कोरोना संक्रमण काल में तो मानव तस्करी को लेकर स्थिति और भयानक हुई है

images (4)

योगेश कुमार गोयल

कुछ स्वयंसेवी संगठनों के मुताबिक देश में मानव तस्करी के पीडि़तों की संख्या अस्सी लाख से ज्यादा हो सकती है, जिसका बड़ा हिस्सा बंधुआ मजदूरों का है। कोरोना संक्रमण काल में तो मानव तस्करी को लेकर स्थिति और बदतर हुई है।

पिछले दिनों भारत में मानव तस्करी को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट ‘ट्रैफिकिंग इन पर्संस रिपोर्ट-2020’ में भारत को गत वर्ष की भांति टियर-2 श्रेणी में रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सरकार ने वर्ष 2019 में मानव तस्करी जैसी बुराई को मिटाने के लिए अपनी ओर से प्रयास तो किए लेकिन इसे रोकने से जुड़े न्यूनतम मानक हासिल नहीं किए जा सके। रिपोर्ट के अनुसार भारत आज भी वर्ल्ड ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मानचित्र पर एक अहम ठिकाना बना हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इस रिपोर्ट के अनुसार माओवादी समूहों ने हथियार और आईईडी को संभालने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड इत्यादि में 12 वर्ष तक के कम उम्र बच्चों को जबरन भर्ती किया और कभी-कभी मानव ढाल के तौर पर भी उनका इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व में माओवादी समूहों से जुड़ी रही कुछ महिलाओं और लड़कियों ने बताया कि कुछ माओवादी शिविरों में यौन हिंसा भी की जाती थी। सरकार विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जम्मू-कश्मीर में भी सशस्त्र समूह 14 वर्ष तक के कम उम्र किशोरों की लगातार भर्ती और उनका इस्तेमाल करते रहे हैं।

कुछ स्वयंसेवी संगठनों के मुताबिक देश में मानव तस्करी के पीड़ितों की संख्या अस्सी लाख से ज्यादा हो सकती है, जिसका बड़ा हिस्सा बंधुआ मजदूरों का है। कोरोना संक्रमण काल में तो मानव तस्करी को लेकर स्थिति और बदतर हुई है। सीमा पार से भी मानव तस्करी की घटनाएं इन दिनों बढ़ी हैं, जिसे देखते हुए बीएसएफ द्वारा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अलर्ट जारी किया गया है। दरअसल बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि कोलकाता, गुवाहाटी, पूर्वोत्तर भारत के कुछ शहरों और दिल्ली तथा मुंबई जैसे शहरों में नौकरी दिलाने का लालच देकर गरीबों और जरूरतमंद लोगों को सीमा पार से लाने के लिए तस्करों ने कुछ नए तरीकों पर ध्यान केन्द्रित किया है। दरअसल कोरोना संक्रमण काल में रोजगार छिन जाने के चलते लोगों को लालच देकर सीमा पार से तस्करी के माध्यम से लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। असम, बिहार इत्यादि बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी मानव तस्कर सक्रिय हो रहे हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) समस्त भारत में मानव तस्करी पर शोध करा रहा है, जिसके तहत पिछले दिनों झारखण्ड में भी प्रभावित जिलों और गांवों में भी मानव तस्करी के खिलाफ कार्य कर रही संस्था ‘दीया सेवा संस्थान’ द्वारा अध्ययन किया गया। एनएचआरसी की पहल पर किए गए इस अध्ययन में कुछ मानव तस्करों की केस स्टेडी करने पर देखा गया कि वे किन परिस्थितियों और सबूतों के आधार पर निचली अदालतों से बच निकलते हैं। संस्था का कहना है कि ऐसे मामलों में शुरूआती दौर में तो पीडि़तों को कुछ निजी संस्थाओं और अर्धसरकारी संस्थाओं से मदद मिलती है लेकिन जैसे ही मामला दर्ज होता है, मदद मिलनी बंद हो जाती है। मानव तस्करी का कोई मामला दर्ज होने के बाद पीडि़ता का परिवार दबाव में रहता है, उन पर बार-बार केस वापस लेने का दबाव बनाया जाता है। यहां तक कि उन्हें गांव में रहना तक मुश्किल हो जाता है।

हाल ही में उड़ीसा हाईकोर्ट ने मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अपने आदेश में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि वेश्यावृति के लिए मानव तस्करी तो नशीले पदार्थों की तस्करी से भी अधिक जघन्य अपराध है। न्यायमूर्ति एसके पाणिगृही ने 29 जून के अपने आदेश में कहा था कि सरकार की एक सर्वव्यापी, आचारी, नैतिक और वेश्यावृत्ति विरोधी मुद्रा है लेकिन व्यवहार में कानून और उनके अमल के बीच एक व्यापक अंतर है, जिस कारण मानव तस्करी के मामलों में सजा की दर बेहद कम होती है। अदालत ने यह टिप्पणी कोलकाता से देह व्यापार के लिए लड़कियों की तस्करी के आरोप में पकड़े गए पंचानन पाधी नामक व्यक्ति की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान की थी। अदालत का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र के पलेरमो प्रोटोकोल के मुताबिक राज्य का दायित्व है कि वह ऐसा पर्याप्त तंत्र बनाए ताकि अपराधियों पर मुकद्दमा चलाने के अलावा पीडि़तों को बचाया जा सके और ट्रैफिकिंग को रोका जा सके। अदालत द्वारा यह सुझाव भी दिया गया कि किसी अभियुक्त पर आरोप तय करते समय अदालतों को यूएन प्रोटोकोल में निर्धारित ‘मानव तस्करी’ की परिभाषा को ध्यान में रखना चाहिए।

