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राजनीति का गिरता स्तर : “हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?”

 

महाभारत के युद्ध का अंतिम चरण था। कर्ण युद्ध में मारा जा चुका था। उसके पश्चात शल्य भी मारा गया। तब दुर्योधन छुपकर एक तालाब में जा बैठा। ऐसे में उसकी सेना के तीन महारथी कृतवर्मा ,अश्वत्थामा और कृपाचार्य रह गये। कृपाचार्य से अश्वत्थामा ने कहा कि अब आप हमारे सेनापति बन जाओ । इस पर कृपाचार्य ने बड़ी पते की बात कही थी, उन्होंने कहा था कि “अश्वत्थामा सेनापति बनते नहीं हैं ,बनाए जाते हैं।” गुरु कृपाचार्य जी ने जो समय कहा था इसी को कहते हैं – मर्यादा पथ। जो हमें हर प्रकार की स्थिति में सामान्य और धर्मसंगत व्यवहार करने के लिए प्रेरित करती है।


मनुष्य के जीवन में मर्यादा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मर्यादा भंग होते ही सारी व्यवस्था तार-तार हो जाती है। जो लोग मर्यादाओं से बन्धकर कार्य करने में कुशल होते हैं वे अपनी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखते हैं।
जब लोग मर्यादा तोड़ते हैं,तब राष्ट्र विखंडित होते हैं। जैसे रावण ने मर्यादाओं को तोड़ा उसका राज्य एवम राष्ट्र समाप्त हुआ। दुर्योधन ने मर्यादाओं को तोड़ा महाभारत होकर दुनिया गारत हुई। 1947 में भी कुछ लोग अमर्यादित आचरण कर रहे थे । उन्हें राष्ट्र से कोई लेना-देना नहीं था। निहित स्वार्थ के लिए उन्होंने भी देश का बंटवारा करवा दिया। मर्यादाएं टूट गईं, राष्ट्र टूट गया और दीवारें खड़ी हो गईं।
1989में जब केंद्र में महबूबा मुफ्ती के पिता गृहमंत्री थे तब देश की राजनीति के शीर्ष स्तर पर एक नाटक खेला गया था, जिसका मुख्य पात्र महबूबा मुफ्ती स्वयं थी। उनका नाटकीय अंदाज में अपहरण किया गया। फिर उसकी खोज के लिए आतंकवादियों को छोड़ा गया था ।
ऐसे अनेक उदाहरण हैं और उसी समय कश्मीर से कश्मीरी पंडितों की, हिंदुओं की महिलाओं ,बेटियों के साथ जो अमानवीय कृत्य हुए वह किसी से छिपे नहीं है ।आखिर उन लोगों को कश्मीर से भगा दिया गया। कश्मीर की घाटी हिंदू विहीन कर दी गई ।लेकिन विपक्ष की नजर में वह आज तक भी मॉब लिंचिंग नहीं है। सारे सेकुलर लिस्ट गैंग ने उधर से आंखें फेर लीं और अपने हकों की प्राप्ति के लिए इसे लोगों का आजादी का आंदोलन कहने में अपनी परोक्ष या अपरोक्ष सहमति प्रदान की । यह सीधे-सीधे राष्ट्रद्रोह की बात थी कि जब देश का सेकुलर गैंग या राजनीतिक दल ऐसे राष्ट्र द्रोहियों का समर्थन कर रहे थे।
आज बंगाल में जो कुछ हो रहा है, यह वही पुनरावृत्ति होने जा रही है । वहां से हिंदुओं को राज्य छोड़कर के पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ रही है। वह मॉब लिंचिंग नहीं है। विपक्षियों के अपने तर्क हैं। सारे देश का सेकुलर गैंग इस पर मौन साधे बैठा है और इस बात की प्रतीक्षा में है कि केंद्र सरकार यदि बंगाल में कोई ‘महत्वपूर्ण निर्णय’ लेती है तो उसका विरोध कुछ इस प्रकार किया जाए जिससे कि पूरे देश का मुसलमान उनके साथ सड़कों पर आ जाए । देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश देश का विपक्ष पहले भी करता रहा है। फिर एक नई तैयारी हो रही है।
चुनावों के बाद बंगाल में प्रायोजित हिंसा हुई है और बंगाल केंद्रीय सरकार के विपरीत कार्य करके राष्ट्रीय भूमिका को नकार रहा है। यह सत्य है।
लेकिन श्रीमती सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री श्री एचडी देव गोडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शरद पवार, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ,राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव ,झामुमो नेता श्रीसोरेन ,बहन कुमारी मायावती, राष्ट्रीय लोक दल ये सभी विपक्षी दल राष्ट्रीय कर्तव्य से विमुख होकर केवल केंद्रीय सरकार के विपरीत कार्यवाही करने में व्यस्त हैं। सरकार के विरोध से आगे बढ़ते बढ़ते ये हिंदू विरोध तक जाकर भी नहीं रुके हैं बल्कि राष्ट्र विरोध तक पहुंच गए हैं। सचमुच “हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?”
सभी सत्ता प्राप्ति की लड़ाई लड़ रहे हैं।सत्ता की लड़ाई में कितने निम्न स्तर तक इनकी सोच आ गई है कि कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़े तो इनकी राजनीति खूब चमकी। लेकिन अब जैसे-जैसे योगी जी कंट्रोल कर रहे हैं अथवा स्वाभाविक रूप से संक्रमण दर कम हो रही है तो विपक्षी नेताओं का बुरा हाल है। वह यह सोच रहे हैं कि यह कोरोना यूपी के चुनावों तक तो कम से कम रहता ,जो हम भरपूर गाली भाजपा को और योगी सरकार को दे सकते। वास्तव में विपक्ष मुद्दाविहीन है और कर्तव्य विमुख हुआ किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में है। वह समझ नहीं पा रहा है कि सत्ता प्राप्ति के लिए उसे क्या करना चाहिए? इसलिए हताशा की स्थिति में हर नीच हथकंडे को अपनाने में उसे अब कोई परहेज नहीं है।


इस गंदी सोच को कैसे आप उचित बता सकते हैं? पश्चिमी उत्तर प्रदेश में योगी जी का विरोध जताते हुए एक फर्जी सोशल मीडिया पर बात चली । उस विपक्षी नेताजी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो चुका है।
बड़ा आश्चर्य जनक है कि इस घटना का सीधा संबंध पूरे विपक्ष से है क्योंकि इससे बेचारे विपक्ष का ऑक्सीजन लेवल घट बढ़ रहा है।विपक्षियों की सोच यही तक काम कर रही थी कि कोरोना के कारण नैया पार हो सकती है। उससे पहले किसान आंदोलन को समर्थन प्रदान करके उससे नैया पार कराना चाह रहे थे।
हम विरोध करते- करते किस स्तर तक पहुंच चुके हैं।
हम प्रधानमंत्री के संवेदना पूर्ण आंसुओं को देखकर उनका उपहास कर रहे हैं लेकिन इससे मानवता शर्मसार होती है। इससे अमानवीय कृत्य और क्या हो सकता है। बड़ा अजीब खेल है , यदि प्रधानमंत्री लोगों से सीधे संपर्क साध कर ‘मन की बात’ करते हैं तो यह एक पाखंड है ।यदि बात नहीं करते हैं तो वह घमंडी हैं। यदि सरकार संवेदनशील होकर लोगों के साथ खड़ी होती है तो आने वाले चुनावों के लिए बिगड़ती तस्वीर देखकर विपक्ष बेचैन होता है और यदि कहीं सरकारी स्तर पर असंवेदनशीलता दिखाई देती है तो उस पर राजनीति की जाती है।

देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट
चेयरमैन : उगता भारत समाचार पत्र

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