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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

योगी सरकार के 4 वर्ष: बन रहे हैं फिर लौट कर आने के आगाज ?

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के 4 वर्ष पूरे कर लिए हैं । इस दौरान सरकार के द्वारा कई ऐसे कार्य किए गए हैं जिससे राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। भू माफियाओं पर जिस प्रकार नकेल कसी गई है और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के विरुद्ध सरकार जिस प्रकार अपने कड़े तेवर दिखाती रही है उसके चलते इतना तो कहा जा सकता है कि परिस्थितियां कुछ अनुकूल बनी हैं।


प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मानें तो पिछले 4 वर्ष में प्रदेश के अंदर और गांव-गरीब, महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों की सुविधाओं के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी जिसे सरकार ने पूरी ईमानदारी से लागू करने का प्रयास किया।
2017 में जब योगी सरकार सत्ता में आई तो उस समय सरकार का खजाना खाली था। वैट 49 हजार करोड़ मिलता था, लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसे एक हजार करोड़ बढ़ा दिया। एक्साइड 12 हजार करोड़ से बढ़कर 36 हजार करोड़ हो गया है. जो पैसा पहले किसी न किसी रूप में नेताओं की जेब में चला जाता था वह अब सीधे राजकोष में जमा हो रहा है, जिससे राजकोष में वृद्धि हो रही है।
उत्तर प्रदेश के बारे में यह भी एक तथ्य है कि पहले प्रदेश सरकार का बजट दो लाख करोड़ तक होता था जिसे योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आने के बाद 5 हजार करोड़ तक पहुंचाया। निश्चय ही इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि आने वाले समय में प्रदेश का और भी तीव्र गति से विकास होगा। वास्तव में आय के सीमित संसाधनों के मध्य इस प्रकार राजकोषीय घाटे को कम करते हुए निरंतर उठाव की ओर ले जाना सरकार की नीति और नियत की पारदर्शिता को प्रकट करता है।
उत्तर प्रदेश की वर्तमान योगी सरकार ने सेक्टर एग्रीकल्चर एमएसएमई पर फोकस किया है। जिसके अच्छे परिणाम आए हैं। इससे प्रदेश की आय में वृद्धि हुई है। यह एक अच्छी बात है कि सरकार ने कर्ज लेकर खर्च करने की नीति को नहीं अपनाया।
रजिस्ट्रेशन स्टांप से भी सरकार ने आय में वृद्धि करने का सराहनीय कार्य किया है। जो पहले  9 से 10 करोड़ थी अब 25 करोड़ तक जा पहुंची है। मंडी लीकेज को सरकार द्वारा सख्ती से रोका गया है।
राजकोषीय आय में वृद्धि करना प्रत्येक सरकार का आवश्यक कार्य होता है। परंतु इसका अभिप्राय यह नहीं कि संबंधित उपभोक्ता सरकार के इन निर्णयों से अपने आप को ठगा हुआ अनुभव करने लगें या कुछ ऐसा सोचने लगें कि सरकार उसका उत्पीड़न कर रही है । योगी सरकार को इस बात पर ध्यान रखते हुए ही राजकोषीय आय में वृद्धि करनी चाहिए। जिस प्रकार लोगों ने सहजता से योगी सरकार के ऐसे निर्णयों का स्वागत किया है, उससे लगता है कि प्रदेश की जनता योगी सरकार की कार्यप्रणाली से संतुष्ट है। लोग समझ रहे हैं कि विकास कार्यो के लिए सरकार को अपने आय के साधन बढ़ाने पड़ेंगे । लोगों को कष्ट उस समय होता है जब कोई सरकार केवल एक सड़क बनाए और उसमें ‘मोटी कमाई’ करके चुनाव खर्च निकाल ले या या अपने गांव में जाकर “महोत्सव” पर अरबों रुपया खर्च कर दे। इसी प्रकार कोई दूसरी सरकार आकर स्वयं अपने मुख्यमंत्री की और अपने आदर्शों की मूर्तियां स्थापित कराने में राजकोष के पैसे को खर्च कर दे और कहे कि हम प्रदेश का विकास कर रहे हैं। इस दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वह केवल रामचंद्र जी के मंदिर तक अपने आप को सीमित ना रखे बल्कि उससे बाहर जाकर उसके द्वारा प्रदेश के विकास के लिए किए जाने वाले कार्यों की गंगा बहती रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 की अपेक्षा अधिक रोजगार दिए हैं। मार्च 2017 में हर सरकारी भर्ती पर कोर्ट से रोक लगी हुई थी, उसका कारण सरकार की नीति और नियत में दिखाई देने वाला अंतर था। जाति विशेष के लोगों को या किसी ना किसी प्रकार के भ्रष्टाचार के माध्यम से अपने लोगों को आगे लाने की सरकारी नीतियों के विरुद्ध न्यायालयों को सक्रिय होना पड़ा था। जिस कारण उन भर्तियों पर न्यायालयों के स्थगन आदेश जारी हुए थे।
आज की सरकार का कहना है कि हमने प्रदेश के 4 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी दी।  ईज ऑफ डूंइंग सुगम की। रैंकिगं 2016 में 14वें स्थान पर थे। अब पहले स्थान पर हैं। इस क्षेत्र में सरकार को अभी और बहुत कुछ काम करने की आवश्यकता है। अच्छा हो कि सरकार नौकरी ढूंढने वाले लड़कों को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करे। क्योंकि सरकारी नौकरी देने के झांसे में डालकर युवाओं को आजादी के बाद से ही सरकारों के द्वारा दिग्भ्रमित किए जाने की परंपरा आरंभ हो गई थी । जिससे बड़ी संख्या में देश में बेरोजगारी फैली और परंपरागत रोजगार के अवसर समाप्त होते चले गए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी सरकार सभी देशवासियों को सरकारी नौकरी उपलब्ध नहीं करा सकती। इसके लिए भारत की वर्ण व्यवस्था के अंतर्गत फलने फूलने वाले स्वरोजगारवादी दृष्टिकोण को अपनाने की नितांत आवश्यकता है। मनुवाद को लोगों ने कोसा तो है, परंतु उसे पढा व समझा नहीं है। बड़े उद्योगों ने लोगों को रोजगार नहीं दिया है बल्कि रोजगार छीन लिया है । इस बात पर अनुसंधान करने की आवश्यकता है। जिसके लिए योगी सरकार को समय रहते उचित कदम उठाना चाहिए । जिससे कि दूसरे प्रदेशों को उनसे शिक्षा मिल सके। सरकारों को फिर से स्वरोजगार की ओर युवाओं को ले जाकर उन्हें स्वावलंबी बनाना चाहिए। हमें समझ लेना चाहिए कि नौकरियां गुलामी का प्रतीक हैं और स्वरोजगार स्वतंत्रता का प्रतीक है।
सत्ता में आने के बाद योगी आदित्यनाथ ने जिस प्रकार कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया है उससे उनके विरोधी भी सहमत दिखाई देते हैं। यद्यपि इस विषय में यह भी एक सत्य है कि योगी सरकार के रहते पुलिस प्रशासन पहले से अधिक निरंकुश हुआ है और इस विभाग में पहले की अपेक्षा इस समय भ्रष्टाचार भी चरम पर है। योगी सरकार के विधायकों की बात को भी पुलिस मान नहीं रही है। फिर भी योगी सरकार से जनसाधारण खुश दिखाई देता है।
इस खुशी का एक कारण यह भी है कि योगी सरकार के 4 वर्ष के शासनकाल में प्रदेश में कोई भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। जबकि इससे पूर्व की सपा सरकार के शासनकाल में दंगों की बाढ़ सी आ गई थी। इस प्रकार की योगी सरकार की कार्य नीति से मुस्लिम संप्रदाय के लोग भी संतुष्ट हैं, क्योंकि उन्हें भी आराम से अपने रोजगार अधिक करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। सांप्रदायिक दंगों की आग में जलते उत्तर प्रदेश को बाहर निकाल कर लाना योगी सरकार की सचमुच एक सराहनीय उपलब्धि है।
