गलतियां कभी बांझ नहीं होती

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गलतियां बांझ नहीं होती, उनके भी बच्चे होते हैं| पंडित नेहरू द्वारा की गई गलतियों के अब बच्चे हो गए हैं | दुनिया का सबसे ऊंचा पठार देश तिब्बत 1837 ईसवी तक तिब्बत भारत के अधीन रहा है महाराणा रंजीत सिंह के कमांडर हरि सिंह नलवा ने चीनियों को कूट-कूट कर लद्दाख को तो फतह किया ही तिब्बत को भी सिख साम्राज्य की सीमा में मिला लिया था | प्राचीन काल से ही तिब्बत भारत का अभिन्न अंग रहा है| आर्यों के लिए यह काशी हरिद्वार की तरह ही प्राचीन सांस्कृतिक केंद्र है|

यह जगजाहिर है भारत के नवनिर्मित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख तथा तिब्बत की एक समान संस्कृति है तिब्बत की संस्कृति कभी भी चीन की संस्कृति से मेल नहीं खाती|

1950 मैं कम्युनिस्ट चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तिब्बत पर हमला करती है| तिब्बत की राजधानी ल्हासा में लाखों तिब्बतियों का कत्लेआम किया जाता है| तिब्बती अपने मातृ देश भारत से मदद की गुहार लगाते हैं|
पंडित नेहरू 1962 की बड़ी गलती से पहले 12 वर्ष पूर्व भी 1950 में गलती कर चुके थे| इस गलती के दुष्परिणाम 1962 से भी अधिक घातक है|

पंडित नेहरू की सरकार तिब्बत को चीन का क्षेत्र मानकर उसे राजनीतिक मान्यता देती है| यह कड़वी सच्चाई है जनवादी चीन को मान्यता प्रदान करने वाला तथा तिब्बत को चीन की भूमि मानने वाला भी पहला देश भारत ही था|

नेहरू सरकार की भयंकर गलतियों भूलों के परिणाम 21वीं सदी में निकल कर आ रहे हैं | नेहरू की गलत नीतियों के कारण China आज पानी के हथियार अर्थात वाटर बंब से युक्त हो गया है|

इसे ऐसी समझिए|

भारत में बहने वाली गंगा नदी को छोड़कर सभी नदियों का मूल उद्गम तिब्बत ही है| सिंधु सतलुज ब्यास गंडक घग्घर सहित दर्जनों ऐसी नदियां हैं जिनका उद्गम तिब्बत है| इतना ही नहीं मां गंगा की दो सहायक नदियां तिब्बत से ही निकली है |भारत और चीन दो विशाल आबादी के देश है जहां प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता बहुत सीमित है| वर्ष 2013 तक चीन की 23000 नदियां लुप्त हो चुकी है| पानी के लिहाज से चीन एक सूखा देश है| लेकिन 1950 में तिब्बत पर चीन के कब्जे ने बाजी ही पलट दी है 470000 वर्ग किलोमीटर में फैले हुए तिब्बत में चीन के पास जितना पानी है उससे 40000 गुना पानी तिब्बत के पास है| तिब्बत का यह पठार दुनिया में मीठे जल का सबसे बड़ा भंडार… ज्यादातर नदियों का उद्गम तिब्बत होने से चीन अब उन नदियों के बहाव को मोड रहा है | चीन दुनिया का एकमात्र सबसे अधिक बांध निर्माता देश है चीन में लगभग 50,000 से ज्यादा बड़े बांध है चीन ने तिब्बत की लगभग सभी नदियों पर बांध बना दिए हैं| चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर भी 1000 किलोमीटर लंबी नहर बना रहा है उसके पानी को मोड़ने की कोशिश कर रहा है जो पूर्वी भारत में सिंचाई के काम आती है|

नदियों पर बने बांधों से चीन बिजली ही नहीं बना रहा इन्हें वॉटर बंब के रूप में भी भविष्य में इस्तेमाल कर सकता है जिससे भारत के बंगाल आसाम मिजोरम सहित बांग्लादेश जैसे देशों में भयंकर जल प्रलय आ सकती है|

काश! 1950 में भारत सरकार तिब्बत और चीन के हिस्से के रूप में मान्यता नहीं देती| तिब्बत जैसे भरे पूरे देश को चीन 1 वर्ष में ही निगल गया आज तिब्बत के निर्वासित नेता भारत में उन्होंने शरण ले रखी है| वह समानांतर सरकार चला रहे हैं दिल्ली से 500 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला मैं | भोले भाले तिब्बती आज भी नेहरू को कोसते हैं अपनी दुर्दशा के लिए| साम्राज्यवादी विस्तार वादी चीन के विरुद्ध आए दिन विरोध प्रदर्शन करते हैं… चीन के occupied देश तिब्बत की भारत में चीन के अवैध कब्जे के विरुद्ध समानांतर सरकार चल रही है यह कितना अनूठा है निर्वासित तिब्बतियों की सरकार को केंद्रीय तिब्बती प्रशासन कहते हैं लेकिन नेहरू से लेकर मोदी सरकार तक ने आज तक केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को तिब्बत की वास्तविक सरकार की मान्यता नहीं दी है|

हम आज भी गलतियों पर गलती किए जा रहे हैं| निर्वासित तिब्बतियों की सरकार को भारत सरकार को मान्यता देनी चाहिए|

आर्य सागर खारी✍✍✍

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