Categories
इतिहास के पन्नों से

महाराणा प्रताप और हाकीम खान सूरी

लाभेश जैन (कांसवा)
बंगलौर 9844402727

हाकीम खान सूरी का जन्म 1538 ई. में हुआ | ये अफगान बादशाह शेरशाह सूरी के वंशज थे |
*साम्प्रदायिक सौहार्द्र व आत्म स्वाभिमान के लिए महाराणा प्रताप की सेना में शामिल हुए।*
महाराणा प्रताप का साथ देने के लिए ये बिहार से मेवाड़ आए व अपने 800 से 1000 अफगान सैनिकों के साथ महाराणा के सामने प्रस्तुत हुए |
*हाकीम खान सूरी को महाराणा ने मेवाड़ का सेनापति घोषित किया, एवं हाकीम खान हरावल (सेना की सबसे आगे वाली पंक्ति) का नेतृत्व करते थे|

ये मेवाड़ के शस्त्रागार (मायरा) के प्रमुख थे| मेवाड़ के सैनिकों के पगड़ी के स्थान पर शिरस्त्राण पहन कर युद्ध लड़ने का श्रेय इन्हें ही जाता है | हाकिम खान सूरी एक मात्र व्यक्ति थे जो मुग़लो के खिलाफ मुसलमान होते हुए भी महाराणा प्रताप की तरफ से लड़े। जबकि कई राजपूत राजा उस समय अकबर की तरफ से लड़े थे। हाकीम खान सूरी हल्दीघाटी के युद्ध मे लड़ते लड़ते शहिद होकर अमर हो गए।

एक बात तो सामने आयी है की हल्दीघाटी के युध्द में महाराणा प्रताप जी हारे नहीं (वह विजय चित्तोड के भीषण नरसहार 1568 का बदला था) हल्दीघाटी युद्ध मे आक्रमण के प्रमुख महान योध्दा हाकीम खान सुरी थे उनकी वजह से यह विजय प्राप्त हूई !
खमनोर(उदयपुर).अकबर के खिलाफ युद्ध लडने वाले हाकीम खान सूरी जिनके बिना हल्दीघाटी, के युद्ध की कहानी अधूरी है। हाकीम खान इस युद्ध में हर वक्त महाराणा प्रताप के साथ खड़े रहे। इतना ही नहीं, प्रताप की सेना को कई दांव-पेच भी सिखाए।
महाराणा और अकबर की सेना के बीच युद्ध के दौरान मेवाड़ के सेनापति हाकीम खान सूरी का सिर धड़ से अलग हो गया।
– बावजूद कुछ देर तक वे घोड़े पर योद्धा की तरह सवार रहे। कहते हैं कि मृत्यु के बाद हल्दी घाटी में जहां उनका धड़ गिरा। वहीं, समाधि बनाई गई।
– उन्हें अपनी तलवार के साथ ही दफनाया गया था।
*हाकीम खान सूरी अफगानी मुस्लिम पठान थे। वे महाराणा प्रताप के तोपखाने के प्रमुख हुआ करते थे।*
– हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर की सेना के खिलाफ प्रताप की सेना के सेनापति के रूप में भी रहे। – दूसरी ओर अकबर की तरफ से आमेर के राजा मान सिंह सेनापति रहे।
मुगल सेना की ओर से हरावल का नेतृत्व जगन्नाथ कछवाहा कर रहा था, जिसके साथ अली आसिफ खान माधोसिंह और मुल्ला काजी खान तथा सीकरी के शेखजादे थे, इसी के साथ ही बारा के सैयद भी थे।
*महाराणा के हरावल में नेतृत्व हाकीम खान सूरी कर रहा था।* साथ में डोडियों के सामन्त भीमसिंह, रामदास राठौड़, ग्वालियर के राजा रामसिंह तोमर अपने तीनों बहादुर पुत्रों के साथ मन्त्री भामाशाह और ताराचन्द भी थे।

हल्दीघाटी युद्ध में हाकीम खान सूरी के नेतृत्व में महाराणा के हरावल की सेना आगे बढ़ी। उसका सामना करने के लिए मुगल सेना के सेनापति जगन्नाथ कछवाहा के नेतृत्व में सेना सामने आयी।
हाकीम खान सूरी के आक्रमण का वेग इतना प्रखर था कि मुगल सैनिक उसे झेल नहीं पाए और भाग खड़े हुए।
अलबदायूंनी जो युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी सेनानायक भी था मुगलों की तरफ से लड़ रहा था, युद्ध की स्थिति देख कर लिखता है कि हाकीम खान सूरी के नेतृत्व में महाराणा के सैनिक शेर की तरह मुगल सेना पर टूट पड़े थे, जबकि मुगल सैनिक भेड़-बकरियों के समान भाग खड़े हुए थे। हल्दीघाटी का रास्ता इतना दुर्गम था कि ऊबड़-खाबड़ मैदान जंगल तथा टेढ़ी-मेढ़ी पगडण्डियां और चारों तरफ कंटीली झाडियां थीं। इसलिए घुड़सवार या पैदल जवाबी हमला न कर सके। महाराणा प्रताप के नेतृत्व में केन्द्र में रहने वाली सेना भयानक आक्रमण के साथ हाकीम खान सूरी की सेना से आ मिली। युद्ध भयानक हो उठा और एक बार तो ऐसा लगने लगा कि महाराणा ने युद्ध जीत लिया है क्योंकि बॉरा के सैय्यद यदि युद्ध के मैदान में डटे न रहे होते तो मुगलों की पराजय निश्चित थी। इसका कारण यह है कि अन्य सेनापतियों के शिविर छिन्न-भिन्न हो गए थे। अधिकांश सैनिक भाग गये थे।
*हाकीम खान सूरी को महत्व देना महाराणा प्रताप की भावना के प्राकट्य के साथ-साथ युद्धक रणनीति का एक अंग था।*
उन्होंने मुगल विरोधी संघर्ष को विदेशी गुलामी के विरुद्ध संघर्ष का स्वरूप प्रदान किया। तमाम मुगल विरोधी तत्वों को एकजुट करने का उनका प्रयत्न निश्चय ही प्रशंसनीय था। उनकी इसी नीति के कारण हाकीम खान सूरी एवं जालौर के ताजखान ने उन्हें सहयोग दिया। राजस्थान के कई भागों से मुगल विरोधी तत्व मेवाड़ में आकर प्रताप के साथ हो गए। *वास्तव में हल्दीघाटी में मुगल सेना को पहली बार किसी सशक्त विरोधी का सामना करना पड़ा था* और हाकीम खान सूरी ने उस विरोध को अपनी शक्ति से समर्थ बना दिया। महाराणा प्रताप एकमात्र ऐसे राजा थे, जिनका राज्य छोटा था किन्तु उनका राजवंश बड़ा तेजस्वी था। वह एकमात्र ऐसे राजा थे, जिन्होंने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की थी। महाराणा प्रताप का क्षेत्र कुम्भलगढ़ के अन्तर्गत माना जाता था। गोगुन्दा में उसका विशेष सैन्य अड्डा था, जहां से छापामार लड़ाई का संचालन वह किया करते थे। अकबर ने महाराणा को इस स्थान से हटाने के लिए एक बड़ी सेना देकर मानसिंह को मेवाड़ में भेजा।

मानसिंह इस निश्चय के साथ युद्ध करने आया था कि या तो महाराणा को बन्दी बना कर लाएंगे या महाराणा को मार डालेंगे। मुगल सैन्य टुकडिय़ों के साथ मानसिंह खमनौर जा पहुंचा। महाराणा ने खमनौर की ओर बढ़ कर अपना मोर्चा जमाया।
*हल्दीघाटी के युद्ध की स्थिति का वर्णन सबसे महत्वपूर्ण हैं,* महाराणा की सेना में लगभग तीन हजार घुड़सवार मिलाकर कुस सैनुक बीस हजार की संख्या थी और इसी के मुकाबले मुगल सैनिक करीब अस्सी हजार के आसपास थे।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
betgaranti
betgaranti giriş
kolaybet
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş