भारत ने गलवान में बना डाला वह पुल जिससे सुलगा है चीन

DSDBO-Road

DSDBO रोड
DSDBO रोड (साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

लद्दाख से एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गलवान में भारत ने वह पुल तैयार कर लिया है, जिसे चीन रोकना चाहता था। गलवान में ही पिछले दिनों चीन के धोखे से किए वार में 20 सैनिक बलिदान हो गए थे। झड़प में 43 चीनी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर आई थी।
रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा है कि भारतीय जवानों पर चीन का हमला पूर्व-नियोजित था। लेकिन भारत चीनी सशस्त्र बलों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से एक इंच भी आगे बढ़ने नहीं देगा। यह बातें उन्होंने मीडिया के सवालों के जवाब में कहीं।
शुक्रवार (19 जून, 2020) को श्रीपद नाईक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आज चीन की भारत के प्रति आक्रमकता अकारण है। चीन के तरफ से छह-सात पोस्ट पर हमला पूर्व नियोजित था।
सेना के इंजीनियरों ने पूर्वी लद्दाख में गलवान नदी पर 60 मीटर लंबे पुल निर्माण पूरा किया है, जो भारतीय सेना की पहाड़ी नदी के पार जाने की राह को आसान बनाता है। यह पुल संवेदनशील क्षेत्र में भारत की पकड़ मजबूत करेगा और दरबुक से दौलत बेग ओल्डी तक 255 किलोमीटर की रणनीतिक सड़क को सुरक्षित करेगा।
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक चीन ने इस पुल के निर्माण को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद भी इस पुल का निर्माण इंजीनियरों द्वारा पूरा कर लिया गया। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, “हमने स्टैंड-ऑफ के माध्यम से इस पुल पर काम नहीं रोका और 15 जून को हिंसा का सामना करने के बावजूद काम जारी रखा।”
सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) रोड को पूरा होने में लगभग दो दशक लग गए। इसका कारण कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा इस सड़क के निर्माण फंडों का दुरुपयोग है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है सीवीसी के निर्देश पर मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीई) द्वारा की गई एक जाँच में 2011 में पाया गया कि सड़क का निर्माण इस तरह हो रहा था कि यह हर साल गर्मियों में क्षतिग्रस्त हो जाती थी, क्योंकि बर्फ पिघलने के कारण श्योक नदी में बाढ़ आ जाती थी।
CTE ने आगे अनुमान लगाया कि परियोजना के लिए आवंटित धन का आधा हिस्सा गलत तरीके से लिया गया था। DSDBO सड़क के लिए 320 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन इस परियोजना से लगभग 160 करोड़ रुपये का गबन किया गया। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा की गई थी। उस समय मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। मूल सड़क को 2012 तक पूरा किया जाना था, लेकिन समय सीमा बाद में 2014 तक बढ़ा दी गई थी, बाद में इसे 2017 में कर दिया गया।
इस बीच लेह में लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की भी खबर आ रही है। वायु सेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने लेह और श्रीनगर का दौरा किया है।

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