बहरहाल, भारत में मानव तस्करी की समस्या धीरे-धीरे नासूर का रूप लेती जा रही है। करीब दो साल पहले पुणे के मदरसे रूपी यतीमखाने का एक मामला सामने आया था, जहां से 36 ऐसे बच्चों को छुड़ाया गया था, जिनमें से कोई भी यतीम नहीं था बल्कि बिहार-झारखंड से उन बच्चों के परिजनों को बहला-फुसलाकर अच्छी तालीम देने के नाम पर लाया गया था और मदरसे में न केवल उनका यौन शोषण किया जाता था बल्कि मदरसा मानव तस्करी का अड्डा भी बना था। देशभर के विभिन्न हिस्सों से मानव तस्करी के ऐसे मामले लगातार सामने आते रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक विश्वभर में दो करोड़ से भी ज्यादा लोग मानव तस्करी से पीडि़त हैं, जिनमें से करीब 68 फीसदी को जबरन मजदूरी के काम में लगाया जाता है। करीब 26 फीसदी बच्चे और 55 फीसदी महिलाएं और लड़कियां तस्करी की शिकार होती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार विगत एक दशक में भारत में हुई मानव तस्करी में 76 फीसदी लड़कियां और महिलाएं हैं।

मानव तस्करी का धंधा कम समय में भारी मुनाफा कमा लेने का जरिया है। इसी लालच के चलते यह समाज के लिए गंभीर समस्या बन रहा है। ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के बाद मानव तस्करी को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध माना गया है और अगर बात एशिया की हो तो भारत इस तरह के अपराधों का गढ़ माना जाता है। यह एक छिपा हुआ अपराध है, जो विश्वभर में लगभग हर देश में सभी तरह की पृष्ठभूमि वाले लोगों को प्रभावित करता है। संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार किसी व्यक्ति को डराकर, बल प्रयोग कर या दोषपूर्ण तरीके से भर्ती, परिवहन अथवा शरण में रखने की गतिविधि तस्करी की श्रेणी में आती है। देह व्यापार से लेकर बंधुआ मजदूरी, जबरन विवाह, घरेलू चाकरी, अंग व्यापार तक के लिए दुनिया भर में महिलाओं, बच्चों व पुरूषों को खरीदा व बेचा जाता है और आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 80 फीसदी मानव तस्करी जिस्मफरोशी के लिए ही होती है जबकि शेष 20 फीसदी बंधुआ मजदूरी अथवा अन्य प्रयोजनों के लिए।

एनसीआरबी के अनुसार तस्करी के मामलों में भारत में मानव तस्करी दूसरा सबसे बड़ा अपराध है। कुछ आंकड़ों के मुताबिक पिछले करीब एक दशक में ही यह कई गुना बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है। देश के लगभग हर राज्य में मानव तस्करों का नेटवर्क फैला हुआ है, जहां बड़े पैमाने पर इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ तो मानव तस्करी के मुख्य स्रोत और गढ़ माने जाते हैं। मानव तस्करी के दर्ज होने वाले 70 फीसदी से अधिक मामले इन्हीं राज्यों के होते हैं, जहां लड़कियों को रेड लाइट एरिया के लिए खरीदा और बेचा जाता है।

मानव तस्करी के पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ज्यादा से ज्यादा मामले भी दर्ज हो सकें, इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा मानव तस्करी रोकने के लिए तैयार विधेयक पर विचार करने के लिए बनाया गया मंत्री समूह जल्द बड़ा फैसला ले सकता है। दरअसल सरकार एक ऐसा ठोस विधेयक लाना चाहती है, जिससे मानव तस्करी पर रोक लगाने में सफलता मिल सके और इस जाल को तोड़ा जा सके। विधेयक में पीड़ितों और उनके परिजनों को सुरक्षा देने के अलावा जानकारी होने पर भी ऐसे मामलों को छिपाने वालों पर अपराध को बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई करने के प्रावधान हैं। हालांकि ऐसे प्रावधानों को लागू करते समय यह ध्यान रखा जाना बेहद आवश्यक है कि चूंकि देश में कानून बनाने और उन्हें सख्ती से लागू कराने के मामले में बड़ा अंतर देखा जाता रहा है। हमारे यहां बहुत से मामलों में कड़े कानूनों के बावजूद असामाजिक तत्व बेखौफ अपना खेल खेलते हैं। इसलिए मानव तस्करी के मामले में कड़े कानूनी प्रावधानों की सतत निगरानी की व्यवस्था के साथ-साथ ऐसा निगरानी तंत्र विकसित करने की भी दरकार है ताकि अपने रसूख के बल पर आरोपी छूट न सकें। दरअसल मावनता को शर्मसार कर देने वाली मानव तस्करी सभ्य समाज के माथे पर बदनुमा दाग है।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betyap giriş
hititbet giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
jojobet
jojobet
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet resmi giriş
betpark giriş
betkom giriş
betkom resmi giriş
jojobet
jojobet
betkom giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş