Categories
भारतीय संस्कृति व्यक्तित्व

देश धर्म की उन्नति के लिए समर्पित होकर प्रचार किया और ऋषि भक्त चमनलाल रामपाल जी ने

ओ३म्

================
आर्यसमाज का आठवां नियम है कि अविद्या का नाश तथा विद्या की वृद्धि करनी चाहिये। आर्यसमाज ने इस नियम का पालन करते हुए देश देशान्तर से अविद्या दूर करने के अनेक उपाय किये जिनसे देश में जागृति व परिवर्तन आया है। ज्ञान का प्रचार व प्रकाश मौखिक व्याख्यानों तथा लेखन आदि के द्वारा किया जाता है। देहरादून में वयोवृद्ध विद्वान श्री चमनलाल पाल जी ने अपने जीवन को लेखन द्वारा प्रचार के कार्यों में समर्पित किया है। इन दिनों 97 वर्ष की आयु पूरी कर वह देहरादून में अपनी धर्मपत्नी माता श्रीमती संयोगिता जी के साथ निवास करते हैं। शरीर दुर्बल हो गया है तथा एक पैर की हड्डी भी टूट गई है। अतः आपका समय बिस्तर पर लेट व बैठ कर ही व्यतीत होता है। हमने उनसे भेंट कर उनके समाचार जाने हैं। आज भी उनके अन्दर ऋषि दयानन्द व आर्यसमाज के प्रति प्रेम व कृतज्ञता सहित देशभक्ति की भावनायें भरी हुई हैं जिनकी अभिव्यक्ति उनसे बातचीत करते हुए बीच बीच में होती रहती है।

श्री चमनलाल रामपाल जी पिता पं. किशन चन्द तथा माता श्रीमती माया देवी की सन्तान हैं। आपका जन्म जिला गुरदासपुर में धारीवाल के निकट सोहल गांव में 15 दिसम्बर सन् 1922 को हुआ था। आपके पिता आढ़ती की दुकान करते थे। जब चमनलाल जी दस महीने के ही थे, तब सन् 1923 में पिता जी का देहावसान हो गया था। आपकी माता जी का देहावसान 80 वर्ष की आयु में 1 जनवरी, 1991 को हुआ। चमनलाल जी का भाई कोई नहीं था, केवल दो बहिनें थी। चमनलाल रामपाल जी के दो पुत्र व एक पुत्र हुईं। इनका एक पुत्र विद्युत इंजीनियर रहा है जो वर्तमान में कुरुक्षेत्र-हरयाणा में अपने परिवार के साथ निवास करता है। एक अन्य पुत्र अम्बाला-हरयाणा में रहते हैं और अपने कार्य से सेवानिवृत होकर किसी अन्य व्यवसायिक फर्म में कार्य कर रहे हैं। आपकी पुत्री ने भूगोल में एम.ए. पीएचडी किया था। उनका विवाह पटियाला के एक एम.बी.बी.एस., एम.डी. डाक्टर के साथ हुआ था। इन दिनों वह वहीं अपने परिवार के साथ रहती हैं। देहरादून में अपने बड़े मकान में श्री चमनलाल जी अपनी धर्मपत्नी के साथ निवास करते हैं। दोनों ही वृद्ध हैं इसलिये आपने सफाई, भोजन व स्नान आदि कराने के लिये अनेक नौकर व नौकरानियां रखे हुए हैं जो आपकी सेवा करते हैं जिससे आप 98 वर्ष करतु हुए भी जीवित हैं और अपने आवश्यक कार्य करते हैं। आप पूर्ण स्वावलम्बी हैं। आपके पास जीवन यापन के साधन हैं। अतः आप अपनी सन्तानों से जीवनयापन हुतु धन नहीं लेते हैं। पिता की मृत्यु के बाद बचपन में आपका पालन पोषण आपकी माता जी ने आपके चाचा पं. दुर्गादास जी के सहयोग से किया था।

श्री चमनलाल रामपाल जी की आरम्भिक व प्राथमिक शिक्षा सोहल गांव में ही हुई। इसके बाद आपने डी.ए.वी. स्कूल व कालेज, धारीवाल से बी.ए. पास किया था। आपने ज्ञानी की परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। श्री चमनलाल जी की नियुक्ति रक्षा मंत्रालय में हुई थी। आपने यहां कार्यालय सुपरिन्टेण्डेण्ट के पद पर कार्य किया था। यहां कार्य करते हुए आपकी प्रोन्नति प्रकाशनिक अधिकारी के पद पर हुई थी। आपने सेवानिवृति की आयु से 11 वर्ष पहले ही सेवानिवृति ले ली थी। आपकी बहिन के श्वसुर उद्योगमंत्री रहे हैं। उनके परामर्श से आपने सेवानिवृत्ति के बाद 7 वर्ष तक पंजाब में रहकर साईकिल के पुर्जें बनाने का उद्योग लगाया था। चमनलाल जी पर आर्यसमाज के संस्कार डी.ए.वी. स्कूल व कालेज, धारीवाल में पड़े थे। वहां यज्ञ व हवन होता था तथा आर्य समाज के विद्वानों के प्रवचन होते थे। प्रत्येक शनिवार को आर्य कुमार सभा का अधिवेशन हुआ करता था जिसमें आप भाग लेते थे। इससे आपमें आर्यसमाज के साहित्य के स्वाध्याय की प्रवृत्ति भी उत्पन्न हुई थी। आपने वेदभाष्य सहित ऋषि के लिखे प्रायः सभी ग्रन्थों को कई बार पढ़ा है। आपने अपने सरकारी सेवा काल व उसके पश्चात दिल्ली व शिमला सहित कानपुर में तीन वर्ष निवास किया। आप शिमला तथा देहरादून में आर्यसमाज के सदस्य व अधिकारी रहे हैं।

लेखन के क्षेत्र में श्री चमनलाल रामलाल जी का उल्लेखनीय योगदान है। आपने लगभग चालीस पुस्तकें लिखी हैं। वर्तमान में भी आपकी पुस्तकें प्रकाशित होती रहती हैं। लेखन के क्षेत्र में आपने देशभक्ति व देश के हितों को ध्यान में रखकर महापुरुषों के जीवन परक साहित्य सहित इतर अनेक विषयों पर लेखनी चलाई हैं। आपकी कुछ पुस्तकों के नाम हैं 1-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, 2- अज्ञेय योद्धा महाराणा प्रताप, 3- वीर शिरोमणि महाराजा पृथ्वीराज चैहान, 4- कृष्ण-नीति, 5- हिन्दू समाज पर बलिदान, 6- शहीदों की सुलगती राख, अतीत, वर्तमान और भविष्य का आर्यसमाज, 7- बटता पंजाब जलता शबाब, 8- भारत का मूल आधार गौवंश, 9- वीर वैरागी बन्दा बहादुर तथा 10- वीर हकीकत राय आदि। आप बताते हैं कि देश दुबारा गुलाम न हो, इसलिये आपने प्रेरक साहित्य लिखा है। श्री चमनलाल जी ने हिन्दी तथा पंजाबी में कवितायें भी लिखी हैं। आपका एक कविता संग्रह चमन-पुष्प के नाम से प्रकाशित है। इसका दूसरा संस्करण सन् 2009 में प्रकाशित हुआ था। ऋषि भक्त चमनलाल जी ने ‘बेवफा कौन’ आदि कई उपन्यास तथा नाटक भी लिखे हैं। इससे आपके बहुप्रतिभाशाली व्यक्तित्व के दर्शन होते हैं। आपने अपने ग्रन्थों को स्वस्थापित संस्था चमन प्रकाशन के नाम से प्रकाशित किया है। चमन लाल जी ने आर्यसमाज के पुराने विद्वानों को अनेकों बार सुना है। पं. रामचन्द्र देहलवी तथा महात्मा हंसराज जी आदि शीर्ष विद्वानों को आपने अनेकों बार सुना है।

्री चमनलाल रामपाल जी को समय समय पर देहरादून के अनेक आर्यसमाजों ने सम्मानित किया हैं। आपने बताया कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे श्री नित्यानन्द स्वामी, भी भगतसिंह कोश्यारी तथा श्री भुवनचन्द खण्डूरी आदि द्वारा आपको सम्मानित किया गया है। आपको अग्निहोत्री धर्मार्थ न्यास द्वारा दिनांक 12 मई, 2013 को वेदरत्न सम्मान से भी सम्मानित किया है। चमनलाल जी ने बताया कि उन्होंने सड़कों पर खड़े होकर प्रचार किया है। उन दिनों लोग आर्यसमाज के प्रचार को बड़े उत्साह से सुनते थे। वर्तमान में आर्यसमाज का प्रचार पहले के समान नहीं हो रहा है। उनके अनुसार आर्यसमाज की वर्तमान की स्थिति निराशा उत्पन्न करती है। श्री चमनलाल रामपाल जी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कश्मीर से धारा 370 को हटाने का कार्य एक ऐतिहासिक कार्य है। वह कहते हैं श्री नरेन्द्र मोदी का देश का प्रधानमंत्री बनना भी उन्हें एक दैवीय कार्य लगता है। देहरादून के डा. वेदप्रकाश गुप्त जी श्री चमनलाल रामपाल जी के अभिन्न मित्र रहे हैं। आप दोनों आर्यसमाज के प्रचार व संगठन का कार्य उत्साह के साथ करते थे। डा. गुप्त जी ने अनेक गुरुकुल खोले हैं। उनका द्रोणस्थली कन्या गुरुकुल सरकार से मान्यता प्राप्त है तथा यहां कई स्नातिकायें तैयार हुई हैं। आर्य विदुषी डा. अन्नपूर्णा जी इस गुरुकुल की आचार्या हैं। हमने श्री चमनलाल जी से उनकी इच्छायें भी पता की। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि देश के सभी विद्वान व नेताओं को मिलकर आर्यसमाज को जीवित करना चाहिये। वह चाहते हैं कि आर्यसमाज का ऐसा प्रचार हो कि कोई मत-मतान्तर व उनके आचार्य आर्यसमाज की वैदिक मान्यताओं को अस्वीकार न कर सकें। उन्होंने कहा कि हमें आर्यसमाज को सशक्त बनाने पर विचार व कार्य करना चाहिये।

श्री चमनलाल जी ने बताया कि वह बचपन में एकबार गांघी जी से मूसरी में मिले थे। उन्होंने गांधी जी को कहा था कि उन्हें अंग्रेजों की नौकरी करना पसन्द नहीं है। इसके उत्तर में गांधी जी ने कहा था कि तुम वही काम करना जो तुम्हें ठीक लगे। नौकरी का त्याग करने का गांधी जी ने समर्थन नहीं किया था। वह बताते हैं कि उनको पांच मिनट का समय दिया गया था लेकिन एक मिनट बाद ही उनको आगे बात करने से मना कर दिया गया। इसका कारण था कि नेहरु जी गांधी से मिलने आ रहे थे। यह जानकारी उन्हें गांधी की निजी सचिव राजन्दिर कौर जी ने बताई थी। श्री चमनलाल जी दो महीने बाद 14 दिसम्बर 2020 को अपने जीवन के 98 वर्ष पूरे कर लेंगे। इस आयु में जीवन जीना कई प्रकार से कठिन होता है। इस अवस्था में परिवार के अधिक से अधिक लोग साथ हों तो समय अच्छा व सुख शान्ति से व्यतीत होता है। सौभाग्य से माता संयोगिता जी एक छाया कीतरह दिन भर उनके पास ही बैठी रहती हैं। श्री चमनलाल जी या तो लेटे रहते हैं या बैठ जाते हैं। माता सयोगिता जी कुर्सी पर उनके पास ही बैठी रहकर उनसे बातें करती रहती हैं। चमनलाल जी अपने परिचारकों वा सेवकों की सेवा से सन्तुष्ट हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह और उनकी धर्मपत्नी माता संयोगिता जी दोनों स्वस्थ रहें। उनको कोई विशेष कष्ट न हो। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
betgaranti
betgaranti giriş
kolaybet
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş