ऎसे गुरु किस काम के

बिगड़ैल बने रहें जिनके शिष्य

– डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

गुरुओं के नाम पर आजकल चारों ओर खूब धमाल मची हुई है। पहले लोग कम हुआ करते थे और उसी अनुपात में गुरुओं की संख्या भी कम थी। आजकल हर तरफ जनसंख्या का भारी विस्फोट हो चुका है। इसी अनुपात में गुरुओं की जरूरत भी पूरी हो रही है।

हर इलाके में गुरुओं का बोलबाला है। गुरुओं की कई सारी किस्मे हैं। अब गुरु परंपरा में भी जाने कितने नवाचारों का इस्तेमाल हो चुका है। किसम-किसम के गुरुओं का संसार कोने-कोने में दृष्टिगोचर होने लगा है। शिष्यों को हमेशा तलाश बनी रहती है गुरु की, और तमाम प्रकार के गुरुओं को तीव्रता से तलाश रहती है अधिक से अधिक शिष्यों की।

यों देखा जाए तो अब गुरुओं के लिए शिष्यों का संख्या बल भी शक्ति परीक्षण का अखाड़ा बन चला है, फिर शिष्यों में बड़े कहे जाने वाले, महान और लोकप्रियों से लेकर धनाढ्यों की संख्या जिसके पास ज्यादा हो, वह समर्थ और सफल गुरु होने का दर्जा पा लेता है।

शिष्यों की तादाद बढ़ती है भेड़ों की तरह। जिसके पास प्रभावशाली लोग होंगे, लोग उन्हीं गुरुओं को सिद्ध और महान मानकर पंक्ति बनाते हुए नतमस्तक होते रहते हैं। शिष्यों की रेवड़ को इससे कोई मतलब नहीं होता कि गुरु कैसा है, उसका चाल-चलन कैसा है, कुछ दम है भी या नहीं।

शिष्यों की भीड़ उन लोगों को देखती है जो गुरुओं के पास होती है। इसीलिए खूब सारे सम सामयिक और चतुर गुरु अपना आभामण्डल और पूरा परिवेश उन लोगों से भरा हुआ रखते हैं जिनसे दूसरे लोगों को मोहपाश में बाँध कर आकर्षित किया जा सके और शिष्यों की संख्या में उत्तरोत्तर इज़ाफा होता रहे।

गुरुओं के लिए प्रभुत्व जमाने के दो ही प्रमुख माध्यम हैं। एक है शिष्यों की संख्या का विस्तार और दूसरा है कोने-कोने में आश्रमों के नाम पर अपनी गतिविधियों के लिए मठों की स्थापना। फिर बाकी चीजें तो अपने आप जुड़ती ही चली जाती हैं।

अपने यहाँ कोई किसी गरीब की सेवा नहीं करेगा, किसी क्षेत्र के लिए कोई सेवा-परोपकार का काम नहीं करेगा, गौरक्षा, गौसेवा के लिए आगे नहीं आएगा, मगर किसी गुरु ने कह दिया तो सर के बल चलकर सब कुछ लुटा देगा, भले ही बाद में पछतावे के सिवा कुछ न बचे।

आजकल शिष्यों और गुरुओं का ज्वार उमड़ा हुआ है। देश का कोई कोना ऎसा नहीं बचा है जहाँ इन दोनों किस्मों के भक्त और भगवान न हों। हर क्षेत्र में गुरुओं और शिष्यों का ध्रुवीकरण हो चला है। कबीलाई कल्चर की तरह हर खेमा एक-दूसरे को महान दर्शाने के लिए जी तोड़ कोशिशों में जुटा रहता है।

जात-जात के गुरुओं के भांति-भांति के शिष्यों का जमावड़ा अपने इलाकों में भी गुरु भक्ति के राग अलापता रहा है। गुरु से दीक्षा प्राप्त कर चुकने के बाद शिष्य में जो बदलाव आना चाहिए वैसा कहीं नहीं दिख रहा। कुछेक अपवाद हो सकते हैं मगर बहुसंख्य शिष्यों की स्थिति में कोई सुधार नहीं आ पाया है बल्कि गुरुजी से जुड़ने के बाद उनमें अतिरिक्त ऊर्जा और अभयदान मिलने के साथ ही ऎसे समूह का संबल व सान्निध्य भी प्राप्त हो गया है जो गुरु के नाम से कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहता है।

अपने माँ-बाप और गुरु की सेवा न हो तो कोई बात नहीं, अपने परिजनों के दुःखों के प्रति संवेदनशीलता न हो तो भी कोई बात नहीं, एकमात्र गुरु को भजते रहो, सारे पाप धुलते रहेंगे, गुरुओं का आखिर काम ही क्या रह गया है? शिष्यों के सारे अपराधों, बुरे कर्मों और पापों का शमन।

अपने यहाँ खूब सारे लोगों ने गुरुओं का आश्रय पा लिया है। ये गुरु इनके लिए किसी अभयारण्य से कम नहीं हैं जहाँ गुरु का स्मरण करते रहो, भजते रहो, और सारे काम करते रहो उन्मुक्त होकर। गुरुओं के इस मायावी संसार में जहाँ-तहाँ सिंपल से लेकर वीआईपी गुरुओं का जमघट है। लगता है यह संसार अब गुरुओं का अजायबघर ही हो चला है।

खूब सारे ऎसे गुरुघंटाल हैं जिनके एकाधिक गुरु हैं जबकि ढेरों लोग ऎसे मिल जाएंगे जो लाभ-हानि को देखकर गुरु बदलने के आदी हो चले हैं। इन तमाम प्रकार के गुरुओं की भक्ति करने वाले, उनके दिए गुरु मंत्र का जप करने वाले, अपने आपको बड़े से बड़े महान गुरु का दीक्षित शिष्य बताने वाले लोगों का रैला हर कहीं दिखाई देने लगा है।

पर आम आदमी की समझ से यह बाहर है कि इतने सारे गुरुओं के अनगिनत शिष्य होने के बावजूद समाज में बदलाव क्यों नहीं आ पा रहा है। बात समाज के बदलाव की ही क्यों करें, इनके शिष्यों की जीवनचर्या और व्यवहार में भी कोई फर्क नहीं आ पाया है। न लोगों की मानसिकता बदली है, न घर के कलह थमे, न शिष्यों में शुचिता आ पायी है, न लोकमंगल की दृष्टि। उलटे ध्धेबाजों के जाने कितने समूह जुड़ते चले जा रहे हैं।बल्कि यों कहें कि कितने सारे तो ऎसे हैं जिन्हें धार्मिक कहे जाने पर भी शर्म का अनुभव होता है। आखिर कमी कहाँ रह गई-गुरुओं में या शिष्य में, या फिर और कहीं। हम सभी समझदार हैं। सभी ज्ञात-अज्ञात गुरुओं और उनके चेले-चपाटियों के प्रति हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करने को जी चाहता है।

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis