संतुलित विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

images (38)

कलराज मिश्र

जैसे-जैसे हम भौतिकता की अंधी दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे आपदाओं को निमंत्रण देने लगे हैं। अभी कोविड के जिस भयावह दौर को हम सभी झेल रहे हैं उसके मूल में भी विकास की उपभोक्तावादी सोच ही प्रमुख है। याद रखें, प्रकृति और जीवन की उपेक्षा कर विकास को गति देने के प्रयास जब भी हुए हैं, उसका खमियाजा पूरी मानव जाति का भोगना पड़ा है। विश्वव्यापी महामारी के इस दौर में हमें विकास के साथ प्रकृति संरक्षण की हमारी सनातन भारतीय दृष्टि पर फिर से विचार करने की जरूरत है।

पर्यावरण का अर्थ ही है वह परिवृत्ति जो मनुष्य को चारों ओर से घेरे हुए है। इसी से जीवन पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। यह घेरा असंतुलित होता है, उसका परिणाम किसी आपदा के रूप में दिखाई देता है। वनों के विनाश ने पर्यावरण को सर्वाधिक बिगाड़ा है। पहले तौकते और इसके बाद यास चक्रवाती तूफान पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं देने का ही परिणाम है। महामारी के दौर में ऑक्सिजन की कमी एक बड़ी समस्या रही। वैसे मेडिकल ऑक्सिजन का उत्पादन और उसकी सप्लाई एक अलग मसला है, लेकिन यह सच भी अपनी जगह है ही कि सामान्य समय में हम ऑक्सिजन को लेकर कभी सतर्क नहीं रहे। पेड़-पौधे ऑक्सिजन का बड़ा स्रोत हैं, पर उपभोक्तावादी सोच के प्रभाव में पेड़ काटकर घरों में सुंदरता लाने का प्रयास किया जाता रहा है। हालांकि धरती का असली शृंगार ही ये पेड़-पौधे हैं। पेड़ कटने का अर्थ है, पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का गड़बड़ाना।

कितने पक्षियों, जीव-जंतुओं का पेड़ों पर बसेरा होता है। यह जो जैव विविधता है, उसी से प्रकृति संतुलित रहती है। पक्षियों को बसेरा देने वाले पेड़ और अधिक वृक्ष उगाते हैं। मैंने इसे स्वयं अनुभूत किया है। वृक्षों की बहुत सी ऐसी प्रजातियां हैं जो पक्षियों के पेट से निकले बीजों से पनपती हैं। हमारी संस्कृति में इसीलिए तो पेड़ों को पूजने की परंपरा रही है।

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है। मरुस्थल में लोगों को सदा सहारा देने वाला यह कल्प वृक्ष कहा जाता है। राजस्थान ही नहीं, देशभर में शमी वृक्ष के रूप में इसे पूजने की परंपरा है। हमसे अधिक समझदार हमारी वह पुरानी पीढ़ी रही है जिसने खेजड़ी को कटने से रोकने के लिए अपने जीवन तक का बलिदान कर दिया। अमृता देवी के नेतृत्व में खेजड़ली में पेड़ों के लिए हुआ बलिदान वृक्ष संस्कृति में समाई हमारी प्रकृति संरक्षण से जुड़ी सोच का सबसे बड़ा प्रमाण है।

हमारे यहां वन महोत्सव की शुरुआत सबसे पहले के.एम. मुंशी ने की। कल पर्यावरण दिवस है। तब देश आजाद हुआ ही था और वह उस समय खाद्य तथा कृषि मंत्री बने थे। उन्होंने सबसे पहले पेड़ों के महत्व को समझते हुए नैनीताल में 1950 में पौधे लगाकर वन महोत्सव की शुरुआत की। इसके अगले साल 1951 में वह हमारे राजस्थान आए और यहां के रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने के लिए जोधपुर में नर्सरी का उद‌्घाटन किया। वन महोत्सव की परंपरा आज भी चली आ रही है, परंतु यह पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि धरती पर रहने वाला हरेक व्यक्ति पेड़ लगाए, उसका संरक्षण करे। हमें हमारी जरूरतों को कम करना होगा। यह समझना होगा कि धरती केवल हमारे रहने के लिए. ही नहीं है। यह उन असंख्य जैव-अजैव पदार्थों, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के लिए भी है, जिनसे हमारा यह पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रहता है।

वनस्पतियां नष्ट होने का अर्थ ही है, हमारी जैव विविधता का नष्ट होना और इसी से पर्यावरण में असंतुलन पैदा होता है, महामारियां बढ़ती हैं। इसलिए जरूरी है, हम प्रकृति और पर्यावरण की हमारी संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लें। प्रकृति के आंतरिक संतुलन को क्षति पहुंचाए बगैर विकास की सोच को मूर्त दें। याद रखें, वृक्ष एवं वनस्पतियां भूमि को उन्नत और उर्वरा ही नहीं बनाते बल्कि सबका भरण-पोषण भी करते हैं।

आइए पर्यवारण संरक्षण दिवस के रूप में निर्धारित एक दिन ही नहीं हम पूरे 365 दिन प्रकृति संरक्षण की अपना सनातन दृष्टि से जुड़कर कार्य करने का संकल्प लें।

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
jojobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
betsat giriş
Kolaybet Giriş
onwin
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
onwin
onwin
holiganbet
sahabet
bets10
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
bettilt giriş
onwin
onwin
onwin
sahabet
onwin
sahabet
bettilt giriş