भारत कौशल विकास अभियान से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

Rojgaarअशोक प्रवृद्ध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबी हटाओ अभियान के तहत विश्व युवा कौशल दिवस 15 जुलाई को स्किल इंडिया मिशन अर्थात भारत कौशल विकास अभियान की शुरुआत कर भारत में युवा कौशल विकास का न केवल शंखनाद कर दिया है बल्कि संसार को इस बात का अहसास करा दिया है कि संसार के विकसित देशों के पास धन तो है लेकिन काम करने वाले कुशल जन नहीं है। भारत उन्हें कौशल विकास कार्यक्रम के तहत करोड़ों युवाओं की फौज उपलब्ध करा सकता है। मेक इन इंडिया की अपनी विचारधारा की प्रधान्मन्त्रो नरेंद्र मोदी पहले ही समस्त संसार में व्याप्ति करा चुके हैंऔर अब भारत कौशल विकास कार्यक्रम के द्वारा एक नवीन कीर्तिमान रचने की तैयारी में हैं ।दूसरी ओरउनके अपने ही देश में उनका मुखर विरोध हो रहा है। नीति आयोग भी राजनीतिक विरोध की जद में है।हालात यह है कि प्रतिपक्ष भारत कौशल विकास अभियान से सम्बंधित नीति आयोग की बैठकोंसे कन्नी काटता नजर आ रहा है।

दरअसल भारत कौशल विकासकार्यक्रम में केन्द्र व राज्य सरकारों के 11 मंत्रालयों- रक्षा, रेल, प्रवासी भारतीय, भारी उद्योग, स्वास्थ्य, रसायन-उर्वरक, इस्पात, कोयला, विद्युत, ऊर्जा व सामाजिक न्याय की सक्रिय व महत्वपूर्ण भागीदारी होगी । इन कार्यक्रमों में 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षण व उद्यमी बनने का अवसर मिलेगा। अपनी इसी इच्छा को अभिव्यक्त करते हुए अभियान का शुभारम्भ करते हुए प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हर कोई पढऩे के बाद नौकरी खोजे । हम चाहते हैं कि लोग कौशल सीखें । देश में 10 करोड़ से ज्यादा युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की जरूरत है ।देश की पहली प्राथमिकता युवाओं के लिये नौकरी का अवसर पैदा करना है। फिलहाल देश में मौजूदा 30 करोड़ लोगों की वर्क फोर्स को स्किल ट्रेनिंग देनी होगी । पांच साल में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और ऋण योजना के तहत 34 लाख प्रशिक्षित बेरोजगारों को कर्ज दिया जायेगा । जैसे चीन ने अपनी पहचान मैन्यूफेक्चरिंग हब के रूप में बनायी है । भारत को मानव संसाधन हब के रूप में विकसित होना है । प्रशिक्षित होने से आमदनी के साथ-साथ युवाओं में आत्मविश्वास आयेगा ।

भारत कौशल विकास अभियान के अंर्तगत 4 अन्य योजनायें राष्ट्रीय दक्षता विकास मिशन, उद्यमिता, प्रधानमंत्री कौशल विकास और प्रशिक्षित कर्ज योजना सम्बद्ध हैं। इस कार्यक्रम की सहभागिता में कई कम्पनियां, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों से निकले युवाओं के लिये दस हजार से अधिक नौकरियों के अवसर देगी। हर युवा को कम से कम 8 हजार रुपयों का रोजगार दिया जायेगा। इस समय देश में 3.5 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो किसी ट्रेड में पूरी तरह कुशल कारीगर हैं।दुनिया में कुशल प्रशिक्षित लोगों के लिये नौकरियों का बहुत बड़ा बाजार है। ऐसे में भारत के प्रशिक्षित लोगों के लिये विदेशों में भी भरपूर अवसर मिलेंगे। इनमें 4-5 करोड़ कुशल कारीगरों को ससम्मान बुलाकर काम दिया जायेगा। भारत युवा देश है और हमें इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ऐसी उत्साहपूर्ण योजनाओं के शुभारम्भ के मध्य देश में पढ़े-लिखे शिक्षित बेरोजगारों की बढती फ़ौज चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर रही है। रोजगार नहीं मिलने की हालत में युवा बेकार घूमते और शहरों व सडक़ों में चोरी, लूटपाट, पर्स-चैन खींचने के अपराध में लग जाते हैं।रोजगार की कमी की स्थिति का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंजीनियर और डाक्टर की योग्यता रखते हुए भी भी युवा चपरासी व चौकीदारी की नौकरियों में भर्ती के लिये उसकी परीक्षा में बैठ रहे हैं। प्रशिक्षित व्यक्ति के साथ इन्साफ व अवसर तभी होगा जब उसे उसकी योग्यता के अनुसार काम मिले। इंजीनियर या डाक्टर को किसी दफ्तर में क्लर्क, चपरासी या चौकीदार बना भी दिया जाये तो न ही योग्यता का उपयोग हुआ और न ही वहसंतुष्टहोगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि अवसर का अर्थ सिर्फ नौकरी ही नहीं हो सकता, लेकिन अवसर का अर्थ सिर्फ कर्ज देना भी नहीं हो सकता। सबकी प्रतिभा एक जैसी नहीं होती।

इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ही रोजग़ार के अवसर भी तेज़ी से बढ़े हैं, लेकिन विश्वविद्यालय जो स्नातक अर्थात ग्रेजुएट्सर तैयार कर रहे हैं वे इंडस्ट्री की ज़रूरतों के अनुरूप नहीं हैं।जिसके कारण अच्छे प्रोफेशनल्स नहीं मिल रहे हैं । हिन्दीभाषी राज्यों से प्रतिवर्ष लाखों ग्रेजुएट्सं निकल रहे हैं, लेकिन इनमें से कुछ हज़ार ही टेक्निकल ग्रेजुएट्सष होते हैं। जबकि कंपनियों को स्किल्ड वर्कफोर्स चाहिए, जो अभी विश्वविद्यालय नहीं दे पा रहे। भारत की 400 कंपनियों पर किए गए एक रिक्रूटमेंट सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है कि 97 फीसदी कंपनियां मानती हैं कि अर्थव्यवस्था बढऩे के साथ रोजग़ार के अवसरों में भी इज़ाफ़ा हुआ है, मगर उस अनुपात में अच्छे प्रोफेशनल्स नहीं मिल पा रहे हैं।सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी ग्रेजुएट्स  किसी भी समस्या को सुलझाने में सफल नहीं हो पाते, उन्हें अपने क्षेत्र की पूरी जानकारी भी नहीं होती।ऐसे में प्रश्न उत्पन्न होता है कि कैसे तैयार होगा कार्य कुशल बल अर्थात स्किल्ड वर्कफोर्स और उन्हें रोजगार कहाँ ?

एनसीईआरटी के वैज्ञानिक अवनीश पांडेय सहित इस क्षेत्र के जानकार कहते हैं कि विश्वविद्यालयों को परंपरागत ढर्रे को छोडक़र व्यावहारिक शिक्षा अर्थात प्रैक्टिकल नॉलेज पर ज़ोर देना होगा। साथ ही इंटर्नशिप और लाइव ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना होगा।तकनीकी बदलावों को अपनाने के साथ ही छात्रों को वाद-विवाद (डिबेट) और सामूहिक चर्चा अर्थात ग्रुप डिस्कशन का प्रशिक्षण देना चाहिए ताकि वे स्वयं को सही तरीके से प्रस्तुत कर सकें। रोजगार के क्षेत्र में वर्षों से नजर रखने वालों का कहना है कि हकीकत में मेरिट का अच्छी नौकरी से ज्यादा लेना-देना नहीं है। वे कहते हैं, सही प्लेसमेंट के लिए स्टूडेंट को मार्केट नॉलेज, संबंधित क्षेत्र की पूरी जानकारी, अर्थव्यवस्था की जानकारी, टीम भावना और मैनेजमेंट स्किल्स होनी चाहिए।कई बार देखने में आता है कि मेरिट वाले स्टूडेंट ज्यादा वक्त किताबों के साथ बिताते हैं जबकि एवरेज स्टूडेंट स्टडी के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान देते हैं, इन खूबियों के कारण उन्हें अधिक नंबर लाने वाले छात्र के मुक़ाबले जल्दी प्लेसमेंट मिल जाता है।

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