Categories
आज का चिंतन

————– कहु सीता बिधि भा प्रतिकूला

  • विमल कुमार परिमल

भारतीय संस्कृति की निर्माण-प्रक्रिया में रामकथा की लोकप्रियता और जनस्वीकार्यता एक महत्वपूर्ण अवयव है. इसी तरह रामकथा के विकास में सीता की अहम भूमिका है. सर्वोत्तम गुण सम्पन्न नारी के पर्याय के रूप में सीता का नाम आता है. यह अलग बात है कि लोकप्रचलित रामकथा में राम का नायकत्व अधिक प्रभावी है. राम ही पुरुषोत्तम हैं, शील, शक्ति, सौन्दर्य के प्रतीक हैं, मर्यादा के शिखर हैं. तुलसीदास के राम तो भगवान हैं ‘जेहि मंह आदि मध्य अवसाना, प्रभु प्रतिपाद्य राम भगवाना.’ सामान्यतः सीता चरित्र राम के ऐश्वर्य का सहायक तत्व है. पर सूक्ष्म विवेचन में सीता का मानवीय गुण राम से कहीं कमतर नहीं बल्कि अधिक ही है. डॉ सुरेन्द्रनाथ दीक्षित का चर्चित आलेख ‘दुख ओढ़े सो होय राम’ पढते समय सीता का दुख समानांतर खड़ा अनुभव होता रहता है. दोनों महान के दुखों की तुलना करने पर सीता के दुख अधिक करुण हैं. संस्कृत के सिद्ध साहित्यकार नाटककार भवभूति की अनुपम कृति ‘उत्तर रामचरित’ का मुख्य रस या स्थायी रस करुणरस है. इस करुण रस का आधार सीता का चरित्र है.
रामकथा की कुछ घटनाओं पर विचार होना चाहिए. राम को दो बार राजघर से बाहर जाना पड़ा था. एक बार विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए और दूसरी बार पिता की आज्ञा पालन करने के लिए चौदह वर्ष की समय सीमा के साथ. राम की पहली यात्रा में मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र और अनुज लक्ष्मण साथ थे. उस यात्रा की वापसी में पिता, पत्नी के साथ अयोध्या का बड़ा समाज भी था. राम की दूसरी यात्रा में जाते समय पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण साथ थे और चौदह वर्ष बाद वापसी में पत्नी, भाई और किष्किन्धा तथा लंका का समाज भी साथ था. अयोध्या राजघर से सीता का भी दो बार बाहर निकलना हुआ था. पहली बार जब सीता का स्वरुचि-अनुसार पत्नी-धर्म रक्षार्थ अयोध्या से निकलना हुआ था तो पति राम और देवर लक्ष्मण साथ थे. यानि राम की दूसरी यात्रा सीता की पहली यात्रा थी. सीता का दूसरा बहिर्गमन इतिहास का इतना दारुण हिस्सा है कि गोस्वामी तुलसीदास ने इस घटना की चर्चा ही नहीं की है. सिर्फ प्रसंगवश एक जगह उन्होंने लिख दिया ‘सीता कै अति बिपति बिसाला’. अर्थात दूसरी बार सीता को राजमहल से निकाला गया था. वह भी तब जब सीता गर्भवती थी. लांछन यह कि सीता कुलटा थी. लांछन लगाने वाली अयोध्या की प्रजा थी और उस पर कार्रवाई करने वाले स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम थे.
रामकथा की कुछ परिस्थितियों पर ध्यान देना अपेक्षित है. राजा दशरथ ने जब राम को चौदह वर्ष का वनवास दिया था ( तापस वेष बिसेषि उदासी, चौदह बरिस रामु बनवासी) तो सिर्फ राम को दिया था. पत्नी-धर्म और अटूट प्रेम के कारण सीता जी राम के साथ वन जाने को तैयार हो गयी थी कि जंगल में राम के किसी कष्ट को दूर करने का प्रयास किया जायेगा. ऐसा हुआ भी कि जंगल- जीवन की सारी परेशानियों, कठिनाइयों को सीता बांटती रही. इसी क्रम में ऐसा समय आया जब सीता का रावण द्वारा अपहरण कर लिया गया. लगभग दो वर्षों तक सीता लंका में कैद रही. राम ने अपने पराक्रम से रावण को मार कर, लंका पर विजय कर सीता को पुनः प्राप्त किया था. इस बीच राम और सीता दोनों ने अपार दुख झेला था जिसमें सीता का दुख राम से बड़ा था. जैसे राम स्वतंत्र थे सीता परतंत्र थी, राम अपने बंधु मित्रों के साथ थे सीता अकेली थी, मनोविज्ञान है बिरह की पीड़ा पुरुष से अधिक स्त्री झेलती है, राम उन्मुक्त वातावरण में थे सीता भय और त्रासदी के वातावरण में थी. ऐसी कई परिस्थितियां थीं जिसमें सीता अधिक विवश थी. सबसे दारुण त्रासदी थी जब राम ने सीता को अपनाने से पूर्व उनकी अग्नि परीक्षा ली थी. विश्वास की इस अग्निपरीक्षा के बाद सीता का व्यक्तित्व राम से बड़ा हो जाता है.
राम के राज्याभिषेक के कुछ दिनों बाद प्रजा के मंतव्य का संज्ञान लेते हुए राम के आदेश पर लक्ष्मण द्वारा गर्भवती सीता को बीच जंगल में ले जाकर छोड़ देना एक मर्माहत करने वाली घटना है जो शब्दों के माध्यम से नहीं भाव से समझा जा सकता है. यह
सुसंयोग था कि ऐसी विकट परिस्थिति में सीता को महर्षि वाल्मीकि का सान्निध्य मिल गया. वाल्मीकि मुनि के आश्रम में ही सीता ने दो जुड़वे बच्चों को जन्म दिया जो आगे चलकर लव और कुश नाम से सुप्रसिद्ध हुए. सीता की ममता और वाल्मीकि के आशीर्वाद की छाया में लव-कुश का लालन-पालन हुआ और दोनों को समुचित शिक्षा-दीक्षा दी गयी. कालांतर में वाल्मीकि द्वारा राम के समक्ष सीता की सच्चरित्रता का प्रमाण दिया गया. राम संतुष्ट हुए और सीता को अपनाने को तैयार हो गये पर तबतक काफी बिलम्ब हो चुका था. इतना कष्ट झेल लेने के बाद का सुख शायद सीता बर्दाश्त करने के लायक नहीं थी. उसे सिर्फ कलंक से मुक्ति चाहिए थी जो मिल चुकी थी महर्षि वाल्मीकि की कृपा से. सीता अपने दोनों पुत्रों को राम को सौंप देती है और धरती की बेटी सीता धरती में विलीन हो जाती है.
सीता तो विलीन हो गयी पर विपत्ति के समय में उन्होंने जिस चरित्र का परिचय दिया वह सदा के लिए मर्यादा का प्रतिमान हो गया. यथा किसी हालात में संस्कार से समझौता नहीं करना, अपने कर्तव्य के प्रति सचेत रहना, कभी अपनों से और अपनों के प्रति कोई शिकायत नहीं करना, महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहते हुए अपना परिचय और कलंक को उद्घाटित नहीं करते हुए राम की मर्यादा की रक्षा करना, लवकुश को शस्त्र और शास्त्र में राम जैसा बनाना, अंत तक राम के प्रति बिना किसी शिकायत के श्रद्धा, विश्वास और प्रेम का भाव रखना आदि कई ऐसे चरित्र को जी कर सीता राम से आगे निकल जाती है. आज भी सम्पूर्ण नारी जगत के लिए सीता चरित्र अनुकरणीय है अगर मनन करें तो.थोड़ा संकट आता है, थोड़ी परेशानी होती है और लोग शिकायतों से भर जातें हैं. अपने भीतर शिकायत का भाव न आना एक सिद्ध स्थिति है, स्थितप्रज्ञता है, प्रकृति से एकाकार होना है, विधि की बिडम्बना को स्वीकारना है. सीता को ऐसी ही सिद्धि प्राप्त थी.

*अवकाश प्राप्त राजभाषा अधिकारी,
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
सीतामढ़ी (बिहार)
मोबाइल 9973360721

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betsat giriş
betpark giriş
betpark giriş
cratosroyalbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betsat giriş
betsat giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betsat giriş
betsat giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş