Categories
हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

खेत-खलिहान और किसान के दर्द को समझने वाले किसान नेता थे चौधरी चरण सिंह

पुण्यतिथि 29 मई पर विशेष

डॉ. राकेश राणा

चौधरी चरण सिंह जानते थे कि इस देश की समृद्धि का रास्ता गांव और खेत-खलिहानों से ही निकलेगा। इसलिए जीवन भर यही कोशिश रही कि कैसे किसानों के जीवन को खुशहाल और बेहतर बनाया जाए क्योंकि इसके बिना भारत का विकास संभव नहीं। चौधरी चरण सिंह को जब-जब सत्ता में रहने या हस्तक्षेप करने का अवसर मिला उन्होंने अपने इसी जीवन मकसद के तहत किसानों और गरीबों के जीवन स्तर को उठाने वाली नीतियों को आगे बढ़ाया। चौधरी साहब जीवन भर किसान की खुशहाली के लिए खेती-बाड़ी को केन्द्र में रखकर कृषि के लिए नीति-निर्माण पर बल देते रहे। चौधरी साहब के प्रयास उपज के उचित दाम से लेकर, भू-सुधार, चकबंन्दी, भूराजस्व और भूमि-अधिग्रहण तथा जमींदारी उन्मूलन जैसे साहसी और क्रांतिकारी निर्णय किसानों के हालात सुधारने में अहम साबित हुए। चौधरी साहब का जीवन में गांव-गरीब और किसान-मजदूर को समर्पित रहा।

23 दिसम्बर 1902 को बुलन्दशहर के नूरपुर में जन्मे चौधरी चरण सिंह जब आगरा विश्वविद्यालय से कानूनी शिक्षा पूरी कर सन् 1928 से गाजियाबाद कोर्ट में वकालत करने लगे और 1929 से ही राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय हो गए। जब 1930 में महात्मा गांधी द्वारा नमक कानून तोड़ने का एलान किया गया तो इसके समर्थन में चौधरी चरण सिंह ने हिण्डन नदी पर नमक बनाया। जिस आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 6 माह की जेल हुई। फिर 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में चौधरी चरण सिंह गिरफ्तार कर लिए गए। उसके बाद 1942 में अगस्त क्रांति के दौरान पुनः चौधरी साहब को गिरफ्तार कर लिया गया और फिर डेढ़ वर्ष की सजा हुई। अपने जेल प्रवास के दौरान ही चौधरी साहब ने जीवन-विद्या से जुड़ी पुस्तक ’शिष्टाचार’ लिखी। अर्थशास्त्र पर उनकी पुस्तक एक बहुमूल्य और बेजोड़ दस्तावेज है। चौधरी चरण सिंह राजनीति के शुरुआती दिनों में ही यह समझ गए थे कि भ्रष्टाचार का खात्मा किए बिना भारत का भला नहीं होने वाला है। जब पहली बार सन् 1937 में उत्तर प्रदेश के छपरौली से विधानसभा का चुनाव जीता, वहीं से किसान हितों को सर्वोपरि रखकर जीवन का प्रण लिया कि गांव-गरीब को अपना जीवन-मिशन रखना है। फिर तो निरन्तर 1946, 1952, 1962 और 1967 में विधानसभा पर छपरौली ने एकछत्र राज देश के किसानों के दिल में बसकर किया। जब सबसे पहले प्रदेश में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में उन्हें संसदीय सचिव बनाया गया तो उन्होंने राजस्व, चिकित्सा, सूचना, न्याय एवं लोक स्वास्थ्य सहित अन्य कई महत्वपूर्ण विभागों को प्रभावी ढंग से संभालकर बता दिया कि किसान ही इस देश को समझ सकता है।

स्वतंत्रता के बाद जब चौधरी चरण सिंह को 1951 में उत्तर-प्रदेश सरकार में न्याय एवं सूचना विभाग दिया गया तो उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में यह दायित्व संभाला। फिर उसके बाद 1952 में डॉ. सम्पूर्णानंद की कैबिनेट में राजस्व और कृषि विभाग के दायित्व का निर्वहन करने का अवसर मिला। इस अवसर को किसानों की किस्मत बदलने के रूप में देखते हुए चौधरी चरण सिंह ने 1 जुलाई 1952 को उत्तर प्रदेश में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन कर डाला। इस क्रांतिकारी कदम की ही देन है कि आज देश में छोटे किसान के रूप में गरीब-मजदूर वर्ग को भी खेती करने का अधिकार मिल सका। गांव के गरीब लोग किसान-मजदूर भी छोटे, मंझोले और सीमांत किसान बन सके। यह गरीबों के लिए एक इज्जतदार जीवन बख्शने वाला क्षण था। यह कदम ही उन्हें ससम्मान जीने का अधिकार दे सका। इससे गांव-देहात के हालात सुधर सके। इसी दिशा में उनका अगला क्रांतिकारी फैसला 1954 का उत्तर-प्रदेश भूमि संरक्षण कानून था। यह चौधरी चरण सिंह के महान प्रयासों से ही संभव हो सका कि आज किसान आजाद जीवन जी रहा है। चौधरी साहब किसान परिवार में पैदा ही नहीं हुए थे बल्कि वह स्वभाव से किसान थे। एक अच्छे और आम इंसान थे। वह जीवन में किसान हितों के लिए अनवरत प्रयासरत रहे। 1960 में जब सी.बी. गुप्ता मुख्यमंत्री बने, उनकी सरकार में चौ. चरण सिंह को गृह एवं कृषि मंत्रालय संभालने का दायित्व मिला। तो कई क्रांतिकारी बदलावों का मसौदा चौधरी साहब ने पेश किया। उन्हें कृषि मंत्रालय की बागडोर उनकी इसी प्रतिभा के चलते सौंपी गयी थी। निरन्तर राजनीति के जरिए गांव-गरीब के सेवादार के रूप में विभिन्न पदों पर रहते हुए चौधरी चरण सिंह देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और अंततः देश के पांचवें प्रधानमंत्री। उनका सर्वोंच्च सत्ता पर विराजमान होना देश में खेती-किसानी के सम्मान में राजनीति का किसान को राजतिलक था।

3 अप्रैल, 1967 को पहली बार उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। चौधरी साहब को उनकी निर्णायक प्रशासनिक क्षमता की धमक के लिए जाना जाता है। वर्ष 1967 में पूरे देश में दंगे हुए तब भी प्रदेश में कहीं जरा भी शोर-शराबा नहीं दिखायी दिया। 17 अप्रैल, 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया तो मध्यावधि चुनाव हुए। दुबारा 17 फरवरी, 1970 को पुनः मुख्यमंत्री बने। उन्हें राजनीति के चौधरी साहब ऐसे ही नहीं कहा जाता है बल्कि अपने सिद्धांतों और मर्यादित व्यवहार के कारण वहां भी उनकी चौधराहट चलती थी। आपातकाल के बाद जब वर्ष 1977 में चुनाव हुए और केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनी तो मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और चौ. साहब इस सरकार में गृहमंत्री। बनते ही उन्होंने एक राजनीतिक योद्धा की तरह समाज में बदलाव लाने वाले निर्णयों की ताबड़तोड़ झड़ी लगा दी। जिन साहसिक कदमों के लिए चौधरी साहब को नए भारत का आधार तैयार करने वाला नेता और आधुनिक राष्ट्र निर्माता माना जाए तो वे चौधरी चरणसिंह ने गृहमंत्री रहते हुए ही लिए। वह दूर-दृष्टा थे उन्हें मालूम था यह देश कैसा है, इसे कैसे चलाना है। उन्होंने गृहमंत्री बनते ही मंडल आयोग और अल्पसंख्यक आयोग की पहली स्थापना की।

जब सन् 1979 में चौधरी साहब को वित्तमंत्री और उप-प्रधानमंत्री का दायित्व संभालने का मौका मिला। तो उन्होंने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड जैसी परिणामी परिकल्पना को मूर्त रूप देते हुए कृषि क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण संस्थान की स्थापना कर डाली। जो आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदाता की भूमिका में रहता है। 28 जुलाई, 1979 को जब चौधरी चरण सिंह समाजवादी दलों, कांग्रेस यू और अन्य गठजोड़ों के सहयोग से भारत के पांचवें प्रधानमंत्री बने तो यह किसानी के प्रतिष्ठित होने का वह सुअवसर था जिसने भारतीय समाज में किसानी चेतना को नई उचाईयां प्रदान की। जो इस वर्ग की राजनीतिक अस्मिता को स्थापित करने में निर्णायक क्षण बना। आज 29 मई दो महान किसान नेताओं की पुण्यतिथि है, विजयसिंह पथिक और चौधरी चरणसिंह। दोनों का जीवन किसान संघर्षों को समर्पित रहा। दोनों ही जनपद बुलन्दशहर के एक ही क्षेत्र में पैदा हुए और जीवन भर गांव, गरीब और किसान-मजदूरों की बेहतरी के लिए संघर्षरत रहे। द्वय धरती पुत्रों को उनकी पुण्य तिथि पर शत्-शत् नमन।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
bettilt giriş
meritking giriş
matbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
kralbet
kralbet
imajbet giriş
xslot giriş
xslot giriş
betvole giriş
betvole giriş
bettilt
betvole giriş
betvole giriş
bettilt
gobahis giriş