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आज का चिंतन

आज का चिंतन-30/07/2013

प्रोत्साहन भले न दें

प्रतिभाओं की हत्या तो न करें

डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com
दुनिया में हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का जन्म होता रहा है और उनकी वजह से विश्व समुदाय को कुछ न कुछ प्राप्त होता ही है। भगवान ने मनुष्य को सभी प्राणियों में सबसे ज्यादा बुद्धि, कौशल और मौलिक प्रतिभाओं के साथ भेजा है और इस मामले में कोई किसी से कम नहीं है।यदि ये सारे लोग सकारात्मक बुद्धि के साथ रचनात्मक कर्म करने लगें तो दुनिया ही स्वर्ग बन जाए। लेकिन ऎसा हो नहीं पाता क्योंकि हममें से बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जो नकारात्मक विचारों, हराम की कमाई, स्वार्थों भरे,  औरों को दुःख देने, हिंसक वृत्तियों को अपनाने तथा लोगों का शोषण करने के कामों में लग जाते हैं और पूरी जिन्दगी इन बुराइयों से पिंड़ छुड़ा नहीं पाते।विश्व भर में  प्राचीन पौराणिक काल से लेकर आधुनिक सभ्यता और वैज्ञानिक युग के चरमोत्कर्ष वाले आज के युग तक असंख्य प्रतिभाओं ने दुनिया को नई दिशा-दृष्टि, जीवनयापन के संसाधनों और सहूलियतों भरी जिन्दगी के आविष्कारों से लेकर जाने क्या-क्या दे दिया है जिनकी वजह से हम आज सम्पूर्ण वैभव और चरम भोग-विलास भरी मौज-मस्ती के साथ जीवन जीने लगे हैं।इन प्रतिभाओं में से कई सारी तो दैवीय और दिव्य गुणों से सम्पन्न होने के कारण कुछ कर पायी और अपना नाम चिरस्मरणीय बना डाला। खूब सारे ऎसे थे जिन्हें उस जमाने में अच्छे लोगों और माहौल के कारण प्रोत्साहन मिला और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिली और वे कुछ कर दिखा पाने में सफल रहे।

लेकिन बहुसंख्य प्रतिभाएं हर युग में ऎसी भी रही हैं जिनमें अपार मौलिक प्रतिभाओं के बावजूद न प्रोत्साहन या संबल मिला, और न ही आगे बढ़ने लायक माहौल। ऎसे में असंख्य प्रतिभाओं का बीजांकुरण ही नहीं हो पाया और मनमसोस कर खट्टे और कड़वे अनुभवों के साथ संसार से विदा हो गए।बात हम अपने इलाकों की करें तो हमारे यहाँ भी अनगिनत प्रतिभाएं हुई हैं, होती रही हैं, और आज भी हैं। लेकिन इनमें से कुछ ही अपना नाम रौशन कर पायी। शेष सभी को जमाने ने खत्म कर दिया, कुछ अपनी कमजोरियों के कारण हार गए। और जो बचे हुए थे उन्हें अपने लोगों ने खत्म कर दिया।प्रतिभाओं की कहीं पर कोई कमी नही है लेकिन इनसे ज्यादा संख्या में हमारे यहाँ ऎसे लोग रहते हैं जो प्रतिभाओं के हत्यारे हैं। हर इलाके में ऎसे लोग होते हैं जिनकी पूरी जिन्दगी अपने से कहीं ज्यादा औरों की जिन्दगी में ताकने-झाँकने की होती है और ऎसे में ये लोग जमाने भर की ओर आँखें फाड़े हुए तकियाते रहते हैं, जाने कब कहीं से कुछ नया मसाला मिल जाए, जो उनके मलीनताओं व पाशविकता से परिपूर्ण मन-मस्तिष्क में ऊर्जा और ताजगी का संचार कर जाए।इन लोगों को दिन उगने से लेकर रात को पस्त होकर सो जाने तक यही खुराफात सूझती रहती है कि किस प्रकार औरों को परेशान किया जाए। खासकर समाज और क्षेत्र के लिए कुछ कर गुजरने का माद्दा रखने वाले, रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वाले, ईमानदार, निष्ठावान और सज्जन लोगों से लेकर सुनहरे भविष्य की तलाश में निकली प्रतिभाओं को किस प्रकार नीचे गिराया जाए, उनकी टाँग किस प्रकार खिंची जाए, कैंकड़ा और बिच्छू कल्चर को कैसे अपनाया जाए, और किस प्रकार उन लोगों को हतोत्साहित किया जाए जो आगे बढ़ने के लिए अपने बूते प्रयत्नशील हैं।समाज और देश के पिछड़ेपन और समस्याओं के लिए ये ही लोग कसूरवार हैं जो प्रतिभाओं के साथ अन्याय करते रहते हैं। इस वजह से समाज के प्रतिभाशाली लोग खिन्न रहने लगते हैं। ऎसे मूर्खों, नालायकों, हरामखोरों, नुगरों और कमीनों की टिप्पणियों और नापाक हरकतों की वजह से ये समस्याओं से घिर कर रह जाते हैं और उनका पूरा समय इन आसुरी वृत्ति वाले नालायकों की हरकतों पर डैमेज कंट्रोल तथा सम-सामयिक आपत्तियों के निवारण में खर्च हो जाता है।इसका सीधा सा खामियाजा इनके व्यक्तित्व पर पड़ता है जो कि भरपूर प्रतिभाओं के होते हुए इन विघ्नसंतोषियों की वजह से पिछड़ जाता है। हर इलाके में ऎसे खूब सारे लोग हैं जो खुद कुछ नहीं बन पाए, औरों की रोटियों और पैसों पर पलते रहे, पराश्रित और परजीवी रहकर हराम का दाना-पानी लेते रहे हैं।

यही वे लोग हैं जो हर इलाके में प्रतिभाओं के हत्यारे बने हुए हैं और इन्हीं की वजह से प्रतिभाएं विवश होकर हमारे अपने क्षेत्र से पलायन कर इनसे मुक्ति पा लेती हैं। अन्ततोगत्वा ऎसे नालायकों की वजह से नुकसान हमारे क्षेत्र को ही उठाना पड़ता है। हमें इस बात का अंदाजा आज नहीं लग पाता क्योंकि हमारी बुद्धि और मन पर भी स्वार्थ की काई जमी हुई है। इन चंद कमीनों की सजा सदियों तक अपने क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों को भुगतनी पड़ती है। आज ही तय कर लें कि हम कितने ही महान, लोकप्रिय और बड़े क्यों न बन बैठे हों, हमारे अपने इलाकों की प्रतिभाओं को कोई प्रोत्साहन भले हम न दे सकें, कम से कम उनकी हत्या का घृणित काम तो न करें।

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