इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए दवाओं का प्रयोग भी सिद्ध हो रहा है खतरनाक

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अजय कुमार

स्थिति यह है कि इस समय जिससे भी बात करिये वह ऐसे समझाता है जैसे किसी एक्सपर्ट से बात हो रही हो। दवा कम्पनियां भी मौके का खूब फायदा उठा रही हैं। इन्होंने अपनी कई दवाओं को कोरोना से निपटने में कारगर बता कर बाजार में झोंक दिया है।

कोरोना महामारी से निपटने एवं अपने आप को इससे बचाए रखने के लिए हर कोई हर संभव कोशिश कर रहा है, जिसकी जहां तक ‘पहुंच’ है वह उसका उतना फायदा उठा रहा है। काढ़ा, भंपारा, गरारा, योगासन से लेकर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। इंग्लिश से लेकर होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, हकीमी सब कुछ अपनाये जा रहे हैं। दादी माँ के नुस्खे अपनाए जा रहे हैं। इसके लिए घरेलू इलाज बताने वालीं किताबें खंगाली जा रही हैं। यार-दोस्तों से सुझाव लिए जाते हैं। खासकर सुझाव लेने के लिए उन लोगों को ज्यादा तरजीह दी जाती है जो कोरोना पॉजिटिव होने के बाद निगेटिव हो चुके हैं। प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से डॉक्टर जो सुझाव देते हैं उसे ‘देववाणी’ समझ कर उस पर अमल किया जाता है। स्थिति यह है कि इस समय जिससे भी बात करिये वह ऐसे समझाता है जैसे किसी एक्सपर्ट से बात हो रही हो। दवा कम्पनियां भी मौके का खूब फायदा उठा रही हैं। इन्होंने अपनी कई दवाओं को कोरोना से निपटने में कारगर बता कर बाजार में झोंक दिया है, जिसमें ग्राहक फंसने से बच नहीं पाता है। उधर, हालात यह है कि आम आदमी कोरोना महामारी की दो लहरों से जूझ ही रहा था कि कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक से लोग भयभीत होने लगे हैं। जिस तरह से यह आशंका जताई जा रही हे कि तीसरी लहर का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा पड़ेगा, उससे तमाम माँ-बाप का सहम जाना स्वाभाविक है।

बात मौजूदा दौर की कि जाए तो कोरोना को लेकर एक आम धारणा बन गई है कि कोरोना का मुकाबला सिर्फ इम्युनिटी बढ़ा कर ही किया जा सकता है। इसीलिए हर आम और खास अपनी इम्युनिटी बढ़ाने में लगा है जबकि कई चिकित्सकों का मानना है कि इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ज्यादा दावाओं का सेवन भी खतरनाक है। फिर भी इस हकीकत से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कोरोना से लड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों के चलते कुछ लोग कोरोना को चुनौती देने में कामयाब भी हुए हैं, लेकिन ऐसे लोगों की भी तादाद कम नहीं है जो हर तरह के उपाय करने के बाद भी कोरोना संक्रमण के शिकार हो चुके हैं।

एक तरफ जहां कोरोना महामारी से आम आदमी जूझ रहा है, वहीं कुछ दवा कम्पनियां झूठे दावों के सहारे जनता को बरगलाने और ठगने में लगी हैं। इसके लिए यह कम्पनियां सोशल साइट्स से लेकर मीडिया तक का सहारा ले रही हैं। आम आदमी इनके प्रचार से भ्रमित होकर अपने घरों में दवाओं का जखीरा इकट्ठा कर लेता है, जो किसी काम की नहीं होती हैं। इनको खरीदने के बाद ग्राहक लुटा हुआ महसूस करता है। वहीं तमाम कम्पनियां मालामाल हो जाती हैं। इसी भ्रामक प्रचार के सहारे दवा कम्पनियों द्वारा अरबों रुपए का धंधा किया जा रहा है। आश्चर्य होता है कि बाजार में एक ही मर्ज और फार्मूले वाली दवाएं अलग-अलग कम्पनियों द्वारा बड़े मूल्य अंतर से बेची जा रही हैं। इसीलिए इम्यूनिटी बढ़ाने की एक जैसी दवा 30-40 ररुपए पत्ते से लेकर 150-200 ररुपए में बिक रही है। इस बार भी जरूरतमंदों को वैसे ही ठगा जा रहा है जैसे कोरोना की पहली लहर के दौरान मास्क और सैनेटाइजर के नाम पर लूटपाट की गई थी। अबकी से ऑक्सीजन और कोरोना के इलाज के लिए जरूरी दवाओं/इंजेक्शन की कमी दिखाकर ग्राहकों को लूटा जा रहा है। लूट के इस खेल में दवा कम्पनियों और डॉक्टरों का गठजोड़ खूब फलफूल रहा है, जबकि कोरोना अपने पाँव पसारता जा रहा है।

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश को ऐसे जख्म दिए हैं, जिसकी भरपाई करने में लंबा वक्त लगेगा। इस बीच तीसरी लहर आने के भी दावे किए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि तीसरी लहर दूसरी लहर से भी ज्यादा खतरनाक होगी। लोगों के मन में यह सवाल भी उठने लगे हैं कि कोरोना की तीसरी लहर कब तक आएगी ? क्या कोरोना की दो लहरों से हुए नुकसान और सरकार की नाकामी को तीसरी लहर आने से पहले दुरुस्त कर लिया जाएगा ? सवाल यह भी है कि तीसरी लहर कब आएगी और इसके आने से पहले तक टीकाकरण का अभियान पूरा कर लिया जाएगा। तीसरी लहर कब आएगी इसको लेकर आ रही अलग-अलग राय के बीच आईआईटी कानपुर के प्रफेसर मणींद्र अग्रवाल ने गणितीय विश्लेषण के आधार पर दावा किया है कि कोरोना की दूसरी लहर जुलाई तक समाप्त हो जाएगी और तीसरी लहर अक्टूबर से पहले नहीं आएगी। तीसरी लहर आने से पहले सरकार को बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, मेडिकल उपकरण, दवाइयां, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, पैरामेडिकल स्टाफ आदि की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। इसमें सबसे कारगार हथियार वैक्सीनेशन है, इसलिए सरकार को वैक्सीनेशन पर पूरा जोर देना चाहिए।

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अग्रवाल ने कोरोना की पहली लहर के केस, जनसंख्या और इम्युनिटी स्तर को आधार बनाकर तीसरी लहर अक्टूबर तक आने की बात कही है। प्रोफेसर द्वारा कोरोना की दूसरी लहर के डाटा के आधार पर कंप्यूटिंग मॉडल सूत्र तैयार किया जा रहा है। गणितीय विश्लेषण के आधार पर प्रोफेसर महामारी से जुड़ी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। प्रोफेसर अग्रवाल का कहना है कि तीसरी लहर कितनी खतरनाक है, इसका वायरस किस पर कितना प्रभाव डालेगा, इस विषय पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। तीसरी लहर की चपेट में बच्चे होंगे, इस तरह की बातें केवल डराने वाली हैं। इस बात का अंदाजा अभी नहीं लगाया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा लोगा वैक्सीन लगवाएं और मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

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