भूटान की जमीन पर चीन की नजर क्यों?

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उगता भारत

फॉरन पॉलिसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन को भूटान का यह इलाका नहीं चाहिए। वह भूटान पर दबाव बनाना चाहता है ताकि भारत का सामना करने के लिए उसे कहीं और जमीन चाहिए हो, तो मिल सके।

चीन ने अक्टूबर 2015 में ऐलान किया कि तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (TAR) में ग्यालाफूग नाम का गांव बसाया गया है। अप्रैल 2020 में TAR के कम्यूनिस्ट पार्टी सेक्रटरी वू यिंगजी दो पास पार करके नए गांव पहुंचे। इसके बारे में स्थानीय मीडिया में चर्चा हुई लेकिन चीन के बाहर खबर नहीं हुई। तिब्बत में चीन ने कई गांव बनाए हैं लेकिन ग्यालाफूग दरअसल, भूटान में है। वू और कई अधिकारी इंटरनैशनल बॉर्डर पार करके गए थे। जिस तरह दक्षिण चीन सागर में वह उकसावे की कार्रवाई करता है, वही चीन हिमालय में कर रहा है। इससे वह अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते खतरे में डाल रहा है।
भूटान में गांव बना रहा चीन
1980 से चीन ने 232 स्क्वेयर मील इलाके में दावा कर रखा है। इसे अंतरराष्ट्रीय तौर पर भूचान के लूंटसे जिले का हिस्सा समझा जाता है। चीनी अधिकारी दुनिया से छिपाकर यहां जश्न मनाने गए थे। साल 2017 से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तिब्बत के सीमाक्षेत्र पर निर्माण करा रहे हैं। इसे भारत के साथ हिमालय में तनाव का नतीजा माना जाता है। फॉरन पॉलिसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन को भूटान का यह इलाका नहीं चाहिए। वह भूटान पर दबाव बनाना चाहता है ताकि भारत का सामना करने के लिए उसे कहीं और जमीन चाहिए हो, तो मिल सके।

तिब्बत का हिस्सा होने का दावा
ग्यालाफूग के अलावा दो और गांवों पर चीन की नजर है जिनमें से एक में निर्माणकार्य अभी चल रहा है। यहां 66 मील की नई सड़कें, एक छोटा हाइड्रोपावर स्टेशन, दो CCP प्रशासनिक केंद्र, एक संपर्क बेस, एक आपदा राहत कारखाना, पांच सैन्य-पुलिस आउटपोस्ट, सिग्नल टावर, सैटलाइट रिसीविंग स्टेशन, सैन्य बेस, सिक्यॉरिटी साइट और आउटपोस्ट चीन ने बना लिए हैं। चीन इसे TAR का क्षेत्र बताया है लेकिन ये उत्तरी भूटान में आते हैं।

भारत से जुड़ी सीमा पर नजर?
भारत के साथ सड़क निर्माण और फॉरवर्ड पट्रोलिंग को लेकर चीन ने 1962 का युद्ध कर डाला था, 1967 और 1987 में सेनाओं के बीच झड़प हो गई थी और पिछले साल 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। अब भूटान में पूरा गांव बसाकर वह अपनी बढ़ती आक्रामकता दिखा रहा है। वह भूटान के साथ समझौते का उल्लंघन भी कर रहा है। भूटान ने पहले भी इस तरह की गतिविधियों का विरोध पेइचिंग के पास दर्ज कराया है।

आखिर क्या है चीन की चाल?
उत्तरी भूटान में चीन ने तीन जगहों पर दावा ठोका है, पश्चिम में चार और पूर्व में साकतेंग पर। उत्तर में बेयुल खेनपाजॉन्ग और मेनचुमा घाटी में अपना दावा बताता है। चीनी नक्शे में चागजॉम को भी चीन का हिस्सा दिखाया गया है। 1990 से चीन भूटान के लिए 495 स्क्वेयर किलोमीटर की जमीन छोड़ने का ऑफर दे रहा है, बशर्ते भूटान डोकलाम, चरिथांग, सिंचुलुंगपा, ड्रमाना और शकाटो में 269 किलोमीटर की जगह छोड़ दे।

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