सूझ-बूझ भरा पहला मरहम

किसी बीमारी या दुर्घटना के बाद मरीज के लिए पहला घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे ‘गोल्डन अवर’ कहते हैं। इस समय पीडि़त को दिया गया सही उपचार स्थिति को काबू कर लेता है। आंकड़ों की मानें तो देश में 10.1त्न मौतें सही प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण होती हैं। रोजमर्रा होने वाली कई छोटी-बड़ी बातें हैं, जिनमें शुरुआती उपचार में हुई गलती परेशानी बढ़ा देती है। क्या करना सही है, बता रही हैं पूनम महाजन

अंदरूनी चोट लगने पर

क्या न करें: कई बार अचानक ठोकर लगने, कोई भारी सामान गिरने या सीढिय़ों से फिसल जाने के कारण घुटने या टखने की मांसपेशियों में भीतरी चोट लग जाती है, सूजन आ जाती है और दर्द रहता है। कई बार लोग उस हिस्से की गर्म चीज से सिकाई करना शुरू कर देते हैं। ऐसा न करें। इससे रक्त संचार तेज हो जाता है और सूजन बढ़ जाती है।

क्या करें: ऐसी स्थिति में उस हिस्से की बर्फ से सिकाई करें। बर्फ की सिकाई से सूजन भी कम होगी और दर्द में भी राहत मिलेगी।

शरीर दर्द

क्या न करें:  अक्सर हम दर्द होने पर एस्प्रिन व आईब्रूफेन ले लेते हैं। ये दवाएं वास्तविक मर्ज पर असर नहीं करतीं, बस दर्द के एहसास को कम कर देती हैं। हर स्थिति के लिए दर्द की दवा भी अलग होती है। खुद से दवा लेते रहना  हालत को गंभीर बना सकता है। लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के दवाएं लेना अन्य अंगों पर भी बुरा असर डालता है।

क्या करें:  दर्द होने पर बाम से मालिश करें। ऐसा करते समय शरीर से दर्द निवारक एंडोफ्रिन का स्राव होता है और दर्द में राहत मिलती है। आराम न मिलने पर डॉक्टर से संपर्क करें।  कटने या घाव होने पर

क्या न करें :  अक्सर चोट लगने पर खून को रोकने के लिए उस हिस्से को दबा देते हैं या फिर कपड़े व पट्टी से कस कर बांध देते हैं।  ऐसा करने से चोट वाली जगह पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या करें:  अगर चोट लगी है और बहुत खून बह रहा है तो  सबसे पहले कटे हुए भाग को पानी के नल के नीचे ले जाएं। ऐसा करने से खून तो रुकता ही है, साथ ही किटाणु भी निकल जाते हैं। खून न रुक रहा हो तो पानी के बहाव को तेज कर दें, इससे रक्त का बहाव रुक जाएगा। अधिक बड़ा घाव होने पर उसे पानी से साफ करके आइस पैक लगाएं, खून रुक जाएगा। इसके बाद ही एंटीबायोटिक क्रीम लगा कर पट्टी बांधें। ध्यान रहे, पट्टी बहुत कसी हुई नहीं, बल्कि हल्की बंधी होनी चाहिए। हवा लगने से जख्म जल्दी ठीक होता है।

सडक़ दुर्घटना

क्या न करें: एक्सीडेंट की स्थिति में अक्सर लोग घबरा जाते हैं। खुद शांत रहें और पीडि़त को भी शांत रहने दें। स्थिति देख कर फैसला लें। समय खराब न करें।

क्या करें: एक्सीडेंट में ज्यादातर मौतें सांस में अवरोध आने की वजह से होती हैं, इसलिए सबसे पहले नाक और मुंह के आगे हाथ करके मरीज की सांस की गति को देखें। अगर सांस धीमे चल रही है तो देख लें कि कहीं कुछ फंसा न हो। आर्टिफिशियल ब्रीदिंग के जरिए ऑक्सीजन भी दे सकते हैं। फिर उसके हाथ, पैर, सिर को हिला कर देखें। शीघ्र एंबुलेंस बुलाएं।

आंख में कचरा जाना या खुजली होना

क्या न करें: आंख में कचरा चले जाने पर खुजली करने की इच्छा होती है। ऐसी स्थिति में आंखों को रगडऩा नहीं चाहिए। इससे कचरा और अंदर जा सकता है। साथ ही संक्रमण अधिक फैल सकता है।

क्या करें:  आंखों को तुरंत ठंडे पानी से धोएं। ऐसा करने से कचरा निकल जाएगा और संक्रमण फैलेगा नहीं। उसके बाद भी अगर आंख में लाली व दर्द देर तक बने हुए हैं तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

हार्ट अटैक व स्ट्रोक

क्या न करें: हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने की स्थिति में अक्सर लोग विशेष अस्पताल में जाने की हड़बड़ाहट में शुरुआती एक घंटा गंवा देते हैं, खासकर हार्ट अटैक व स्ट्रोक में शुरुआती उपचार न मिल पाना स्थिति को गंभीर बना देता है।

क्या करें: यदि आप किसी आपातकालीन स्थिति में फंस जाएं तो स्वयं या किसी की मदद द्वारा सबसे पहले एमरजेंसी नंबर पर फोन करके एंबुलेंस बुलवाएं या हो सके तो स्वयं ही नजदीकी अस्पताल पहुंच जाएं। हार्ट अटैक में मरीज के मुंह में 300 एमजी वॉटर सॉल्यूबल एस्प्रिन रख दें, यह खून को पतला करने का काम करती है। यदि एस्प्रिन नहीं है तो डिस्प्रिन भी रख सकते हैं। वैसे हृदय रोगियों को नाइट्रोग्लिसरीन की गोली हमेशा साथ रखनी चाहिए।

स्ट्रोक की स्थिति इससे अलग है। इसमें व्यक्ति का हाथ, पैर या मुंह थोड़ा मुडऩे लगता है। ऐसी स्थिति में एस्प्रिन या डिस्प्रिन नहीं देनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके, व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

जलने पर

क्या न करें: कई बार लोग आग की चपेट में आए व्यक्ति को कंबल से ढक कर आग बुझाने के बाद भी उसे कपड़े से लपेटे रखते हैं।  ऐसा करने से कपड़ा जले भाग से चिपक सकता है। जलने पर मक्खन या बर्फ न लगाएं।

क्या करें: जले भाग पर पानी डालें। जले हुए हिस्से को 20-25 मिनट तक पानी के नीचे रखें। ऐसा करने से आग के कारण शरीर में गई ऊष्मा के अंदरूनी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने की आशंका कम हो जाती है और त्वचा पर गहरा दाग भी नहीं पड़ता।

दौरा पडऩा

क्या न करें: एक सामान्य अवधारणा है कि दौरा पडऩे पर मरीज के मुंह में चम्मच, कपड़ा या पेंसिल फंसा दें, ताकि वह अपनी जीभ न काट ले। कुछ लोग जूता भी  सुंघाते हैं। ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए। मरीज के मुंह में कपड़ा फंसाने से उसे सांस लेने में तकलीफ होगी, साथ ही जो वस्तु मुंह में रखी है, उसके गले में फंसने की आशंका भी बढ़ जाती है।

क्या करें: दौरा सीमित समय के लिए होता है। ऐसी हालत में सबसे पहले साथ वाले व्यक्ति को अपना धैर्य बनाए रखना चाहिए। मरीज को पानी, आग, धारदार वस्तु, सीढ़ी या अन्य कोई वस्तु जो नुकसान पहुंचा सकती है, उससे दूर रख कर खुली जगह पर लिटा देना चाहिए।

