पूर्व-जन्म के संस्कारों से कुछ होता भी है ?

IMG-20200921-WA0004
  • ✍🏻अभिजीत सिंह
    _______________________

18 वीं सदी के उतरार्ध में तब के पूर्वी बंगाल के खुलना में एक डॉक्टर हुए, नाम था कृष्णधन घोष. इधर देश भी मैकाले प्रणीत शिक्षा नीति से अभिशप्त था ऊपर से घोष साहेब विलायत से डॉक्टरी पढ़ कर आये थे इसलिये अंग्रेजियत उनके ऊपर अंग्रेजों से भी अधिक हावी थी. उन्हें भारत, भारतीयता, हिन्दू धर्म, हिन्दू-परंपरा और अपनी संस्कृति से बेइंतेहा चिढ़ थी. इसलिये जब उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई तो घर में सबसे कह दिया कि मेरे बेटे को दकियानूस और मूर्तिपूजक हिन्दू संस्कार से दूर रखा जाये. बेटा कुछ बड़ा हुआ तो उसे अंग्रेजों के स्कूल में अंग्रेज शिक्षकों के मातहती में छोड़ आये. पुत्र जब उस परवरिश से बाहर आया तो उसे सिवाय अंगरेजी और कोई भारतीय भाषा यहाँ तक की अपनी मातृभाषा बांग्ला भी नहीं आती थी. घर में नौकरों के कारण उस बालक ने थोड़ा बहुत हिंदी और बांग्ला सीख लिया तो पिता चिंतित हो गये कि ये जाहिलियत की ओर जा रहा है इसलिये सपरिवार पुत्र को लेकर विलायत चले गये और वहां बेटे को एक ईसाई पादरी के हवाले कर दिया और उसे सख्त निर्देश दिया कि उनके बच्चे को न तो किसी भारतीय से मिलने दे और न ही भारत के बारे में कोई जाकारी दी जाये. इसी बीच कृष्णधन घोष को एक और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, अब चूँकि उनका विलायती मन बेटे को हिन्दू नाम देने से भी हिचक रहा था इसलिये पुत्र का नाम जीसस के आरंभिक नाम पर इमैनुअल रखा.

कृष्णधन घोष के दोनों बेटों को पश्चिमी तालीम दी जाने लगी. लड़के को लैटिन, यूनानी, फ्रेंच से लेकर और भी कई यूरोपीय भाषायें सिखाई गई. मतलब ये कि युवावस्था पाने तक जन्मना हिन्दू कृष्णधन घोष के बेटों को हिन्दू संस्कार छू भी नहीं पाया था पर एक दिन कुछ कुछ ऐसा हुआ जिसने कृष्णधन घोष के बेटों का सब कुछ बदल कर रख दिया. हुआ यूं कि इन भाईयों के सामने एक ईसाई प्रचारक ने हिन्दू धर्म के बारे में कुछ अनर्गल बात कह दी. पूर्व जन्म का उत्तम संस्कार उन भाइयों के पश्चिमी परवरिश पर हावी हो गया और हिन्दू धर्म पर पादरी द्वारा लगाये आक्षेपों का उन भाइयों ने मुंहतोड़ जबाब दिया. एक झटके में उनके ऊपर से ईसाईयत का रंग उतर गया, पिता ने जबर्दस्ती आई० सी० एस० की परीक्षा में बैठाया, सभी विषयों में उत्तीर्ण हो गये पर उनका मन अंग्रेजों के सेवा के लिये तैयार नहीं था इसलिये उस परीक्षा के अंतिम पेपर में गये ही नहीं और फिर एक दिन भारत आ गये. भारत भूमि पर पहला कदम रखते ही उन्हें एक दिव्य अनुभूति हुई, समझ में आ गया कि परमात्मा ने उन्हें भारत में ही क्यों पैदा किया. ईसाई संस्कार में पले-बढ़े उस शख्स के हाथ में भगिनी निवेदिता की पुस्तक ‘काली माता’ लग गई, फिर उसके बाद तो पश्चिम के सारे कुसंस्कार धुल गये. अब वो सिर्फ भारत के लिये थे. यहाँ आकर अपनी मातृभाषा बांग्ला सीखी, हिंदी सीखा, संस्कृत सीखा, फिर वेदों का पारायण किया. सौभाग्य से योगी बिष्णु भास्कर भी उन्हें मिल गये जिन्होंने उनको योग की दिव्यता का एहसास कराया. ध्यान मग्न हुए तो प्रथम आध्यात्मिक अनुभूति हुई. उसी समय बंगाल अंग्रेजों की बंग-भंग की भारत-तोड़ो योजना शुरू हुई थी, वो कलकत्ता आ गये और खुलकर भारत के स्वाधीनता यज्ञ में कूद पड़े. उन्होंने युगांतर और वन्दे-मातरम् जैसी कालजयी अखबार निकाला. उनकी गतिविधियों से परेशान अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर कलकत्ता के अलीपुर जेल में डाल दिया. ये जेल उनके लिये वरदान साबित हुआ क्योंकि इसी जेल के अंदर उन्हें सत्य का साक्षात्कार हुआ, कृष्ण की गीता-वाणी सुनाई दी, भारत माता के दर्शन हुए, स्वामी विवेकानंद के शब्द सुनाई दिये जेल से निकल कर उत्तरपाड़ा में अपने ध्येय को देश के सामने रखते हुए कहा,

“जब यह कहा जाता है कि भारत महान बनेगा तब इसका अर्थ होता है कि सनातन धर्म महान बनेगा. जब भारत अपना विस्तार करेगा तब इंगित होता है कि सनातन धर्म अपना विस्तार कर सारे विश्व में फैलेगा. भारत धर्म के लिये एवं धर्म से ही जीवन्त है. धर्म की व्याख्या में ही राष्ट्र की व्याख्या भी है”

ये महापुरुष थे महर्षि अरविंद घोष और उनके भाई का नाम था प्रसिद्ध क्रांतिकारी वारीन्द्र घोष, ये वारीन्द्र घोष वही थे जिन्हें उनके पिता ने इमैनुअल नाम दिया था.

कहते हैं कि बच्चे को संस्कार तीन जगहों से मिलता है उसके घर से, उसके स्कूल से और उसके मित्र मंडली या समाज से. सवाल है कि अरविन्द और वारीन्द्र को हिंदुत्व और भारत भक्ति का संस्कार न तो घर से मिला, न स्कूल से मिला और न ही समाज से मिला फिर किस संस्कार ने उन्हें भारत-भक्ति सिखाई, अपने हिंदुत्व, भाषा, संस्कृति और परंपरा पर गर्व करना सिखाया? किस संस्कार ने बाईबिल पढ़ कर बड़े हुए अरविंदो को वेद-भाष्य करने को प्रेरित किया? जबाब एक ही मिलता है उनके पूर्व जन्म के पावन संस्कारों ने जिस पर कुछ अवधि के लिये भले कुसंस्कृति की गर्द जम गई थी पर जैसे ही कुछ पुण्यात्माओं का दर्शन हुआ वो सारे गर्द छंट गये.

याद रखिये, पूर्व जन्म के संस्कार उत्तम है तो जे०एन० यू० का कलुषित माहौल, जाकिर और बेनी हिल के लेक्चर और प्रेश्याओं का दुष्प्रचार भी आपको बिगाड़ नहीं सकता और अगर पूर्व जन्म के संस्कार कलुषित हैं तो संघ प्रचारकों या ऋषि-मुनियों का सानिध्य भी आपको सुधार नहीं सकता. पिछले जन्म पर तो हमारा वश नहीं है पर कम से कम इस जन्म में खुद को और अपनी संतति को ऐसे संस्कारित जरूर करिए कि आपका या उनका अगला जन्म भारत-भक्ति के संस्कारों से निर्मित हो ताकि भारत माँ और सनातन के लिए बलिदान होने वालों का कभी इस देश में अकाल न पड़े.

Comment:

hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
roketbet
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
holiganbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
Betgaranti Giriş
betgaranti girş
betnano giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
imajbet giriş
betasus giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
meritking giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş