Categories
आज का चिंतन

आज का चिंतन-08/09/2013

सुकून चाहें तो अपनाएँ

स्थानीय परंपराओं को

– डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

लोक जीवन और परिवेश में परिवर्तन का क्रम सदैव बना रहता है और उसी के अनुरूप दुनिया के सभी क्षेत्रों में जनजीवन को ऊर्जा से सिंचित करने तथा ताजगी बनाए रखने के साथ ही परंपराओं के निर्वाह के लिए उत्सव, पर्व और मेलों का प्रचलन आदिकाल से रहा है जब से मनुष्य ने सभ्यता को ओढ़ना आरंभ किया।

हर क्षेत्र विशेष के लिए अपने अलग-अलग रीति-रिवाज, रहन-सहन के ढंग और पर्व-उत्सव, मेले एवं अन्य आयोजन होते हैं। यह जरूरी नहीं कि एक स्थान पर होने वाले आयोजन किसी दूसरे स्थान पर सफल हो ही जाएं या एक जगह की गतिविधियां और परंपराएं दूसरे स्थानों में रहने वाले लोगों को भा ही जाएं।

हर क्षेत्र की भौगोलिक एवं पारिस्थितिकीय आबोहवा एवं लोकजीवन से जुड़ी रस्मों के अनुरूप वहाँ के पर्व-उत्सव एवं मेले तथा अन्य सार्वजनिक आयोजन होते हैं। ये ऋतुओं तथा मौसम के बदलाव, खेती-बाड़ी, फुर्सत आदि सभी प्रकार के कारकों से जुड़े हुए होते हैं।

इसलिए यह सच्चे अर्थों में स्वीकारा गया है कि सभी क्षेत्रों के लिए अपनी अलग-अलग परंपराओं के बावजूद इन सभी का मूल उद्देश्य मानव समुदाय और इससे जुड़े हुए तमाम कारकों को आनंदित और उल्लसित करना है।  यही कारण है कि  हमारे यहाँ एकरसता और जड़ता नहीं है बल्कि विभिन्नताएं हैं और उनका भी अपना अलग ही आकर्षण है। इन्हीं की बदौलत लोक जीवन की धाराएं और उपधाराएं संचालित होती हैं।

बात देश के किसी भी क्षेत्र की हो अथवा दुनिया के किसी कोने की। हर क्षेत्र में परंपराएं स्थानीय कारकों द्वारा संचालित और प्रभावी हैं और यही कारण है कि क्षेत्र विशेष की लोक लहरियों को देखने और अनुभव करने का आनंद सदियों से विद्यमान अपने क्षेत्रों में ही आता है, इनसे इतर इलाकों में वो आनंद अनुभव नहीं किया जा सकता।

इस यथार्थ के बावजूद आजकल अपने देश में देखादेखी फैशन और नकलची भक्ति की ऎसी बुराई घर कर गई है कि इसने धर्म का अभेद्य सुरक्षा कवच ओढ़ लिया है और इसकी आड़ में समाज की पुरातन परंपराओं की हत्या हो रही है।

इन्हीं आधुनिक नकलची परंपराओं में शुमार हो चला है गणेशोत्सव का मूत्रि्त कुंभ। यह आमतौर पर समुद्री क्षेत्र महाराष्ट्र तथा उन इलाकों में में प्रचलित था जो समंदर के किनारे हैं, लेकिन अब पूरे देश में फैल चुका है। जबकि देश भर में अलग-अलग स्थानों पर इन दिनों गणेश उपासना और उत्सव की कई अन्य विधियां और परंपराएं रहीं हैं लेकिन फैशनपरस्ती के दौर में सारी पुरानी परंपराओं और उपासना पद्धतियों पर अब गणेशोत्सव की मूत्रि्तयाँ हावी हैं। और इनमें भी प्रतिस्पर्धा यह कि कहां कितनी बड़ी मूत्रि्त है।

इससे समाज को किन दुष्प्रभावों से गुजरना पड़ रहा है उसकी चिंता किसी को नहीं है। इसी प्रकार कुछ वर्ष से दशामाता की मूत्रि्तयां बनाकर इनके विसर्जन का दौर शुरू हो चुका है जबकि अपने यहां इसकी कोई परंपरा कभी नहीं रही। धर्म के नाम पर धंधा करने वाले लोगों को अच्छी तरह पता है कि आम लोगों की जेब से पैसे निकलवाने के लिए धर्म सबसे बढ़िया और सुरक्षित धंधा है और इसके नाम पर लोगों से चाहे जो करवा लो। इसलिए इन लोगों ने गणेशमूर्तियों, दशामाता मूर्तियों का धंधा आरंभ कर दिया। यही स्थिति कावड़ यात्रा की है जिसका अपने इलाकों में कुछ वर्ष पूर्व नगण्य प्रभाव था लेकिन आज ये महोत्सव और मेले का रूप ले चुके हैं।

बाहरी परंपराओं को चाहे-अनचाहे स्वीकार कर लिए जाने से हालात ये हो गए हैं कि सदियों से चली आ रही शांतिपूर्ण व स्थानीय उपासना पद्धतियों का प्रभाव नष्ट हो गया है और अब धर्म के नाम पर फैशन का वो दौर चल पड़ा है जिसमें हमें भगवान या उनकी कृपा से कोई सरेाकार नहीं है, हमें चन्दे और उत्सवों से मतलब है जहाँ पराये पैसों से कुछ दिन मुफतिया आनंद पाने का जतन हावी है।

जबकि असल में हमारी मौलिक परंपराओं में न पैसे की जरूरत थी और न ही संसाधनों या मूत्रि्तयों की। एक गरीब से गरीब आदमी भी धार्मिक आयोजनों में बराबरी की भागीदारी निभाता था और श्रद्धा का साकार स्वरूप सामूहिक आनंद का ज्वार उमड़ाता था।

आज श्रद्धा और आस्था नहीं है, पराये पैसों से उत्सवी आनंद पाने का उतावलापन है और पैसों की माया से भगवान को रिझाने के जतन मुँह बोल रहे हैं। धर्म और परंपराओं का मौलिक स्वरूप बनाए रखें तथा नकल की फैशन छोड़ें, इसी में अपना, अपने इलाके का भला है। भगवान को शांत रहने दें और उपासना में शोरगुल और धंधेबाजी छोड़कर गंभीरता लाएं, वरना कहीं के नहीं रहेंगे हम।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
xslot giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş