आगामी भीषण आपातकाल का सामना करने हेतु प्रत्येक का सक्षम होना आवश्यक : सद्गुरु डॉक्टर चारुदत्त पिंगले जी

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 वाराणसी – ‘कोरोना महामारी का प्रकोप समाप्त होने पर जीवन तुरंत पूर्ववत होगा’, इस भ्रम में न रहकर जनता को वास्तविकता का सामना करना होगा । आज विकसित अमेरिका सहित अनेक राष्ट्र मंदी की गर्त में हैं । अनेक विशेषज्ञों ने आनेवाले समय में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी की संभावना व्यक्त की है । चीन का विस्तारवाद एवं पाकिस्तान का जिहादी आतंकवाद भारत को युद्ध हेतु उकसाने का प्रयास कर रहा है । अनेक मुस्लिम राष्ट्रों में गृहयुद्ध चल रहे हैं । राजधानी दिल्ली में निरंतर भूकंप के झटके आ रहे हैं और आगे भूकंप की तीव्रता बढने की संभावना व्यक्त की जा रही है । कुल मिलाकर विश्‍व के तीसरे विश्‍वयुद्ध की दिशा में यात्रा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखते हुए इस काल में हमें अपने परिवार और हिन्दू समाज की, साथ ही राष्ट्र की रक्षा भी करनी है । इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से सक्षम बनाना, यही कालानुसार साधना है । इसके लिए सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से चल रहे ‘ऑनलाइन सत्संग शृंखलाओं’ का लाभ लें, ऐसा आवाहन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने किया ।


वेे सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित ‘ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ में ‘आपातकाल में हिन्दुओं का कर्तव्य और धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना’ विषय पर बोल रहे थे । कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर पहली बार हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, गुरुमुखी, बांग्ला, ओडिया, तेलुगु, कन्नड, तमिल और मलयालम, इन 11 भाषाओं में ऑनलाइन पद्धति से गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया गया । इस महोत्सव का प्रारंभ श्री व्यासपूजन और श्री गुरुपूजन से हुआ । यू-ट्यूब और फेसबुक के माध्यम से ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सवों’ का देश-विदेश में प्रसारण किया गया । इस कार्यक्रम का संपूर्ण विश्‍व के 1 लाख 79 हजार जिज्ञासुओं और साधकों ने प्रत्यक्ष लाभ लिया । इसके साथ ही फेसबुक के माध्यम से  3 लाख 55 हजार से भी  अधिक  जिज्ञासुओं तक विषय पहुंचाया गया ।

सद्गुरु (डॉ.) पिंगळेजी ने आगे कहा, ‘‘सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी गत अनेक वर्षों से आगामी आपातकाल के विषय में और उसका सामना करने के लिए किए जानेवाले प्रयत्नों के विषय में मार्गदर्शन कर रहे हैं । भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, ‘न मे भक्तः प्रणश्यति ।’ अर्थात ‘मेरे भक्तों का नाश नहीं होता । ईश्‍वर की भक्ति करने पर ही ईश्‍वर संकटकाल में हमारी रक्षा करेंगे, इसकी निश्‍चिति रखें !’ धर्म को ग्लानि आने पर पृथ्वी पर पाप का बोझ बढता है । इसके फलस्वरूप पृथ्वी पर पाप करनेवालों की मात्रा कम होने के लिए आपातकाल और युद्धकाल आते हैं । इस आपातकाल के उपरांत निर्माण होनेवाले अनुकूल वातावरण में रामराज्य की अर्थात धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी और पुन: संपतकाल आरंभ होगा अर्थात अच्छे दिन आएंगे । ऐसा होने पर भी आनेवाले आपातकाल से तर जाने के लिए कालानुसार उचित साधना करना अनिवार्य है । इसलिए प्रतिदिन कुलदेवता/इष्टदेवता का नामजप करना, ईश्‍वर से प्रार्थना कर प्रत्येक कृति करना आवश्यक है ।

इस अवसर पर रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में सनातन के ‘धर्मकार्यासाठी जाहिराती आदी अर्पण मिळवणे, ही समष्टी साधना !’ (‘धर्मकार्य हेतु विज्ञापन आदि अर्पण-निधि प्राप्त करना, यह समष्टि साधना !’) इस मराठी ग्रंथ का श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के मंगलहस्तों लोकार्पण हुआ । 

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