सुरक्षा परिषद ने ट्रंप की लू उतार कर रख दी

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक

अमेरिका ने ईरान पर लगे हथियार खरीदने के प्रतिबंधों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन 15 सदस्यों वाली इस सुरक्षा परिषद में सिर्फ एक सदस्य ने उसका समर्थन किया। उसका नाम है— डोमिनिकन रिपब्लिक।

पिछले कुछ दिनों में अमेरिका एक बार उठ गया और एक बार गिर गया। वह उठा तब जबकि इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात (यू.ए.ई.) में समझौता हो गया और वह गिरा तब जबकि सुरक्षा परिषद में वह ईरान के विरुद्ध बुरी तरह से पछाड़ खा गया। इस्राइल की स्थापना 1948 में हुई लेकिन पश्चिम एशिया के राष्ट्रों में से सिर्फ दो देशों ने अभी तक उसे कूटनीतिक मान्यता दी थी। एक मिस्र और दूसरा जोर्डन। ये दोनों इस्राइल के पड़ौसी राष्ट्र हैं। इन दोनों के इस्राइल के साथ जबर्दस्त युद्ध हुए हैं। इन युद्धों में दोनों की जमीन पर इस्राइल ने कब्जा कर लिया था लेकिन 1978 में मिस्र ने और 1994 में जोर्डन ने इस्राइल के साथ शांति-संधि कर ली और कूटनीतिक संबंध स्थापित कर लिये।

इस्राइल ने मिस्र को उसका सिनाई का क्षेत्र वापस किया और जोर्डन ने पश्चिमी तट और गाजा में फलस्तीनी सत्ता स्थापित करवाई लेकिन संयुक्त अरब अमीरात याने अबू धाबी के साथ इस्राइल का जो समझौता हुआ है, उसमें इस्राइल को कुछ भी त्याग नहीं करना पड़ा है। अबू धाबी इसी बात पर राजी हो गया है कि इस्राइल ने उसे आश्वस्त किया है कि वह पश्चिमी तट के जिन क्षेत्रों का इस्राइल में विलय करना चाहता था, वह नहीं करेगा। इस समझौते का श्रेय डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी सरकार ले रही है, जो वाजिब है। उसने ईरान के विरुद्ध इस्राइल, सउदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात आदि कई सुन्नी देशों का एक सम्मेलन पिछले साल पोलैंड में बुलाया था। उसी में इस्राइल और अबू धाबी का प्रेमालाप शुरू हुआ था। इस समझौते से ईरान और तुर्की बेहद खफा हैं लेकिन ट्रंप अपने चुनाव में इसका दोहन करना चाहते हैं। ट्रंप की टोपी में यह एक मोरपंख जरूर बन गया है।

लेकिन सुरक्षा परिषद ने ट्रंप की लू उतार कर रख दी है। अमेरिका ने ईरान पर लगे हथियार खरीदने के प्रतिबंधों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन 15 सदस्यों वाली इस सुरक्षा परिषद में सिर्फ एक सदस्य ने उसका समर्थन किया। उसका नाम है— डोमिनिकन रिपब्लिक। यह एक छोटा-सा महत्वहीन देश है। अमेरिका को ऐसी पराजय का मुंह पिछले 75 साल में पहली बार देखने को मिला है। यों भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन और कमला हैरिस के जीतने के आसार इतने बढ़ गए हैं कि दुनिया के राष्ट्र बड़बोले ट्रंप का ज्यादा लिहाज नहीं कर रहे हैं। चीन ने हाल ही में ईरान के साथ अरबों डॉलर खपाने का समझौता किया है और रूस के व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के साथ हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते पर एक शिखर सम्मेलन बुलाने का भी सुझाव दिया है। ट्रंप की टोपी में ईरान एक बिच्छू बना हुआ है।

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