मरीज के मुंह में कपड़ा नहीं फंसाना चाहिए। ऑक्सीजन का प्रवाह ठीक होने से स्थिति जल्दी सामान्य हो जाती है। मरीज को करवट लेकर लिटाएं। दौरा 3 मिनट से अधिक होने पर तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। अगर व्यक्ति की सांस चलती हुई महसूस नहीं हो रही है तो उस स्थिति में अपनी हथेली से व्यक्ति की छाती पर दबाव दें। हथेली के अंतिम भाग को छाती के बीच में रखें। फिर दूसरे हाथ को पहले हाथ पर रख कर एक मिनट में 100 से अधिक दबाव दें।

गलती से जहरीला पदार्थ खा लेना

क्या न करें: यदि आपके परिवार के किसी सदस्य ने गलती से कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है तो खुद डॉक्टर बन कर व्यक्ति को किसी तरह का सिरप पीने के लिए न दें।

क्या करें:  मरीज को बहुत सारा नमक वाला पानी पिला कर उल्टी करवाने की कोशिश करें। फिर तुरंत डॉक्टर को बुला लें या उपचार सेंटर पर संपर्क करें। जहर ज्यादा हो तो स्थिति को नजरअंदाज न करें, तुरंत अस्पताल ले जाएं।

पैनिक अटैक

क्या न करें: दूसरे को पैनिक में देख कर आप पैनिक में न आएं। अपना अंदाजा लगाने से बेहतर है मरीज से ही पूछ लें कि वह क्या चाह रहा है।

क्या करें:  सबसे पहले व्यक्ति को एकांत जगह पर ले जाकर शांत करने की कोशिश करें।

उसका ध्यान श्वास गति की तरफ केंद्रित करवाएं। फिर मरीज को कोई थका देने वाली एक्टिविटी जैसे हाथों को ऊपर उठाकर  रखने या किसी काम में व्यस्त करने की कोशिश करें। श्वास गति नियंत्रित होने दें।

नकसीर फूटने पर

क्या न करें: गर्मियों में नाक से खून बहने लगता है। ऐसा तेज धूप लगने, उच्च रक्तचाप या नाक में किसी तरह का संक्रमण होने से होता है। इस स्थिति में लोग सिर पीछे की तरफ झुका कर बैठ जाते हैं। इससे खून आना बंद नहीं होता, साथ ही उसके गले के रास्ते सांस की नली में जाने की आशंका बढ़ जाती है, जो खतरनाक हो सकता है।

क्या करें: अपने सिर को सीधा रखें और अंगूठे व उंगली से नाक के दोनों नथुनों को बंद कर लें। ऐसा कम से कम 15 मिनट तक करें और मुंह से सांस लें। सिर पर ठंडा पानी डालें। यदि खून बंद नहीं हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

घर में जरूर रखें

सिरदर्द, सर्दी-जुकाम, हाथ-पैर व कमर दर्द के लिए बाम।

चोट पर लगाने के लिए एंटीसेप्टिक ट्यूब।

पट्टी, एडहेसिव बैंडेज, छोटी कैंची और स्टिकिंग प्लास्टर।

खून बहने से रोकने के लिए सॉल्यूशन।

त्वचा के लिए एंटी फंगल क्रीम, एलोविरा जैल, जले पर लगाए जाने वाली दवा।

दर्द निवारक दवाएं। ये दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही किट में रखें और इमरजेंसी में ही लें।

डिस्पोजेबल ग्लव्ज, पॉकेट मास्क, एंटीसेप्टिक वाइप्स (पट्टी), थर्मामीटर व हाथ धोने का साबुन।

बाहर का खाना व अधिक चिकनाईयुक्त खाने से अक्सर पेट दर्द, मरोड़, कब्ज, गैस, बदहजमी जैसी तकलीफें होती हैं। इनके लिए हाजमा करने वाली दवाएं व चूर्ण रखें।

डायरिया व डीहाइड्रेशन से राहत पाने के लिए इलेक्ट्रॉल का पैकेट।

विशेषज्ञ: डॉ. मनीषा अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट से बातचीत पर आधारित।

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