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महाकुंभ अद्भुत अद्वितीय विश्व सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

महाकुंभ: एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विश्व भर का सबसे बड़ा व श्रैष्ठतम उत्सव था ।महाकुंभ एक ऐसा उत्सव है जो हर 12 वर्षों में आयोजित किया जाता है,इस वर्ष यह महाकुंभ 144 वर्ष बाद के विशेष महत्व को दर्शाते हुए आयोजित किया गया,जिसमें लाखों श्रद्धालु और साधु-संत एकत्रित हुए थे और संगम नदी में स्नान किया था। यह उत्सव भारतीय संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र आयोजनों में से एक माना जाता है,जो भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है।

महाकुंभ का इतिहास लगभग 2000 वर्ष पुराना है,जब महर्षि विष्णु व योगिराज कृष्ण ने गंगा नदी में स्नान किया था। इस घटना के बाद महाकुंभ की परंपरा शुरू हुई थी। जिसमें लोग गंगा नदी में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं, धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति-सभ्यता-विचारधारा का धार्मिक सामाजिक सांस्कृतिक प्रमुखता से महाकुंभ के स्वरूप में परिवर्तित होते हुए चार हजार हैक्टेयर में फैला हुआ था, 144 वर्ष के महाकुंभ के रुप में आर्यावर्त भरतखण्ड के प्रयागराज की पावन भूमि पर संस्कृति से गौरवान्वित किया जाने लगा जो आज विश्व में सर्वोत्कृष्ठ सर्वोपरि भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों को स्थापित करके 26 फरवरी को सम्पन्न हुआ है।

महाकुंभ का महत्व न केवल आध्यात्मिक है,बल्कि यह एक सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव भी है। इस उत्सव में लोग अपने मतभेदों को भूलकर एकत्रित होते हैं और एक दूसरे के साथ मिलकर संगम नदी में स्नान करते हैं।महाकुंभ के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं,महाकुंभ की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि गंगा-यमुना-सरस्वती नदी में स्नान करना है। महाकुंभ के दौरान कई पूजा-अर्चना आयोजित की जाती हैं।महाकुंभ के दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजित जाता हैं,जिनमें संगीत,नृत्य और नाटक शामिल हैं।विश्व भर के सैकड़ों मत मतान्तरों की संस्थायें अपने अपने शिविर को स्थापित करके अपने अपने मतों व धर्मों का प्रचार प्रसार करते हैं व सामाजिक धार्मिक कार्यक्रमों से समाज को दिशा प्रदान करते हैं तथा समाज व मानव को मानव बनने का संदेश देती है ।इस महाकुंभ में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 शिव रात्रि तक तक स्नान करने वालों की संख्या 66.21 करोड़ पहुंच गई थी।इसके अतिरिक्त भारत के महामहिम राष्ट्रपति,कई प्रांतों के राज्यपाल,देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी,कई प्रांतों के मुख्य मंत्री, केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य ,राजनैतिक दलों के प्रमुख,विभिन्न देशों के राज नायक,लाखों की संख्या में विदेशी मेहमानों व फिल्मी सितारों,खेल जगत,उद्योग जगत की हस्तियों व भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक,उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी,एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल,ब्रिटेन के रॉक बैंड कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन प्रमुख रूप से शामिल थे।

सोशल मीडिया के चर्चित चेहरों में हर्षा रिछारिया माला बेचने वाली युवती मोनालिसा भोसले और ‘आईआईटी बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध अभय सिंह ने भी इस मेले में सुर्खियां बटोरी साथ में संगम में डुबकी लगाई व शिरकत करते हुए संगम यानी गंगा-यमुना-सरस्वती के मिलन संगम में डुबकी लगा कर अपनी धार्मिक भावनाओं को व्यक्त किया।प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना पूरा देश कर रहा है।महाकुंभ में गंगा नदी में स्नान करने से आध्यात्मिक लाभ के साथ शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।महाकुंभ में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजिन भी किया गया था,जोअपनी संस्कृति के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती हैं। महाकुंभ में लोग अपने मतभेदों को भूलकर एकत्रित हुए थे जो सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है।

यह एक ऐसा महाकुंभ उत्सव है जहां पर कई देशों की आबादी से ज्यादा लोग पहुंचे प्रयागराज पहुंच कर आत्मीयता स्नेह एकता का संदेश दिया था।श्रद्धालुओं की यह संख्या चीन और भारत को छोड़कर अमेरिका,रूस और यूरोपीय देशों समेत सभी देशों की आबादी से अधिक थी। साथ ही यह मक्का और वेटिकन सिटी जाने वाले श्रद्धालुओं से भी अधिक थी।उ प्र सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सफल निर्देशन में15,000 सफाईकर्मी लगातार तैनात रहे थे,महाकुंभ अपनी स्वच्छता को लेकर भी चर्चा में रहा जिसमें स्वच्छता कर्मियों की अहम भूमिका रही थी। पूरे कुंभमेले में सफाईकर्मी चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात रहे थे। कई पालियों में उन्होंने साफ-सफाई की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और मेले में शौचालयों और घाटों को पूरी तरह से साफ रखने में शक्ति सहयोग प्रदान किया था,पूरा देश उनकी सराहना की कर रहा है।

इस विशाल आयोजन में भगदड़ में कुछ लोगों को जान भी गंवानी पड़ी थी,महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ की घटना भी हुई। भगदड़ में 20 से 30 लोगों की मृत्यु हो गई थी और काफी लोग हताहत भी हुये,सरकार ने इस पर उच्च स्तरीय जांच भी कर रही है और य़दि किसी का षडयन्त्र होगा वह भी सामने आ जायेगा,लेकिन इस घटना का श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई खास असर नहीं देखने को मिला और लोगों का आगमन जारी रहा। इसके अलावा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी प्रयागराज पहुंचने की जल्दबाजी में भगदड़ हुई और इसमें 18 लोगों की जान चली गई थी। सपा और कांग्रेस ने प्रदेश सरकार ने भगदड़ में मृतको से सरकार पर अनियमितता के आरोप लगाये गये लेकिन प्रमाणिक नहीं कर सके।

इस महाकुंभ में विशेष महत्व यह रहा कि अत्याधुनिक तकनीक का हुआ इस्तेमाल करके करोड़ों लोगों को जीवन्त गौरवान्वित किया था।महाकुंभ में नदियों के संगम के साथ ही प्राचीनता और आधुनिकता का भी संगम देखने को मिला। इसमें एआई से युक्त कैमरों,एंटी ड्रोन जैसी कई अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया और मेला पुलिस को इन प्रणालियों का प्रशिक्षण दिया गया। गंगा जल की शुद्धता को लेकर हंगामा भी किया गया परन्तु गंगा जल की शुद्धता को लेकर राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एनपीसीबी) की रिपोर्ट और फिर उस पर सरकार के हवाले से कई वैज्ञानिकों द्वारा गंगा जल की शुद्धता की पुष्टि को लेकर भी काफी चर्चा हुई। विपक्ष ने भी इसे लेकर काफी सवाल उठाए परन्तु विपक्ष को कोई भी लाभ नहीं मिल पाया था। सरकार ने महाकुंभ नगर जिलामहाकुंभ मेले के आयोजन के लिए एक नया जिला महाकुंभ नगर बनाया गया था। मेले के संचालन के लिए जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत पुलिस और प्रशासन की नियुक्ति की गई थी। यह प्रदेश का 76 वां अस्थायी जिला था। सभी 13 अखाड़ों ने किया अमृत स्नान तथा महाकुंभ मेले में सभी 13 अखाड़ों ने तीन प्रमुख पर्वो मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर अमृत स्नान किया था। बसंत पंचमी स्नान के साथ ही अखाड़े से जुड़े साधु-संत मेले से विदा हो गए। विपक्ष ने खड़े किए श्रद्धालुओं की संख्या पर सवाल सपा समेत विपक्षी दलों ने श्रद्धालुओं की संख्या पर भी सवाल खड़ा किया थे, लेकिन सरकार ने 1,800 एआई कैमरों समेत 3,000 से अधिक कैमरों, ड्रोन और 60,000 कर्मचारियों के हवाले से श्रद्धालुओं की सही संख्या बताने की प्रमाणिकता को गौरवान्वित किया था।श्रद्धालुओं की सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम के साथ 37,000 पुलिसकर्मी ,14,000 होमगार्ड के जवान तैनात रहे थे,तीन जल पुलिस थाने,18 जल पुलिस कंट्रोल रूम और 50 ‘वाच टावर’ भी स्थापित किए गए थे।महाकुंभ मेला क्षेत्र में 25 सेक्टर बनाए गए थे।

13 किलोमीटर के क्षेत्र में 42 घाट बनाए गए। 42 घाटों में दस पक्के घाट भी थे।गंगा-यमुना को पार करने के लिए 30 पांटून पुल भी तैयार किए गए।मेले क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 56 थाने और 144 चौकियां बनाई गईं 2 साइबर थाने अलग से बनाए गए और मेला क्षेत्र में 50 हजार सुरक्षाकर्मी को तैनात किया गया था,इस महाकुंभ में डाॅ भीमराव अम्बेडकर पुलिस अकादमी के 15 घोड़ों की भी ड्यूटी लगाई गई थी ,इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य चिंतन के लिए सैकड़ों चिकित्सक भी अपनी चिकित्सा प्रदान कर रहे थे तथा मेले में भूले भटके लोगों को अपने परिजनों से मिलाने के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई थी ।महाकुंभ 2025 में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होने की संभावना है,जिसमें लगभग 66 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज आए थे। इस आयोजन में छोटे दुकानदारों और कारीगरों के लिए अपने उत्पाद बेचने का एक बड़ा अवसर है, जिसमें दैनिक जीवन की चीजों का कारोबार 17,310 करोड़ रुपए से भी अधिक के हुआ था।महाकुंभ में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी प्रदान किए गए थे, जिसमें लगभग 6 लाख से भी अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा, इस आयोजन में बड़े प्लेयर्स जैसे अदाणी ग्रुप,लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और टाटा प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।

महाकुंभ की इस अद्भुत अद्वितीय व्यवस्थाओं के साथ महाकुंभ की विष्लेशनात्मक अध्ययन करने के लिए, हमें इसके विभिन्न पहलुओं को समझना होगा, जिनमें से कुछ प्रमुख पहलू हैं:

1-आध्यात्मिक महत्व-

महाकुंभ का आध्यात्मिक महत्व इसके केंद्र में है। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है। महाकुंभ में गंगा नदी में स्नान करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है,जैसे कि पापों का प्रायश्चित,आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है।

2. सांस्कृतिक महत्व –

यह उत्सव भारतीय संस्कृति के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है जैसे कि हमारे पूर्वजों की परंपराएं, हमारे धर्म के सिद्धांत और समाज की एकता है।

3-सामाजिक महत्व-

महाकुंभ का सामाजिक महत्व भी बहुत अधिक है। मतभेदों को भूलकर एक दूसरे के साथ मिलकर गंगा नदी में स्नान करते हैं। महाकुंभ में लोग अपने सामाजिक और आर्थिक मतभेदों को भूलकर एक दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं, जो सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है।

4-आर्थिक महत्व-

महाकुंभ में विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, इस कुंभ में तीन हजार करोड़ का व्यवसाय हुआ था, देश के विभिन्न क्षेत्रों से व्यवसायों का आर्थिकपक्ष मजबूत हुआ है।

5- पर्यावरणीय महत्व-

महाकुंभ में गंगा नदी के जल को पवित्र माना जाता है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक करता है और अपने पर्यावरण की रक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

अंत में देश के जाने-माने संत पर्मार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष संत शिरोमणि स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो मैं वापस नहीं जाना चाहता। हमने यहां संगम पर सनातन के एक साथ आने की झलक देखी। मैं यहां आए सभी लोगों को नमन करता हूं- क्या भक्ति है! क्या विश्वास है। मैं सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी की कड़ी मेहनत की भी सराहना करता हूं। चिदानंद सरस्वती ने कहा, विदेशी लोग तो आश्चर्यचकित हैं कि इतने लोग एकसाथ कैसे आ सकते हैं। कमाल का भारत हैं। हमने संकल्प लिया कि जैसे हम सब यहां आध्यात्म के दर्शन कर रहे हैं, वैसे ही हम अपने गांवों को स्वच्छ आधारित आध्यात्म बनाएंगे।चिदानंद सरस्वती ने कहा, हम दो दिन और रुकेंगे।
महाकुंभ भारत देश की सांस्कृतिक एकता-अखंडता का प्रतीक है ,जो मानवीय मूल्यों के उत्थान का महत्वपूर्ण दिग्दर्शन कराता है,देश की सांस्कृतिक धार्मिक सामाजिक एवं आर्थिक पक्ष को भी गौरवान्वित कर रहा है ।इस महाकुंभ ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि भा प्रभा यस्यांरतं भारतम् अर्थात श्रृषि मुनियों महात्माओं संन्यासियों का भारत देश-विश्व को दिशा-निर्देश देने वाला व अपनी ज्ञान रूपी ज्योति से प्रकाशित करने वाला भारत है।पहले भी विश्व गुरु था और आज भी विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

लेखक -वैदिक प्रवक्ता श्वेत केतु शर्मा बरेली
पूर्व सदस्य हिन्दी सलाहकार समिति भारत सरकार

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