देश में निवेश कराने हेतु केंद्र सरकार के प्रयास सराहनीय है

fdi (1)

प्रह्लाद सबनानी

कोरोना महामारी के बाद देश की विकास दर में तेज़ी लाना अब केंद्र सरकार के सामने एक मुख्य चुनौती है। विकास दर में तेज़ी लाने के लिए उत्पादों को मांग बढ़ानी होगी जिसके लिए अंततः निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक क्षेत्र में घरेलू एवं विदेशी निवेश को बढ़ाना होगा। देश में निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा हालांकि कई क़दम उठाए गए हैं, जिसके चलते भारत की “ईज़ आफ डूइंग बिज़नेस” की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में काफ़ी सुधार दृष्टिगोचर हुआ है एवं यह वर्ष 2014 की 142 की रैंकिंग से बहुत आगे बढ़कर 2019 में 63वें स्थान पर आ गई है। 10 मदों में से मुख्यतः 5 मदों, यथा, पूंजी बाज़ार में निवेशकों के हित सुरक्षित रखने (13), बिजली के लिए मंज़ूरी लेने (22), ऋण स्वीकृत करने (25), निर्माण कार्य हेतु मंज़ूरी प्राप्त करने (27), एवं दिवालियापन के मुद्दों को सुलझाने (52) में भारत की रैंकिंग में काफ़ी सुधार होकर वैश्विक स्तर पर प्रथम 50 देशों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। परंतु, शेष अन्य 5 मदों, यथा अनुबंध पत्रों को लागू करने (163), प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करने (154), नया व्यवसाय प्रारम्भ करने (136), टैक्स सम्बंधी मुद्दे सुलझाने (115), एवं विदेशी व्यापार करने (68) में अभी भी हम वैश्विक स्तर पर अन्य देशों से काफ़ी पिछड़े हुए हैं। मदों के नाम के आगे भारत की वर्ष 2019 की रैंकिंग दी गई है। अभी भी यदि भारत को विश्व के प्रथम 25 देशों में अपनी जगह बनाना है तो अब केंद्र सरकार से साथ साथ राज्य सरकारों को भी अपने स्तर पर कई आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को लागू करना होगा।

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का अच्छा परिणाम अब दिखने लगा है एवं भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। यह वर्ष 2016-17 में 4348 करोड़ अमेरिकी डॉलर, 2017-18 में 4486 करोड़ अमेरिकी डॉलर, 2018-19 में 4437 करोड़ अमेरिकी डॉलर, 2019-20 में 4998 करोड़ अमेरिकी डॉलर एवं 2020-21 में अप्रेल से सितम्बर 2020 तक 3000 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया है।

देश में अब कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। विकास दर को पुनर्जीवित करने के लिए इस तरह के निर्णय लेना भी बहुत ज़रूरी हैं। पिछले वर्ष तकनीकी के क्षेत्र में बहुत बड़ी राशि का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है। इस क्षेत्र में भारत ने बहुत अच्छा कार्य किया है। इसी रफ़्तार को बनाए रखना अब आवश्यक हो गया है। साथ ही, अब सप्लाई चैन एवं विनिर्माण के क्षेत्र में भी विदेशी निवेश को आकर्षित करना होगा। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को लागू करने के साथ ही इन क्षेत्रों में भी विदेश निवेश के बढ़ने की संभावनायें अब प्रबल हो गई हैं। परंतु, भारत को नए नए उद्योग स्थापित करने हेतु किए जा रहे अनुबंध पत्रों को लागू कराने एवं टैक्स सम्बंधी मुद्दों का शीघ्र निपटारा करने के लिए भी अब नीतियों का निर्माण करना होगा ताकि विदेशी निवेशकों को भारत में व्यापार करने में आसानी हो एवं इस ओर उनका विश्वास उत्पन्न हो सके। साथ ही, देश में नया व्यवसाय स्थापित करने सम्बंधी नियमों को भी आसान बनाना अब ज़रूरी हो गया है। नया व्यवसाय प्रारम्भ करने सम्बंधी रैंकिंग में भारत का विश्व में 136वां स्थान है, जबकि चीन का 27वां स्थान है। इसी कारण चीन विनिर्माण के क्षेत्र में पूरे विश्व के लिए एक पावर हाउस बन गया है। चीन में नया व्यापार स्थापित करना बहुत ही आसान है। भारत को भी इस क्षेत्र में सोचना होगा। नया व्यापार प्रारम्भ करने के लिए ज़मीन की ज़रूरत होती है, बिजली की ज़रूरत होती है, आदि और इस प्रकार के क्षेत्र हमारे देश में राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते है। अतः इन क्षेत्रों में सुधार कार्यक्रम लागू करने के लिए राज्य सरकारों को निर्णय लेने होंगे एवं इस सम्बंध में नियमों को आसान बनाना होगा। उत्तर प्रदेश की सरकार ने ज़मीन एवं बिजली को आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लैंड बैंक की स्थापना, आदि जैसे कुछ अच्छे निर्णय लिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश में वहां की सरकार द्वारा कुछ जिले चिन्हित किए गए हैं जहां पर केवल एक ही तरह के उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। जैसे, आगरा में फुटवेयर उद्योग, अलीगढ़ में ताला उद्योग, आदि। इस तरह की क्लस्टर नीति को लागू करने के कारण एक ही तरह के उद्योग एक ही जिले में स्थापित किए जा रहे हैं जिसके चलते इन उद्योगों को आने वाली समस्यायों का हल भी बहुत आसानी से कर लिया जाता है, क्योंकि सामान्यतः इन उधोगों की समस्यायें अक्सर एक जैसी होती हैं।

मानव शक्ति, भारत के लिए सबसे बढ़ी ताक़त है। यदि भारत में उपभोग को प्रेरणा दें तो उत्पादों के लिए भारी मांग उत्पन्न की जा सकती है, जिसके कारण निजी क्षेत्र अपने आप इन क्षेत्रों में अपना निवेश बढ़ाएगा। भारत की अर्थव्यवस्था वैसे भी उपभोग आधारित ही है। देश में यदि उपभोग बढ़ता है तो निजी निवेश भी बढ़ेगा ही।

कोरोना महामारी के दौरान चीन के अन्य देशों के साथ हुए व्यवहार के चलते चीन से बहुत कम्पनियां अपनी विनिर्माण इकाईयों को भारत, वियतनाम आदि देशों में ले जा रही हैं। भारत सरकार ने इस अवसर को अच्छे तरीक़े से समझा है और इस क्षेत्र में काफ़ी काम भी किया है। परंतु, अब समय आ गया है कि भारत में भी टैक्स एवं सब्सिडी को विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप ढाला जाय क्योंकि अन्यथा की स्थिति में विशेष रूप से विनिर्माण एवं निर्यात के क्षेत्र में अन्य देश भारत के खिलाफ शिकायतें करते रहते हैं। वियतनाम ने अपने देश में टैक्स एवं सब्सिडी को विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप ढाल लिया है जिसके कारण विदेशी कम्पनियां वियतनाम में अपनी विनिर्माण इकाईयों को स्थापित करने के लिए प्रेरित हो रही है एवं चीन से जो इकाईयां विस्थापित हो रही हैं उनमें से अधिकतर इकाईयां वियतनाम ही जा रही हैं।

हमारे देश में लोजिस्टिक लागत, ज़मीन की लागत, बिजली की लागत बहुत अधिक हैं। हमें प्रयास करने होंगे कि किस प्रकार इन लागतों को कम किया जाय जिससे विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सके। इन लागतों के कम होने से देश में उत्पादित किए जा रहे उत्पाद की कुल लागत भी कम होने लगेगी एवं हमारे देश में उत्पादित उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

भारत की अब फ़ार्मा, ऑटोमोबाइल, इनफ़ोरमेशन टेक्नोलोजी, ऊर्जा, आदि क्षेत्रों में विकसित देशों में गिनती होने लगी है। इसी कारण से देश में कोर सेक्टर्स में विदेशी निवेश लगातार बढ़ा है परंतु अब नए क्षेत्र भी तलाशने होंगे। जैसे, बाग़वानी, कृषि आधारित उद्योग, टूरिज़म, विनिर्माण, शिक्षा, आदि क्षेत्रों में भी विदेशी निवेश को आकर्षित करना होगा। इन सभी क्षेत्रों में निवेशक फ़्रेंड्ली नीतियों का निर्माण करना होगा। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से रोज़गार के बहुत अधिक नए अवसर उत्पन्न होंगे। जेनेरिक दवाईयों का भारत से निर्यात 2000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो रहा है, जेनेरिक दवाईयों की क़ीमत नॉन-जेनेरिक दवाईयों की तुलना में लगभग 1/10वां हिस्सा ही रहती है अतः भारत से जेनेरिक दवाईयों का निर्यात दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। भारत के अस्पतालों में भी विशेस रूप प्राइमरी हेल्थ सेंटर में भी यदि जेनेरिक दवाईयों की उपलब्धता बढ़ाई जाती है तो आम जनता को इससे बहुत बड़ा लाभ होगा। भारत में स्वास्थ्य सम्बंधी टेक्नोलोजी में भी बहुत निवेश किया जा सकता है, क्योंकि देश में यूनिवर्सल हेल्थ केयर सिस्टम लागू किया जा रहा है।

शीघ्र ही वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए केंद्र सरकार द्वारा बजट प्रस्तुत किया जाने वाला है और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि उक्त वर्णित मुद्दों का समाधान इस बजट में निकाला जाएगा एवं इस सम्बंध में कई नई नीतियों की घोषणा की जाएगी।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App