में कितने जन आगे आये और बोले कि हम नहीं मनाएंगे आज़ादी का जश्न, हम नहीं मानते कि हम 15 अगस्त को आज़ाद हुए .. कोई झंडा नहीं फहरेगा स्कूल में.. डॉट डॉट डॉट.. बाकायदा कहीं-कहीं मास्टरों को पीट दिया गया था। तब ये तंज कसने वाले प्राणी सब किधर थे ?? इनका साफ कहना है कि जिस दिन पाँचवीं अनुसूची लागू होगी उसी दिन हम स्वतंत्र होंगे। और ये जो बोलते हैं न वही आज आज़ादी को ले के तंज कसते नजर आ रहे हैं क्योंकि इनका निशाना कंगना थोड़े न है, निशाना तो मोदिया है। सिंपल।

जब विमुक्त जनजातियां 31 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाती है और एक स्वतंत्रता दिवस अभियो लाइन में है तो किसी के स्वतंत्रता का वर्ष बताने पे तिलमिला क्यों रहे हो ??? उनके भी अपने रेफ्रेंस हैं और पॉइंट्स हैं। उन पॉइंट्स पे बात करो न।
बाकी अपनी-अपनी पिपहरी बजाते रहो।
✍🏻गंगवा, खोपोली से।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark
mavibet giriş
betpark giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
imajbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
imajbet giriş
imajbet güncel
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
safirbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano güncel
betnano güncel giriş
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
bettilt giriş
imajbet güncel
imajbet güncel giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
holiganbet güncel
grandpashabet giriş
safirbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
holiganbet giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş