नर्मदा जल को अमृत जल योजना के नाम पर बेचने आयी कंपनियां

narmada-jal

 

आत्माराम यादव पीव
मध्यप्रदेश सरकार मानती है कि नर्मदा का जल अमृत है। धरती की कोख से शीतलजल देने वाले कुयें,बाबडिया,टयूबबेल सभी एक राजनैतिक षड़यंत्र के तहत भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गये। अब धरती के सारे जलस्त्रोतों को बंद कर प्रदेश में नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों के जल को घर-घर पहुॅचाने ंके लिये करोड़ों रूपये के पूर्व संसाधनों को बंद कर अरबों रूपये की यह योजना अमृत जल के नाम से चालू कर भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। नये नल कनेक्शनों को बंद कर नये पाईप लाईन के रूप में घटिया पाईप लाईन बिछाकर घरों में मीटर देकर नाप-तौल कर पानी देने एवं वर्तमान जलकर राशि 50-100 रूप्ये प्रतिमाह की जगह अब 4-5 सौ रूपये प्रतिमाह लेने की तैयारी है। मजे की बात यह है कि यह राशि आपके नगरपालिकाओं-नगरनिगमों के खाते में नहीं जायेगी, यह सब बाहर से आने वाली कम्पनियों को लाभ पहुॅचाने के लिये की गयी है। ये कम्पनियाॅ बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की तर्ज पर होगी जो पहले नगरपालिकाओं में एक खिड़की से शुरूआत करेगी फिर एक कमरे में, फिर एक बडे आफिस में, फिर अलग जल विभाग के नाम पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लेगी। हमने तीन साल पहले ही होशंगाबाद जिले के लोगों को आगाह किया था किन्तु यह नासमिटे पत्रकारों की खोपड़ी में नगर के लोगों के हित दिखते ही नहीं, विज्ञापनों के टुकड़ों के आगे ये लोग जनता के हितों का सौदा करने में अग्रणी हो गये है, वर्ना इन्हें चाहिये था कि जनता को वास्तविकता से अवगत कराते, लेकिन इस एक पक्षीय पत्रकारिता ने जनता को कब्र में पहुॅचाने का काम किया है। माॅ नर्मदे से ही हम प्रार्थना करते है कि वे अपने बच्चों का ध्यान रखे।
माॅ रेवा, आप पापनाशिनी हो, पतितपावन हो, वंदनीय हो,, पूजनीय हो, जगत के सभी तीर्थो का पुण्यलाभ आपके जल से प्राप्त होता है इसलिये जीवनदायिनी होने से इस प्रदेश की जीवनरेखा भी हो। आपका पवित्र जल देवों के शीष पर चढ़ता है और लाखों लोग पैदल काबड़यात्रा कर उस जल से महादेव का पावन अभिषेक कर पुण्यभागी बनते है। माॅ आपका ही पुण्यप्रताप है कि आपके तट के दोनों ओर 10-20 किलोमीटर दूर तक कुये-बाबड़ी और टयूबबेल का जल धरती की सतह के कुछ मीटर पर लबालब रहता है। आपकी गोद में पले-बढ़े शिवराज जी ने प्रदेश का भार संभाला तो कई जिलों में जलसंकट होने पर आपसे याचना कर आपके जल को भोपाल, इन्दौर सहित उज्जैन के लाखों लोगों की प्यास बुझाई और सूख चुकी छिप्रा-खान नदी को तृप्त कर अपनी सरकार का खजाना भी भरा है। होशंगाबाद नगर में नगरपालिका द्वारा नगर के विभिन्न वार्डो में अब तक 89 हैण्डपंपों, 76 टयूबबलों एवं 5 कुओं खोदकर पर्याप्त जल की सुविधा नगरजनों को उपलब्ध करायी गयी जिसमंें करोड़ों रूपये खर्च कर प्रत्येक स्थानपर मोटरें लगवायी,पूरे नगर में पाईपलाईन बिछायी और प्रत्येक दिन सुबह-शाम दो घन्टे जल की आपूर्ति बिना किसी जल संकट के अब तक की जाती रही है। अगर कहीं इन पुराने जलआपूर्ति संसाधनों में कमी बगैरह की स्थित रही तो पर्याप्त राशि खर्च कर उन कमियों को पूरा किया गया लेकिन कभी भी शहर में ऐसे हालात नहीं बने कि पुराने जलसंसाधनों के कारण जल की आपूर्ति प्रभावित हुई हो और नागरिक परेशान रहे हो।में जनता के करोड़ों रूपये की मोटर लगाकर, शहर में पाईपलाईन बिछाकर सुबह-शाम दो-दो घन्टे भरपूर जल आपूर्ति हो रही हो और नगर में जल संकट की स्थिति दूर तक न हो तब पुराने जलआपूर्ति संसाधनों का कायाकल्प करने की बजाय उसे बंद करके अब तक 60 रूपये प्रतिमाह जलकर की जगह अमृत परियोजना के तहत दुबारा नये कनेक्शन के नाम पर 2500 रूपये वसूलकर प्रतिमाह 300 रूपया जलकर वसूलने को तत्पर है इस प्रकार जनता से 800गुना जलकर की वसूली होगी और पुराने कनेक्शन के जमा पैसे की बात न कर उसे हजम कर जनता के पैसों की खुली लूट है। नलांें में पानी के मीटर लगाकर नापतौल के आपूर्ति करना, न चाहते हुये भी लोगों को घर-घर नर्मदा जल पहुॅचाना, क्या यह जबरिया दमदारीदिखाकर जनता से खुली लूट नहीं है। हे माॅ रेवा, नगर का हर नागरिक आपका बच्चा हैॅ और वह पूरी श्रद्धा और विश्वास से नर्मदा जी की पूजन-अर्चन करता है तब वह अमृतमयी नर्मदा जल को शौच-निवृत्त आदि के उपयोग में कैसे और क्यों लायेगा? क्या यह नर्मदाजल का अपमान नहीं है? अगर स्वयं के स्वार्थवश नर्मदा का अत्यधिक दोहन करने लग जाये तो स्वच्छ जल बनने की प्रक्रिया ध्वस्त नहीं होगी। जिले में पर्याप्त जल है,भरपूर खाद्यान्न उत्पादित हो रहा है,कलेक्टर सालाना कृषिकर्मण पुरूष्कार ला रहे हो तब इस जिले में कौन सी लाचारी आ गयी और कौन सा पहाड़ टूट पड़ा कि भरपूर जल व्यवस्था के संसाधनों को दुरूस्त करने की बजाय उसे बंद कर नई जलनीति के तहत अमृतयोजना से नर्मदा के पावन जल को घर-घर पहुॅचाये,क्या यह नगरपालिका परषिद सहित राज्य सरकार की गहरी असफलता नहीं, तो ओर क्या है।
हे माॅ नर्मदे, इतिहास गवाह है कि 17 मई 1867 को नगरपालिका होशंगाबाद की स्थापना हुई थी और 1869 में आपके सेठानीघाट स्थित तिलकभवन से इस परिषद के प्रथम अध्यक्ष के रूप में कर्नल जे.वी.डेनीज ने नगर की व्यवस्था का संचालन शुरू किया और आजादी मिलने तक 6 अग्रेज इस पद पर काबिज रहे। आजादी के बाद इस नगर के पं.सुखदेव, मुंशी बेनी प्रसाद, रायबहादुर कालीदास चोधरी, जगन्नाथ प्रसाद मिश्रा, लाला भगवती प्रसाद,जगन्नाथ प्रसाद मिश्रा, डी.एस.बी.पण्डित , जुगलकिशोर दीक्षित, सीताचरण दीवान बहादुर वकील, पं.वी.जी.हर्णे, उपेन्द्रशंकर प्रसाद द्विवेदी, नाथूराम भारद्धाज,रामकिशोर दीक्षित, बाबूलाल फौजदार, कैलाशचन्द्र दुबे, जिनवरराम फौजदार,श्रीराम राठौर,गिरिजाशंकर शर्मा,कैलाशचंद दुबे,श्रीमति सुशीला तिवारी,श्रीमति मीनावर्मा, अवधबिहारी गौर, डाक्टर नरेन्द्र पाण्डे नगरपालिका परिषद होशंगाबाद के अध्यक्ष रहे पर किसी ने कभी नर्मदाजल का कारोबार नगरजनों से नहीं किया और न उन्होंने नर्मदाजल को उत्पाद समझ कर उसकी कीमत लगायी और न नागरिकों को उपभोक्ता समझकर उन्हें नर्मदाजल बेचने की हिमाकत की। नगरपालिका परिषद होशंगाबाद के 150 साल पूरे होने के बाद इस परिषद की अध्यक्ष बनी श्रीमति माया नारोलिया ने नगरवासियों को विश्वास में लिये बिना मुम्बई की कम्पनी के हाथों नर्मदा जल का सौदा करके नर्मदा जल का व्यवसाय नगरजनों के साथ करके खुदका लाभ देखा और पूरे नगर का अहित किया। माया नारोलिया के कदमों पर आगे बढ़ते हुये वर्तमान नपाध्यक्ष अखिलेश खण्डेलवाल ताकत के साथ अमृत परियोजना को लागू करने पर अमादा है जबकि वे नर्मदापुत्र होने का दंभ रखते हुये नर्मदा को स्वच्छ,सुचिता,एवं गंदगीमुक्त करने हेतु मिलने वाले नालों-नालियों को नर्मदाजल में न मिलने की सौगन्ध उठाकर जूते-चप्पल का परित्याग किये है।
होशंगाबाद के नगरजनों को अगर अमृतयोजना के तहत नर्मदा जल थोप रहे है तो नगरजनों को भी यह जानने का हक है कि नर्मदापुत्र अखिलेश खण्डेलवाल जी नगरपालिका परिषद होशंगाबाद के अध्यक्ष रहे श्री बाबूलाल फौजदार के कार्यकाल से शुरू करते हुये उनके स्वयं के कार्यकाल तक तक नागरिकों को जल आपूर्ति हेतु खोदे गये टयुबबेलों-हैण्डपंपांें, जल प्रदाय हेतु खरीदी गयी मोटरों, मोटरों पर किये गये रिपेयरिंग खर्च, शहर में बिछायी गयी पाईपलाईन पर व्यय, सड़कों की खुदाई करके बिछायी गयी पाईप लाईन खर्च, पाईपलाईन बिछाने के बाद सड़क मरम्मत पर किये गये खर्च का प्रत्येक वर्ष का सम्पूर्ण ब्यौरा तथा इस पुरानी जल आपूर्ति व्यवस्था के बंद होने से होने वाले सम्पूर्ण नुकसान को नगरजनों के समक्ष सार्वजनिक करें तथा अमृतपरियोजना चालू करने पर क्या नर्मदा जल नगरजनांें को स्वीकार है या नहीं इस पर नगर के हर आम नागरिक से समर्थन प्राप्त करें। अमृत परियोजना के तहत 18 करोड़ की यह योजना समय पर पूरी न करने के कारण 46 करोड़ की हो गयी, समयावधि में कार्य पूरा न कराने के दोषी हर जिम्मेदारं से इसकी वसूली हो। यह भी स्पष्ट हो कि जिन घरों में खुदके टयूबबेल-हेण्डपंप लगे है क्या उन्हें बंद किया जाकर वहाॅ भी मीटर लगाकर उनके निजी संसाधन समाप्त किये जायेंगे। जिस मकान के मालिक आप हो,क्या उस मकान के नीचे जल के मालिक आप होंगे या कम्पनी को आपकी जमीन के नीचे के जल का मालिकाना हक होगा? नर्मदा जल किस सीमा तक बेचने की अनुमति दी गयी है, इसके लिये 18 करोड़ की योजना को 46 करोड़ करने के षड़यंत्र में भ्रष्टाचार करके किसने कितना पैसा बनाया/ है, क्या अमृतजल परियोजना का संचालन नगरपालिका करेगी या बाहर से आकर कोई कम्पनी इसके आफिस का संचालन कर वसूली करेंगी? उक्त कम्पनी से किये गये अनुबन्ध आदि को जनता के सामने सार्वजनिक कर नर्मदाजल के लिये बनायी गयी टंकियों-पाईपलाईन पर किये गये खर्च का पूर्ण ब्यौरा, सड़को को खोदकर पाईपलाईन डाले जाने और सड़कों की रिपोयरिंग का ब्यौरा भी नगरजनों को जानने का अधिकार है, नगरजनों को उपरोक्तानुसार प्रत्येक वर्ष का खर्च का मदबार ब्यौरा का एक श्वेतपत्र से जबाब मिलना चाहिये ताकि वे यह भी जान-समझ सके कि एक पूर्णरूपेण सक्षम,सुचारू जल आपूर्ति व्यवस्था को निजी स्वार्थो के रहते कैसे नष्ट कर नयी व्यवस्था चालू करने में,दोनों ही अवस्था में नगरजनों केे घर अन्धेरा कर स्वयं के घर को कैसे जगमन किया जाता है। माॅ आपकी कृपा होशंगाबाद के प्रत्येक नागरिक पर बनी रहे और उन्हें जबरिया अमृतपरियोजना के तहत नर्मदाजल खरीदना न पड़़े ,ऐसी कृपा इस नगर पर कर दो माॅ, ताकि नर्मदाजल का मान बना रहे और नर्मदाजल बेचकर कारोबार करने वालों को माॅ आप ही उचित दण्ड दे।

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