न्यायपालिका के पंख कुतरने की कोशिश

“यह आरोप मेरी बढ़ती लोकप्रियता के कारण विरोधियों ने साजिश के तहत लगाया है” – ”मुझे भारत की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है” – आदि आदि —पिछले २-३ दशकों से आरोपी रहनुमाओं के ऐसे खोखले बयान सुन सुनकर हम सभी आजिज हो गए हैं। जब जब न्यायालय द्वारा देशहित में कोई महत्वपूर्ण फैसला दिया है जो तथाकथित ”रहनुमाओं” के हित के विपरीत जाता है तो युद्ध-स्तर पर सरकार संसद द्वारा न्यायिक व्यवस्था के पंख कुतर दिए जाते हैं। हमारे आपके सामने शाहबानो प्रकरण से लेकर आज तक कई उदाहरण हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय से दागी रहनुमाओं को सीधा सीधी बचाने की दिशा में वर्तमान सरकार द्वारा २४-०९-२०१३ को लाया गया यह अध्यादेश यही साबित करता है कि इन ”रहनुमाओं” को भारतीय न्याय प्रणाली पर कितना ”भरोसा” है?
रामायण में विश्व कवि तुलसी दास जी ने एक प्रसंग में लिखा है कि – ”को बड़ छोट कहत अपराधू” – आज यह कथन भारतीय लोकतंत्र के रक्षक ”माननीयों” के ऊपर शत-प्रतिशत लागू हो रहा है। किसको अच्छा कहें? सब तो”मौसरे भाई” हैं। कुछ थोड़े से सचमुच अच्छे प्रतिनिधि हैं, उनकी सुनता ही कौन है?
अब तक के ज्ञात सारे शासन-तंत्र में लोकतंत्र आज पूरी दुनिया में एक अच्छी शासन व्यवस्था के रूप में स्वीकृत है। लेकिन भारत में इस पवित्र व्यवस्था से भी अब दर्गन्ध आने लगी है।  लोकपाल विधेयक – जनहित की दिशा में एक सार्थक पहल – पिछले ४५ साल से सदन में लम्बित है लेकिन करीब ४५ दिनों में ही आरोपी ”जन प्रतिनिधियों” को बचाने के लिए अध्यादेश लाया गया और कम से कम ४५ बार सर्व सम्मति से ”माननीयों” के वेतन-भत्ता में वृद्धि की गयी। कितना भद्दा मजाक है? अपनी एक गज़ल की कुछ पंक्तियों से बात समाप्त करूँ कि –

कौन संत है कौन लुटेरा

कहने को साँसें चलतीं पर जीवन है लाचार यहाँ
सत्ता की सारी मनमानी क्यों करते स्वीकार यहाँ

वतनपरस्ती किसके दिल में खोज रहा हूँ सालों से
नीति-नियम और त्याग-समर्पण की बातें बेकार यहाँ

संविधान को अपने ढंग से परिभाषित करते सारे
छीन लिए जाते हैं यारो जीने का अधिकार यहाँ

दिखलायी देती खुदगर्जी रिश्तों में, अपनापन में
टूटा गाँव, समाज, देश भी टूट रहा परिवार यहाँ

आजादी की अमर कहानी नहीं पढ़ाते बच्चों को
वीर शहीदों के सपने भी शायद हो साकार यहाँ

भूखे की हालत पर लिखना बिना भूख वो क्या जाने
रोजी रोटी पहले यारो कर लेना फिर प्यार यहाँ

कौन संत है कौन लुटेरा यह पहचान बहुत मुश्किल
असली नकली सभी सुमन के लोग करे व्यापार यहाँ
श्यामल सुमन

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