Categories
बिखरे मोती

बिखरे मोती भाग-53

दिव्यता से सौम्यता मिलै, ये साथ चले श्रंगार
गतांक से आगे….
सजा सके तो मन सजा,vijender-singh-arya
तन का क्या श्रंगार।
दिव्यता से सौम्यता मिलै,
ये साथ चले श्रंगार ।। 628 ।।

भावार्थ यह है कि अधिकांशत: लोग इस नश्वर शरीर को ही सजाने में लगे रहते हैं जबकि उनका मन छह विकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईष्र्या तथा पांच क्लेशों अस्मिता, अविद्या, राग, द्वेष, और मृत्यु से दूषित रहता है। यदि श्रंगार ही करना है तो तन की अपेक्षा मन को सजाइये, चित्त को सजाइए सभी प्रकार के विकार और क्लेशों का प्रक्षालन कीजिए। ध्यान रहे आत्मा का निवास चित्त में होता है, कारण शरीर भ्ी यहीं रहता है। मृत्यु के समय जिस प्रकार का चित्त होता है, उसी प्रकार का चित्त प्राण के पास पहुंचता है। प्राण अपने तेज के साथ आत्मा के पास पहुंचता है। ‘प्राण’ ही तेज चित्त और आत्मा को अपने संकल्पों के अनुसार के लोक में ले जाता है। इसलिए अपने चित्त को दिव्य गुणों (ईश्वरीय गुणों) से सज्जित कीजिए। दिव्य गुणों से दिव्य आभामंडल बनता है और चेहरे पर सौम्यता आती है। यही अद्भुत सौंदर्य आत्मा और कारण शरीर के साथ जाता है। भाव यह है कि तन की अपेक्षा मन को अधिक निर्मल रखिए, क्योंकि यह आपके कारण शरीर का सर्वोत्तम गहना है, जो आपको अपवर्ग ही नही अपितु मोक्षधाम तक दिलाएगा।

ऊपर वाले ने रचा,
भेद भरा ये जहान।
एक आंख में आंसू है,
तो दूजी में मुस्कान ।। 629 ।।
अधिकांशत: लोग ऐसा सोचते हैं कि मेरे जीवन में सुख ही सुख हो, दुख कभी आए ही नही, परंतु परम पिता परमात्मा ने विपरीत शक्तियों से बनाया है-इस संसार को। अत: हमें इस शाश्वत नियम को मानकर चलना चाहिए। ध्यान रहे सुख का महत्व तभी तक है जब तक दुख है, धर्म का महत्व तभी तक है जब तक धरती पर पाप है, आराम का महत्व तभी तक है जब तक व्यायाम अथवा पुरूषार्थ है।
अन्यथा आप एक अवस्था में रहते-रहते ऊब जायेंगे। आप परिश्रम करते-करते जब थक जाते हैं तो बिस्तर पर जाकर रात को छह से आठ घंटे की गहरी नींद लेते हैं। यदि आप अपने बिस्तर पर चौबीसों घंटे पड़े रहेंगे तो इस अवस्था से भी आप ऊब जायेंगे। आपका जीवन गतिशून्य और नीरस हो जाएगा। जरा गौर से परमात्मा की इस प्रकृति को देखिए रात के पीछे दिन और दिन के पीछे रात बनायी है। इस विपरीत अवस्था से समस्त सृष्टिï गतिमान है और उसमें नवीनता और सरसता विद्यमान है। इसलिए निराश मत होओ, धैर्य मत खोओ, याद रखो, नदी के पानी का प्रवाह वहीं तेज होता है जहां उसे चट्टान अथवा किसी अवरोध से टकराना होता है। ठीक इसी प्रकार दुख रूपी चट्टान हमारी सोयी हुई शक्तियों को जाग्रत कर वेगवान करती है। संसार में जितने महापुरूष हुए हैं उनके जीवन में दुख की चट्टान ने ही उन्हें जुझारू बनाया है बहिर्मुखी से अंतर्मुखी बनाया और अपने गन्तव्य तक पहुंचाया है। जीवन में खुशियां थोड़ी, थोड़ी करके आती हैं, आंसू की बूंदों की तरह जीवन की सीढिय़ां चढ़ते चलिए और अपनी छोटी उपलब्धियों पर आनंद मनाते चलिए तथा प्रभु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते चलिए। जरा सोचिए, वह परमपिता परमात्मा कितना दयालु है? यदि वह रूलाता है अर्थात दुख देता है, तो सुख समृद्घि की मुस्कान भी तो वही देता है ताकि हमारा जीवन उत्साह और आकांक्षा से भरा हो, प्रवाहमान हो और अपने गंतव्य की ओर गतिमान हो। कितनी बड़ी कृपा है उसकी? जरा चिंतन कीजिए।
क्रमश:

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
kuponbet giriş
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano
ikimisli giriş
istanbulbahis giriş
betnano
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
meritbet
galabet giriş
galabet giriş
pashagaming giriş
grandpashabet giriş
betnano
ultrabet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bahislion giriş
betkolik giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano
almanbahis giriş
betmarino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano
betnano
grandpashabet giriş
casibom
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
betgar giriş
bahislion giriş
meritbet giriş
betplay giriş
meritbet giriş