जो लोग भाजपा सरकारों पर केवल ‘हिंदू मुस्लिम- हिंदू मुस्लिम’ करते रहने का आरोप लगाते हैं, उन्हें इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि योगी सरकार के चलते सांप्रदायिक दंगों पर लगभग नियंत्रण सा स्थापित कर दिया गया है। यदि ‘हिंदू मुस्लिम – हिंदू मुस्लिम’ की बात होती तो निश्चय ही योगी शासन में हिंदू उग्र होकर सांप्रदायिक दंगों को फैलाता, लेकिन ऐसा ना होना योगी सरकार की संतुलन की राजनीति का स्पष्ट प्रमाण है। हमारा मानना है कि योगी सरकार को अपनी इस प्रकार की नीति को और भी अधिक पारदर्शिता के साथ लागू करना चाहिए , क्योंकि किसी भी सरकार के शासनकाल में किसी भी वर्ग या संप्रदाय को असुरक्षा का आभास नहीं होना चाहिए। ‘सबका साथ सबका विकास’ का अभिप्राय यही है कि सभी संप्रदायों, वर्गों और समुदायों के लोग सहज और सुविधापूर्ण जीवन जीएं। किसी सरकार पर यदि पक्षपाती होने का आरोप लगता है तो यह प्रकट करता है कि ऐसी सरकार राजधर्म का सम्यक निर्वाह नहीं कर रही है।
देश के प्रति समर्पित होकर काम करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी अपने उन सभी मौलिक संविधानिक अधिकारों का आनंद लेने का उतना ही अधिकार है, जितना किसी हिंदू को है। इसके उपरांत भी हमारा मानना है कि सरकारों को संविधान के अनुसार शासन करते हुए ‘कठोरता’ का प्रदर्शन करना चाहिए । शासन की कठोरता का अभिप्राय केवल इतना है कि किसी भी वर्ग का तुष्टीकरण नहीं होगा और मजबूती के साथ देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले लोगों को बिना किसी पक्षपात और बिना किसी भय के सरकार दबोचेगी और उनके साथ कानूनी कार्यवाही करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करेगी। देश के साथ गद्दारी करने या गद्दारी करने के कार्यों में संलिप्त होने की अनुमति किसी भी वर्ग को या किसी भी शक्तिशाली व्यक्ति को नहीं दी जाएगी। स्पष्ट कठोरता प्रत्येक शासक और शासन में दिखाई देनी चाहिए।
प्रदेश सरकार को चाहिए कि जिन लोगों ने अपने धर्म स्थल सड़कों के किनारे सड़कों की पड़ी भूमि को कब्जा कर बना लिए हैं। उनसे ऐसे धर्म स्थलों को वहां से हटाने के लिए कहा जाना चाहिए और यदि नहीं हटाते हैं तो कठोरता का प्रदर्शन करते हुए ऐसे धर्म स्थलों को सरकार को हटा देना चाहिए । यह अच्छी बात है कि प्रदेश की योगी सरकार ने इस ओर भी कदम उठाने का साहसिक निर्णय लिया है। हम यहां पर यह भी बताना चाहेंगे कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद का सिकंदराबाद कस्बा एक पुरानी तहसील है। जिससे निकलने वाली जीटी रोड को लोगों ने कब्जा करके मात्र 15 -20 फीट छोड़ा है। उन लोगों के विरुद्ध कोई कार्यवाही ना करके दूसरी जीटी रोड बना दी गई। उसे भी धर्म स्थलों के माध्यम से लोगों ने कब्जा कर बहुत संकीर्ण कर दिया। अब तीसरी जीटी रोड बाईपास के नाम पर फिर बनाई गई है। हमें ऐसी परिस्थितियों में ध्यान रखना चाहिए कि जिन लोगों को हम सार्वजनिक स्थल मार्गों को कब्जा करने की छूट देते हैं और फिर राजकोष से पैसा खर्च करके जमीन अधिग्रहण कर एक नई सड़क बना बना कर देते हैं उससे सरकार की कमजोरी तो झलकती ही है साथ ही इस प्रकार से लोगों के द्वारा दिए गए टैक्स का दुरुपयोग भी होता है। जिन लोगों ने प्रदेश के कस्बों व महानगरों में सड़कों का अतिक्रमण किया है, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही करके सड़कों को कब्जा मुक्त कराया जाना योगी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है जो उसे स्वीकार करनी चाहिए। सड़कों को घेरना एक राष्ट्रीय अपराध है। जिससे लोगों को असुविधा होती है। अनेकों कस्बे प्रदेश में ऐसे हैं जिनके दोनों को सरकारी भूमि पर लोगों ने अवैध कब्जा करके धर्म स्थलों का निर्माण कर लिया है। रोड जाम होने का सबसे बड़ा कारण भी ये धर्म स्थल ही होते हैं।
जो सरकारें अपने आपको तुष्टीकरण के माध्यम से जीवित रखने का प्रयास करती हैं वे देश के साथ गद्दारी करने वाले लोगों के प्रति ढिलाई बरतती हुई भी देखी जाती हैं, जैसा कि प्रदेश में पिछली सरकारों के समय में होता भी रहा है। कुछ लोगों को हमारे ‘गद्दारी’ शब्द पर आपत्ति हो सकती है । जैसे कुछ लोगों को ‘भगवा राष्ट्रवाद’ से आपत्ति होती है। उनको हम यह बताना चाहते हैं कि जनता के टैक्स के पैसे से बनी सड़कों को कब्जाना भी न केवल एक राष्ट्रीय अपराध है बल्कि राष्ट्रवाद की भावना को चोट पहुंचाने वाला काम भी है। हमारी दृष्टि में राष्ट्रवादी वह है जो राष्ट्रीय संपत्ति का सम्मान करता है ,राष्ट्रीय गौरव, राष्ट्रीय संस्कृति ,राष्ट्रीय धर्म और राष्ट्रीय मूल्यों को अपनाने में विश्वास करता है। जो व्यक्ति इन सभी प्रतीकों या आदर्शों का मजाक उड़ाता है वह गद्दार है और जो इनके प्रति सम्मान व्यक्त करता है ,वह राष्ट्रवादी है। इसी को ‘भगवा राष्ट्रवाद’ कहते हैं।
भारत की शासकीय नीतियों का उद्देश्य शस्त्र और शास्त्र का उचित समन्वय है। शास्त्र अर्थात प्यार की थपकी उनके लिए है जो सरकार और देश के साथ उचित समन्वय बनाकर शांति पूर्वक प्रगति करने की जीवन शैली में विश्वास रखते हैं और शस्त्र उनके लिए है जो नकारात्मक कार्य में लगे रहकर समाज को पथभ्रष्ट करने का काम करते हैं । योगी सरकार की कार्यशैली पर यदि विचार किया जाए तो यह सरकार शस्त्र और शास्त्र दोनों का उचित समन्वय करके चलने का काम करती रही है। निसंदेह योगी सरकार को लोगों द्वारा पसंद करने का एक कारण सरकार द्वारा इस प्रकार की नीति को अंगीकार करके चलना भी है।
सरकार की कड़ी नीतियों के चलते प्रदेश में अपहरण उद्योग बंद हुआ है ,और बाहर से लोग पूंजी निवेश के लिए भी प्रदेश को पहले की अपेक्षा सुरक्षित अनुभव करने लगे हैं। अपराध की कमाई में लगे लोगों पर शिकंजा कसने में भी सरकार कुछ सीमा तक सफल रही है। जिससे भूमाफिया या और दूसरे प्रकार के माफिया गिरोहों पर इस समय लगाम सी लगी है।
इस सब के उपरांत भी प्रदेश सरकार के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है कि उसने प्रदेश में ‘राम राज्य’ स्थापित कर दिया है। काम करने के लिए अभी बहुत कुछ शेष है । वैसे भी किसी सरकार के द्वारा रामराज्य स्थापित करने की दिशा में 4 वर्ष का समय केवल एक बानगी मात्र होता है। जिससे कुछ संकेत निकलते हुए दिखाई दिया करते हैं और यदि योगी सरकार के पिछले 4 वर्षों के संकेतों पर विचार करें तो निश्चय ही हम ‘रामराज्य’ की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसा कहा जा सकता है । यद्यपि अगले विधानसभा चुनावों में प्रदेश की जनता योगी सरकार के इस प्रकार के कार्यों पर अपनी मुहर लगाती है या नहीं यह देखना अभी शेष है।
इस सब के बीच योगी सरकार के लिए यह भी एक शुभ संकेत है कि एक निजी चैनल द्वारा कराए गए सर्वेक्षण से प्रदेश की जनता योगी सरकार के साथ खड़ी हुई दिखाई दे रही है अर्थात योगी सरकार को समर्थन देकर फिर एक बार अवसर देना चाहती है।
इस सर्वेक्षण के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव यदि तत्काल करा लिए जाएं तो योगी सरकार को 285 से 295 सीटें मिल सकती हैं। इस सर्वेक्षण पर यदि कुछ देर के लिए विश्वास करें तो निश्चय ही योगी सरकार के 4 वर्ष उसके सिर से लौट आने की भूमिका तैयार कर चुके हैं।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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